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बहुध्रुवीयता का उदय
3.1 बहुध्रुवीयता की परिभाषा
बहुध्रुवीयता अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों में शक्ति के उस वितरण को कहते हैं जिसमें दो से अधिक राष्ट्र-राज्यों के पास लगभग समान सैन्य, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव हो। राजनीतिक सिद्धांतकार तीन संरचनाओं में अंतर करते हैं:
- एकध्रुवीयता: एकल प्रभुत्वशाली शक्ति (US, 1991–2008)
- द्विध्रुवीयता: दो प्रभुत्वशाली शक्तियां (US-USSR, 1947–1991)
- बहुध्रुवीयता: अनेक शक्ति केंद्र (2008 के बाद उभरती)
उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था में प्रमुख शक्ति केंद्र
- United States: अब भी नाममात्र सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था; अतुलनीय सैन्य शक्ति; NATO का नेतृत्व; प्रौद्योगिकी, वित्त और मृदु शक्ति में प्रभुत्व
- China: विश्व की दूसरी अर्थव्यवस्था; सबसे बड़ा विनिर्माण आधार; बढ़ती सैन्य शक्ति; BRI और AIIB के माध्यम से बहुपक्षीय प्रभाव
- Russia: प्रमुख परमाणु शक्ति; UNSC का स्थायी सदस्य; ऊर्जा महाशक्ति (Ukraine युद्ध से पहले); पोस्ट-Soviet क्षेत्र में क्षेत्रीय आधिपत्य
- European Union: सामूहिक GDP US के बराबर; महत्त्वपूर्ण मानक शक्ति; रणनीतिक स्वायत्तता और एकजुटता से जूझ रहा है
- India: सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था; उभरती सैन्य शक्ति; G20 अध्यक्षता (2023); Global South में बढ़ता प्रभाव; चौथा सबसे बड़ा रक्षा बजट
- क्षेत्रीय शक्तियां: Brazil (लैटिन अमेरिका), Saudi Arabia/UAE (मध्य पूर्व), Turkey (NATO और SCO के बीच)
3.2 China का उभार: केंद्रीय कारक
China का एक विकासशील राष्ट्र से संभावित महाशक्ति तक का सफर 21वीं सदी की परिभाषित भू-राजनीतिक कहानी है।
आर्थिक उभार
China के विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) — 1980 में Shenzhen से शुरू — ने निर्यात-नेतृत्व वृद्धि को गति दी। दिसम्बर 2001 में WTO में प्रवेश ने China को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत किया। China विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक (2009) और अधिकांश देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना।
सैन्य आधुनिकीकरण
China की People's Liberation Army (PLA) आधुनिक क्षमताओं के साथ रूपांतरित हुई है:
- पहला विमानवाहक पोत (Liaoning, 2012) और दूसरा स्वदेशी (Shandong, 2019)
- 2021 में परीक्षित हाइपरसोनिक मिसाइलें; DF-41 ICBM US मुख्य भूमि तक पहुंचने में सक्षम
- South China Sea का सैन्यीकरण — विवादित जल में कृत्रिम द्वीप; Permanent Court of Arbitration (2016) के फैसले को China ने अस्वीकार किया
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)
राष्ट्रपति Xi Jinping द्वारा 2013 में घोषित, BRI में Asia, Africa, Europe और लैटिन अमेरिका में बुनियादी ढांचा निवेश (बंदरगाह, रेलवे, सड़कें, पाइपलाइन, डिजिटल बुनियादी ढांचा) शामिल है — एक आधुनिक "रेशम मार्ग।" कुल निवेश $1 ट्रिलियन+ अनुमानित है। आलोचक इसे "ऋण-जाल कूटनीति" कहते हैं; China इसे दक्षिण-दक्षिण सहयोग कहता है।
Xi Jinping का समेकन
Xi का कार्यकाल सीमा हटाना (2018), "Wolf Warrior कूटनीति", 2021 Hong Kong राष्ट्रीय सुरक्षा दमन, और Taiwan पर तीव्र दबाव (अगस्त 2022 और 2023 में आक्रमण अनुकरण सैन्य अभ्यास सहित) ने US-China तनाव बढ़ाया है।
3.3 Russia और Ukraine संकट
Vladimir Putin (2000 से राष्ट्रपति, Medvedev के अधीन संक्षिप्त अंतराल को छोड़कर) के नेतृत्व में Russia ने पोस्ट-Soviet क्षेत्र में Russian प्रभाव के पुनः दावे का प्रयास किया।
प्रमुख संघर्ष बिंदु
- Georgian War (2008): Russia ने South Ossetia/Abkhazia में हस्तक्षेप किया
- Crimea का अधिग्रहण (2014): Russia ने Ukraine के Crimea प्रायद्वीप का अधिग्रहण किया, अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन; पश्चिमी प्रतिबंध लागू
- पूर्ण-पैमाने पर Ukraine आक्रमण (24 फरवरी 2022): Russia ने Ukraine के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी मोर्चों पर "विशेष सैन्य अभियान" शुरू किया
Ukraine युद्ध के निहितार्थ
- European Union और NATO की एकता मजबूत हुई (Germany ने हथियार आपूर्ति पर अपनी नीति पलटी)
- Finland (2023) और Sweden (2024) NATO में शामिल — सीधे Russia की सीमाओं तक गठबंधन का विस्तार
- Russia-China रणनीतिक भागीदारी गहरी हुई (फरवरी 2022 में "कोई सीमा नहीं" भागीदारी घोषित)
- वैश्विक खाद्य संकट उभरा (Ukraine प्रमुख अनाज निर्यातक है — "Europe की रोटी की टोकरी")
- India की "रणनीतिक स्वायत्तता" की परीक्षा हुई: India ने Russia की निंदा वाले UNGA वोटों में परहेज बरता और रियायती दरों पर Russian तेल खरीद जारी रखी
