सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
शहरी स्थानीय स्वशासन
5.1 संवैधानिक ढांचा (74वां संशोधन)
74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 (1 जून 1993 से प्रभावी) ने संविधान में Part IX-A और 12वीं अनुसूची जोड़ी, जिससे शहरी स्थानीय निकाय अनिवार्य हो गए। मुख्य प्रावधान:
- तीन प्रकार की नगरपालिकाएं: नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद, नगर निगम
- राज्य निर्वाचन आयोग के माध्यम से 5 वर्षीय चुनाव
- SC, ST (अनुपात में), महिलाओं के लिए आरक्षण (1/3 से कम नहीं)
- शहरी राजकोषीय विकेंद्रीकरण के लिए राज्य वित्त आयोग
- 3 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में वार्ड समितियां
- 12वीं अनुसूची में 18 कार्य (विवेकाधीन हस्तांतरण)
5.2 राजस्थान की शहरी स्थानीय निकाय संरचना
राजस्थान ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 (पुराने 1959 के अधिनियम को प्रतिस्थापित करते हुए) के माध्यम से शहरी स्वशासन लागू किया है। चार-स्तरीय संरचना:
| ULB प्रकार | जनसंख्या सीमा | राजस्थान में संख्या (2023) | शासन अधिनियम |
|---|---|---|---|
| नगर पंचायत | 25,000 तक | ~50+ | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 |
| नगर पालिका / नगरपालिका परिषद | 25,000 – 1 लाख | ~150 | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 |
| नगर परिषद | 1 लाख – 5 लाख | ~30 | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 |
| नगर निगम | 5 लाख से अधिक (या नामित) | 7 | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 |
राजस्थान के सात नगर निगम
- जयपुर (जयपुर हेरिटेज + जयपुर ग्रेटर — जयपुर में दो निगम)
- जोधपुर (उत्तर + दक्षिण — दो निगम)
- कोटा
- बीकानेर
- अजमेर
- उदयपुर
- भरतपुर
नगर निगम की शासन संरचना
- महापौर: पार्षदों (councillors) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित — राजस्थान ने प्रत्यक्ष निर्वाचन मॉडल से बदला
- आयुक्त: IAS/RAS अधिकारी — नगरीय प्रशासन का कार्यकारी प्रमुख
- पार्षद: वार्ड मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित; 50% महिला आरक्षण
- स्थायी समितियां: वित्त, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा — कार्यात्मक समितियां
5.3 शहरी स्थानीय निकायों के कार्य
12वीं अनुसूची (74वां संशोधन) के तहत 18 कार्य सूचीबद्ध हैं। राजस्थान का वास्तविक हस्तांतरण निम्नानुसार है:
पूर्णतः हस्तांतरित
- शहरी नियोजन, भूमि उपयोग विनियमन, सड़क/पुल रखरखाव
- सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलापूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- झुग्गी सुधार, सार्वजनिक सुविधाएं (पार्किंग, बस स्टैंड), सामाजिक कल्याण गतिविधियां
आंशिक रूप से हस्तांतरित / राज्य समवर्ती
- शहरी गरीबी उन्मूलन (राज्य योजनाएं अक्सर ULBs को बायपास करती हैं)
- आर्थिक विकास नियोजन (स्मार्ट सिटीज समानांतर निकाय हैं)
- पर्यावरण प्रबंधन
ULBs के स्वयं के राजस्व स्रोत
- संपत्ति कर (गृह कर) — मुख्य स्वयं-राजस्व स्रोत
- विज्ञापन कर
- उपयोगकर्ता शुल्क (जल, सीवेज, ठोस अपशिष्ट)
- लाइसेंस और परमिट शुल्क
- केंद्रीय और राज्य अनुदान (प्रमुख हिस्सा)
राजस्थान ULBs की राजकोषीय चुनौती
अधिकांश छोटे ULBs (नगर पंचायत और छोटी नगर पालिकाएं) अनुदान पर निर्भर हैं — स्वयं के राजस्व आमतौर पर व्यय का 20-30% ही कवर करते हैं। जयपुर के दो नगर निगम अधिक वित्तीय रूप से स्वावलंबी हैं लेकिन फिर भी राज्य अनुदान पर निर्भर हैं।
5.4 राजस्थान में स्मार्ट सिटी मिशन
केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन (2015) ने राजस्थान के पांच शहर चुने, प्रत्येक की अलग विशेषता:
- जयपुर — विरासत संरक्षण, integrated command and control centre (ICCC), स्मार्ट सड़कें, सौर ऊर्जा, जल
- उदयपुर — पर्यटन-आधारित स्मार्ट सिटी, झील संरक्षण, विरासत पर्यटन बुनियादी ढांचा
- कोटा — शिक्षा नगर फोकस, नदी तट विकास (चंबल घाट)
- अजमेर — तीर्थ स्मार्ट सिटी, पर्यटन बुनियादी ढांचा, जल
- जोधपुर — रेगिस्तानी-शहर अनुकूलन, सौर ऊर्जा, जल प्रबंधन, विरासत
मिशन ने प्रत्येक स्मार्ट सिटी के लिए Special Purpose Vehicles (SPVs) — अलग कंपनियां बनाईं, जिनमें महापौर अध्यक्ष और आयुक्त CEO के रूप में हैं, जो सामान्य नगर निगम संरचना के बाहर काम करती हैं। इसकी आलोचना निर्वाचित स्थानीय निकायों को बायपास करने के रूप में की गई है।
