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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

राजस्थान: पंचायती राज, शहरी स्थानीय स्वशासन

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 27 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

Q1 (5 अंक — 50 शब्द): राजस्थान की त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना का वर्णन करें।

उत्तर (HI): राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत तीन स्तर हैं: ग्राम पंचायत (सरपंच अध्यक्ष; 11,341), पंचायत समिति (प्रधान अध्यक्ष; 352), जिला परिषद (जिला प्रमुख अध्यक्ष; 33)। तीनों में हर 5 वर्ष में प्रत्यक्ष चुनाव। महिलाओं के लिए 50% आरक्षण; SC/ST हेतु जनसंख्या अनुपात में आरक्षण।


Q2 (5 अंक — 50 शब्द): राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012 पर टिप्पणी।

उत्तर (HI): राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम (2012) विश्व का पहला पंचायत-स्तरीय कानून है जो नागरिकों को विकास कार्यों पर शिकायत दर्ज कर 21 दिन में उत्तर पाने का कानूनी अधिकार देता है। सभी सरकारी कार्यालयों में लागू; राजस्थान संपर्क (हेल्पलाइन 181) से जुड़ा; GP, उपखंड और जिला स्तर पर जनसुनवाई अनिवार्य।


Q3 (5 अंक — 50 शब्द): राजस्थान के पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण पर टिप्पणी।

उत्तर (HI): राजस्थान में तीनों पंचायती राज स्तरों पर महिलाओं को 50% आरक्षण — संवैधानिक न्यूनतम 33% से अधिक। 2020 पंचायती राज चुनावों में महिलाओं ने 52.8% सीटें जीतीं। परंतु "सरपंच पति" की प्रवृत्ति (महिला सरपंच पर पुरुष नियंत्रण) महिला राजनीतिक सशक्तिकरण की गुणवत्ता को सीमित करती है।


Q4 (10 अंक — 150 शब्द): राजस्थान में ग्राम सभा के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक उपायों की चर्चा करें।

उत्तर (HI): ग्राम सभा जमीनी लोकतंत्र की संवैधानिक आधारशिला है — अनुच्छेद 243A और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 वर्ष में 4 बैठकों की अनिवार्यता, विकास योजनाओं की स्वीकृति और सामाजिक लेखापरीक्षा के अधिकार देते हैं।

वर्तमान कमियां: कोरम (10% सदस्य) का न भरना, प्रभुत्वशाली जाति का एजेंडा नियंत्रण, "सरपंच पति" प्रवृत्ति, वार्ड पंच की उपेक्षा और हाशिए के समुदायों में जागरूकता की कमी।

प्रभावी संचालन के उपाय:

  1. क्षमता निर्माण: सरपंच, वार्ड पंच, ग्राम सचिव को कानूनी शक्तियों और प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण; RGSA कार्यक्रम।
  2. डिजिटल पारदर्शिता: ग्राम सभा की कार्यवाही, व्यय और हितग्राही सूची का ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अनिवार्य प्रकाशन।
  3. महिला ग्राम सभा: हर मुख्य बैठक से पहले महिला ग्राम सभा का कानून का सख्त पालन।
  4. सामाजिक लेखापरीक्षा: MGNREGS सोशल ऑडिट यूनिट को हर ग्राम सभा में लेखापरीक्षा प्रस्तुत करने की अनिवार्यता।
  5. जागरूकता: SHG, आंगनवाड़ी, ASHA कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्राम सभा संगठन।
  6. PESA क्रियान्वयन: जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति बिना भूमि अधिग्रहण/खनन पर कठोर दंड।
  7. प्रॉक्सी-विरोधी तंत्र: महिला सरपंचों के स्वतंत्र कार्य की यादृच्छिक जांच; "सरपंच पति" मामलों की रिपोर्ट के लिए शिकायत तंत्र।

Q5 (5 अंक — 50 शब्द): PESA क्या है? यह राजस्थान में जनजातीय स्वशासन को कैसे मजबूत करता है?

उत्तर (HI): PESA (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम, 1996) अनुसूची V (जनजातीय) क्षेत्रों में पंचायती राज को विशेष शक्तियों के साथ लागू करता है — ग्राम सभा प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण, भूमि अधिग्रहण से पहले परामर्श, लघु वनोपज पर स्वामित्व। राजस्थान ने 2011 में PESA नियम अधिसूचित किए; बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, सिरोही प्रभावित।


Q6 (10 अंक — 150 शब्द): राजस्थान के शासन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका का मूल्यांकन करें। उन्हें क्या चुनौतियां हैं?

उत्तर (HI): राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) — राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के तहत — 7 नगर निगम, ~30 नगर परिषद, ~150 नगर पालिकाएं और ~50 नगर पंचायतें शामिल हैं; 2.92 करोड़ शहरी आबादी की सेवा (24.9% शहरीकरण)।

उपलब्धियां: जयपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, जोधपुर को स्मार्ट सिटी मिशन में ₹500+ करोड़; जयपुर का ICCC अग्रणी; स्वच्छ भारत में ठोस अपशिष्ट सुधार; 50% महिला आरक्षण से वार्ड प्रतिनिधित्व बेहतर।

चुनौतियां: (1) राजस्व निर्भरता — स्वयं के करों से 20-40% खर्च; (2) कार्यकारी अधिकारों की कमी — नगर नियोजन राज्य के पास; (3) समानांतर निकाय (Smart City SPV, DUDA) ULBs की भूमिका कमजोर करते हैं; (4) क्षमता की कमी; (5) तेज शहरीकरण का दबाव।