सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
क्षेत्रीय एवं तृतीय दल
3.1 भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) — नई जनजातीय शक्ति
स्थापना और संदर्भ
BAP को 2023 में विधानसभा चुनावों से तुरंत पहले राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया गया। इसके संस्थापक राजकुमार रोत (बांसवाड़ा के बागीडोरा से राजस्थान विधानसभा सदस्य) 2018 में जनजातीय अधिकारों और भूमि अधिकारों के मुद्दों पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे।
भील समुदाय (राजस्थान का सबसे बड़ा ST समूह, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही और राजसमंद में केंद्रित) ऐतिहासिक रूप से Congress या वामपंथी दलों को वोट देता रहा। वन अधिकार अधिनियम 2006 और PESA (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों तक) के कार्यान्वयन में Congress और BJP दोनों से असंतोष ने नई शक्ति के लिए राजनीतिक स्थान बनाया।
2023 चुनाव प्रदर्शन
- राजस्थान में 21 सीटों पर लड़ी
- 3 सीटें जीतीं: बागीडोरा (राजकुमार रोत स्वयं), चोरासी, गढ़ी
- मत प्रतिशत: कुल ~0.9%; प्रतिस्पर्धी जनजातीय सीटों में 20–30%+
- गुजरात और मध्यप्रदेश में भी प्रतिस्पर्धी — राजस्थान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
वैचारिक मंच
- PESA (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम 1996) का कार्यान्वयन
- जनजातीय पट्टों (भूमि अधिकार) के लिए वन अधिकार अधिनियम 2006 का पूर्ण कार्यान्वयन
- जनजातीय क्षेत्रों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर ST अधिकारियों की नियुक्ति
- विद्यालयों में जनजातीय भाषा (भीली, गरासिया) शिक्षा
- जनजातीय क्षेत्रों में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं हेतु भूमि अधिग्रहण का विरोध
राष्ट्रीय महत्व: BAP का उदय 2023 RPSC Mains परीक्षा में पूछा गया (2 अंक: "2023 राजस्थान चुनाव में BAP के प्रदर्शन की व्याख्या करें") — इसकी परीक्षा-प्रासंगिकता की पुष्टि।
3.2 राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP)
उत्पत्ति और नेतृत्व
2018 में हनुमान बेनीवाल (नागौर के खींवसर निर्वाचन क्षेत्र) ने BJP छोड़ने के बाद स्थापित। बेनीवाल नागौर, सीकर और झुंझुनूं क्षेत्रों में जाट समुदाय की मुखर राजनीतिक आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। RLP 2019 लोकसभा चुनाव में NDA का हिस्सा था किंतु 2020–21 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के साथ खड़े होते हुए पंक्ति से अलग हो गया।
2023 प्रदर्शन और गठबंधन रणनीति
RLP ने 1 सीट जीती (बेनीवाल खींवसर से) और 19 सीटों पर प्रतिस्पर्धा की। लोकसभा गठबंधन रणनीति (2024 में Congress-INDIA गठबंधन के साथ) विचारधारा से अधिक सामरिक लचीलापन दर्शाती है — RLP खुद को वहां स्थान देती है जहां जाट समुदाय के हित सर्वश्रेष्ठ रूप से पूरे हों।
संगठनात्मक आधार: मुख्यतः नागौर और सीकर क्षेत्रों में जाट-समुदाय नेटवर्क; छात्र संगठन संबंध; किसान आंदोलन की विरासत।
3.3 राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी (BSP)
BSP ने 2023 चुनाव में 2 सीटें जीतीं (बांदीकुई और साहड़ा निर्वाचन क्षेत्र)। राजस्थान में इसकी सीट संख्या से अधिक महत्ता रही है — SC-केंद्रित निर्वाचन क्षेत्रों में BSP उम्मीदवार BJP-विरोधी मत विभाजित करके Congress को नियमित रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।
मायावती गठबंधन गतिशीलता: राजस्थान में BSP ने राष्ट्रीय BSP रणनीति के आधार पर चुनावी गठबंधन (Congress, SP के साथ, स्वतंत्र रूप से) के बीच विकल्प बदले हैं — प्रत्येक चुनाव चक्र में Congress की सीट-समेकन के लिए सामरिक जटिलताएं पैदा करते हुए।
3.4 वामपंथी दल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) और CPI की राजस्थान में ऐतिहासिक जड़ें हैं — विशेष रूप से अलवर के औद्योगिक पट्टे, सीकर की किसान आंदोलन परंपरा (सीकर विद्रोह 1934, शेखावाटी किसान आंदोलन) और जनजातीय पट्टी निर्वाचन क्षेत्रों में। 1980 के दशक से इनका चुनावी आधार काफी सिकुड़ गया है:
- CPI-M: 1970–80 के दशक में अलवर, सीकर में सीटें जीतीं; अब हाशिए पर
- CPI: नगण्य उपस्थिति; कभी-कभी खनन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारती है
- दोनों दल राजस्थान की BJP-विरोधी गठबंधन राजनीति में Congress का समर्थन करते हैं
