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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

मुख्य बिंदु

आंतरिक सुरक्षा: खतरे, बल, एजेंसियाँ, चुनौतियाँ

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 1 / 13 0 PYQ 27 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. भारत का आंतरिक सुरक्षा खतरा परिदृश्य

    • खतरे: वामपंथी उग्रवाद (LWE/नक्सलवाद), पूर्वोत्तर में विद्रोह, सीमापार आतंकवाद (J&K और पंजाब), साइबर खतरे, संगठित अपराध और नार्को-आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा, और कट्टरपंथीकरण
    • नोडल मंत्रालय: गृह मंत्रालय (MHA)
  2. वामपंथी उग्रवाद (LWE)

    • उत्पत्ति: चारू मजूमदार का 1967 नक्सलबाड़ी विद्रोह; भारत की सबसे लंबे समय से चली आ रही आंतरिक सुरक्षा चुनौती
    • चरम (2009–2010): 10 राज्यों के 106 जिलेरेड कॉरिडोर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तक फैला
    • 2025 की स्थिति: प्रभावित जिले घटकर ~18–20 (80% से अधिक कमी)
  3. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)

    • 26/11 मुंबई हमलों (नवंबर 2008) के बाद NIA अधिनियम, 2008 के तहत स्थापित
    • केंद्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी; UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, साइबर-आतंकवाद और तस्करी के मामलों की जाँच
    • राज्य सरकार की सहमति के बिना सभी राज्यों में क्षेत्राधिकार
  4. MHA के अंतर्गत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs)

    • बल: CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB, NSG, NDRF
    • कुल CAPF कार्मिक: ~10 लाख
  5. गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम — UAPA 1967

    • 2004, 2008, 2012 और 2019 में महत्त्वपूर्ण संशोधन; भारत का प्राथमिक आतंकवाद-रोधी और अलगाववाद-रोधी कानून
    • 2019 संशोधन: व्यक्तियों (केवल संगठनों के अलावा) को आतंकवादी घोषित करने की शक्ति
    • पूर्व अनुमति के बिना NIA संपत्ति कुर्की कर सकती है
    • आलोचकों का कहना है कि UAPA का दुरुपयोग पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असहमतों के विरुद्ध हो सकता है
  6. 26/11 मुंबई हमले (26 नवंबर 2008)

    • दस LeT आतंकवादी कराची से नाव के जरिये CST मुंबई पहुँचे
    • 10 स्थानों पर हमले — ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, नरीमन हाउस — 60 घंटों से अधिक
    • 166 लोग मारे गए, 300+ घायल; अजमल कसाब जीवित पकड़ा गया, 2012 में फाँसी
    • परिणाम: NIA का गठन, तटीय सुरक्षा में सुधार, NSG हब स्थापना
  7. पूर्वोत्तर विद्रोह

    • अनेक सशस्त्र समूह: ULFA (असम), NSCN(IM) और NSCN(K) (नागालैंड), कुकी-ज़ो समूह (मणिपुर), HNLC (मेघालय), ब्रू/रियांग संघर्ष (मिज़ोरम-त्रिपुरा)
    • सबसे लंबी चल रही वार्ता: नागा शांति प्रक्रिया — 1997 से NSCN(IM) के साथ बातचीत
    • ब्रू-रियांग समझौता (जनवरी 2020): 37,000 ब्रू शरणार्थी त्रिपुरा में स्थायी रूप से बसाए गए
  8. आंतरिक सुरक्षा के लिए साइबर खतरे

    • राज्य-प्रायोजित APTs (मुख्यतः चीनी और पाकिस्तानी समूह), महत्त्वपूर्ण अवसंरचना पर रैनसमवेयर (AIIMS दिल्ली 2022 — 5 दिन सर्वर ठप), वित्तीय धोखाधड़ी
    • नोडल एजेंसियाँ: CERT-In (धारा 70B, IT अधिनियम 2000) और NCIIPC (राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र)
  9. संगठित अपराध और नार्को-आतंकवाद

    • गोल्डन क्रेसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और गोल्डन ट्राएंगल (म्यांमार-थाईलैंड-लाओस) मार्गों से मादक पदार्थ तस्करी पंजाब और पूर्वोत्तर भारत को प्रभावित करती है
    • नार्को-आतंकवाद — नशीले पदार्थों के व्यापार से आतंकी वित्तपोषण — NIA और NCB द्वारा संयुक्त रूप से जाँच
    • पंजाब नशा संकट: सिंथेटिक ड्रग (चिट्टा) महामारी पाकिस्तान समर्थित तस्करी से जुड़ी
  10. जम्मू और कश्मीर सुरक्षा

    • अनुच्छेद 370 उन्मूलन (अगस्त 2019) के बाद: J&K को दो UT — J&K और लद्दाख — में विभाजित
    • आतंकी मृत्यु 267 (2018) से घटकर 26 (2024); नागरिक मृत्यु 86 (2018) से घटकर 15 (2024)
    • LOC सुरंगों, ड्रोन, हथियारों की आपूर्ति (JeM, LeT, हिज्बुल) द्वारा सीमापार आतंकवाद जारी
    • ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025): पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी शिविरों पर सटीक हमले — भारत की आतंकवाद-रोधी नीति में बड़ा बदलाव
  11. कट्टरपंथीकरण और ऑनलाइन उग्रवाद

    • सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग, IS/ISIS और अल-कायदा (अंसार गज़वत उल हिंद) प्रचार के जरिये घरेलू कट्टरपंथीकरण
    • NIA ने 2014 से कट्टरपंथीकरण से जुड़े आरोपों के तहत 100+ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया
    • दक्षिणपंथी उग्रवादी हिंसा — भीड़ हत्या, सांप्रदायिक दंगे — NCRB द्वारा भी दर्ज
  12. AFSPA (सशस्त्र बल विशेष शक्तियाँ अधिनियम)

    • लागू: नागालैंड, मणिपुर (2023 में आंशिक हटाया गया), अरुणाचल प्रदेश, असम (आंशिक)
    • अशांत क्षेत्रों में सेना और केंद्रीय बलों को बिना वारंट तलाशी, गिरफ्तारी और बल प्रयोग की शक्ति
    • विवादास्पद: SC ने Extra Judicial Execution Victims Association बनाम भारत संघ (2016) में माना कि AFSPA पूर्ण उन्मुक्ति नहीं देता — मुठभेड़ों की जाँच होनी चाहिए