सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु एक नज़र में
मतदान व्यवहार — प्रमुख निर्धारक
- व्यक्तियों/समूहों के मतदान निर्णय का प्रतिरूप — मतदान करना है या नहीं, और किसे मत देना है
- जाति भारत में सबसे महत्त्वपूर्ण निर्धारक है
- अन्य कारक: धर्म, क्षेत्रीय/भाषायी पहचान, सत्ता-विरोध (anti-incumbency)
- उम्मीदवार की छवि, दलीय नेतृत्व, कल्याण वितरण, आर्थिक मुद्दे भी विकल्प को प्रभावित करते हैं
भारत निर्वाचन आयोग — संवैधानिक आधार
- संविधान के Article 324 के तहत स्थापित
- संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण
- 2025 तक: मुख्य निर्वाचन आयुक्त + 2 निर्वाचन आयुक्त
- एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय
EVM और VVPAT — प्रमुख तथ्य
- EVM का उपयोग 2004 से सभी आम चुनावों में
- BEL (Bharat Electronics Ltd) और ECIL (Electronics Corporation of India Ltd) द्वारा निर्मित
- स्वतंत्र — इंटरनेट से नहीं जुड़े; तकनीकी विशेषज्ञ समितियों द्वारा प्रमाणित
- VVPAT मशीनें 2019 लोकसभा चुनावों से राष्ट्रव्यापी तैनात
NOTA — परिचय और प्रभाव
- PUCL बनाम भारत संघ (2013) के SC आदेश के बाद प्रारंभ
- EVM पर मतपत्र के अंतिम विकल्प के रूप में उपलब्ध
- NOTA मत अलग से गिने और प्रकाशित किए जाते हैं
- परिणाम प्रभावित नहीं होते — यदि NOTA को सर्वाधिक मत मिलें तो भी पुनर्चुनाव नहीं; अगला सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार विजयी होता है
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) — प्रकृति एवं दायरा
- चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद लागू
- प्रतिबंध: नई योजनाओं की घोषणा, प्रचार के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग, ECI की अनुमति के बिना वरिष्ठ अधिकारियों का स्थानांतरण
- कोई वैधानिक आधार नहीं — ECI की नैतिक प्रभुत्ता और Article 324 की शक्तियों द्वारा लागू
जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम — अंतर
- RPA 1950: निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और मतदाता सूची तैयार करना
- RPA 1951: चुनाव का संचालन, उम्मीदवारों की योग्यता, चुनावी अपराध, भ्रष्ट आचरण, चुनाव विवाद
- ये दोनों अधिनियम मिलकर प्राथमिक चुनावी विधान बनाते हैं
चुनावी बॉण्ड — योजना और रद्दीकरण
- चुनावी बॉण्ड योजना (2018): गुमनाम वित्तपोषण — SBI से बॉण्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को दान
- ADR बनाम भारत संघ (2024): पाँच न्यायाधीशों की SC पीठ ने सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया
- मतदाताओं के Article 19(1)(a) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन
- SBI को सभी डेटा ECI को सौंपने का निर्देश; दाता-प्राप्तकर्ता डेटा सार्वजनिक प्रकाशित
मतदाता मतदान प्रवृत्तियाँ
- 2024 लोकसभा: 65.79% मतदान; ~97 करोड़ पात्र मतदाता; 543 निर्वाचन क्षेत्र; 7 चरण
- 1952 (45.7%) से मतदान में सामान्यतः वृद्धि हुई
- 2014 के बाद कुछ चुनावों में महिला मतदान पुरुषों से अधिक
- राजस्थान 2023 विधानसभा चुनाव: 74.2% मतदान
सत्ता-विरोध — भारतीय प्रतिरूप
- भारतीय चुनावों में सर्वाधिक प्रभावी शक्तियों में से एक
- राज्य स्तर पर सत्तारूढ़ दल लगभग 60–70% चुनाव हारते हैं
- शासन की विफलता, अधूरे वादों और नेतृत्व की थकान की मतदाता द्वारा सज़ा
- राजस्थान: 1993 से BJP-Congress का एकांतर — सत्ता-विरोध का उत्कृष्ट उदाहरण
चुनाव सुधार समितियाँ
- विधि आयोग रिपोर्ट 255 (2015): चुनाव में राज्य वित्तपोषण, व्यय सीमा, मत खरीद का अपराधीकरण, विवाद का शीघ्र निपटारा
- दिनेश गोस्वामी समिति (1990): चुनाव में आंशिक राज्य वित्तपोषण की सिफारिश
- इंद्रजीत गुप्त समिति (1998): आंशिक राज्य वित्तपोषण की सिफारिश
CEC नियुक्ति अधिनियम 2023 — परिवर्तित प्रक्रिया
- नियुक्ति अब 3 सदस्यीय चयन समिति द्वारा: PM (अध्यक्ष), एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, विपक्ष के नेता (या LS में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)
- 5 वरिष्ठ नौकरशाहों की खोज समिति नामों का पैनल तैयार करती है
- पूर्व प्रक्रिया: राष्ट्रपति द्वारा PM की सलाह पर CEC और EC की नियुक्ति — कोई औपचारिक समिति नहीं
- Anoop Baranwal बनाम भारत संघ (2023): SC ने CJI सहित स्वतंत्र समिति का निर्देश दिया था; नए कानून ने CJI को बाहर रखा
एक राष्ट्र एक चुनाव — कोविंद समिति (2024)
- राम नाथ कोविंद समिति (2024) ने LS और सभी राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव की सिफारिश की
- लाभ: चुनावी खर्च में कमी, निरंतर MCC प्रतिबंधों का अंत, बेहतर शासन निरंतरता
- चुनौतियाँ: राज्यों की संघीय स्वायत्तता, समय से पूर्व विघटन के परिदृश्य
- आवश्यक संवैधानिक संशोधन: Articles 83, 85, 172, 174
