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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

मुख्य बिंदु एक नज़र में

मतदान व्यवहार, चुनावी सुधार, निर्वाचन

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 1 / 11 0 PYQ 28 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु एक नज़र में

  1. मतदान व्यवहार — प्रमुख निर्धारक

    • व्यक्तियों/समूहों के मतदान निर्णय का प्रतिरूप — मतदान करना है या नहीं, और किसे मत देना है
    • जाति भारत में सबसे महत्त्वपूर्ण निर्धारक है
    • अन्य कारक: धर्म, क्षेत्रीय/भाषायी पहचान, सत्ता-विरोध (anti-incumbency)
    • उम्मीदवार की छवि, दलीय नेतृत्व, कल्याण वितरण, आर्थिक मुद्दे भी विकल्प को प्रभावित करते हैं
  2. भारत निर्वाचन आयोग — संवैधानिक आधार

    • संविधान के Article 324 के तहत स्थापित
    • संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण
    • 2025 तक: मुख्य निर्वाचन आयुक्त + 2 निर्वाचन आयुक्त
    • एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय
  3. EVM और VVPAT — प्रमुख तथ्य

    • EVM का उपयोग 2004 से सभी आम चुनावों में
    • BEL (Bharat Electronics Ltd) और ECIL (Electronics Corporation of India Ltd) द्वारा निर्मित
    • स्वतंत्र — इंटरनेट से नहीं जुड़े; तकनीकी विशेषज्ञ समितियों द्वारा प्रमाणित
    • VVPAT मशीनें 2019 लोकसभा चुनावों से राष्ट्रव्यापी तैनात
  4. NOTA — परिचय और प्रभाव

    • PUCL बनाम भारत संघ (2013) के SC आदेश के बाद प्रारंभ
    • EVM पर मतपत्र के अंतिम विकल्प के रूप में उपलब्ध
    • NOTA मत अलग से गिने और प्रकाशित किए जाते हैं
    • परिणाम प्रभावित नहीं होते — यदि NOTA को सर्वाधिक मत मिलें तो भी पुनर्चुनाव नहीं; अगला सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार विजयी होता है
  5. आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) — प्रकृति एवं दायरा

    • चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद लागू
    • प्रतिबंध: नई योजनाओं की घोषणा, प्रचार के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग, ECI की अनुमति के बिना वरिष्ठ अधिकारियों का स्थानांतरण
    • कोई वैधानिक आधार नहीं — ECI की नैतिक प्रभुत्ता और Article 324 की शक्तियों द्वारा लागू
  6. जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम — अंतर

    • RPA 1950: निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और मतदाता सूची तैयार करना
    • RPA 1951: चुनाव का संचालन, उम्मीदवारों की योग्यता, चुनावी अपराध, भ्रष्ट आचरण, चुनाव विवाद
    • ये दोनों अधिनियम मिलकर प्राथमिक चुनावी विधान बनाते हैं
  7. चुनावी बॉण्ड — योजना और रद्दीकरण

    • चुनावी बॉण्ड योजना (2018): गुमनाम वित्तपोषण — SBI से बॉण्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को दान
    • ADR बनाम भारत संघ (2024): पाँच न्यायाधीशों की SC पीठ ने सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया
    • मतदाताओं के Article 19(1)(a) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन
    • SBI को सभी डेटा ECI को सौंपने का निर्देश; दाता-प्राप्तकर्ता डेटा सार्वजनिक प्रकाशित
  8. मतदाता मतदान प्रवृत्तियाँ

    • 2024 लोकसभा: 65.79% मतदान; ~97 करोड़ पात्र मतदाता; 543 निर्वाचन क्षेत्र; 7 चरण
    • 1952 (45.7%) से मतदान में सामान्यतः वृद्धि हुई
    • 2014 के बाद कुछ चुनावों में महिला मतदान पुरुषों से अधिक
    • राजस्थान 2023 विधानसभा चुनाव: 74.2% मतदान
  9. सत्ता-विरोध — भारतीय प्रतिरूप

    • भारतीय चुनावों में सर्वाधिक प्रभावी शक्तियों में से एक
    • राज्य स्तर पर सत्तारूढ़ दल लगभग 60–70% चुनाव हारते हैं
    • शासन की विफलता, अधूरे वादों और नेतृत्व की थकान की मतदाता द्वारा सज़ा
    • राजस्थान: 1993 से BJP-Congress का एकांतर — सत्ता-विरोध का उत्कृष्ट उदाहरण
  10. चुनाव सुधार समितियाँ

    • विधि आयोग रिपोर्ट 255 (2015): चुनाव में राज्य वित्तपोषण, व्यय सीमा, मत खरीद का अपराधीकरण, विवाद का शीघ्र निपटारा
    • दिनेश गोस्वामी समिति (1990): चुनाव में आंशिक राज्य वित्तपोषण की सिफारिश
    • इंद्रजीत गुप्त समिति (1998): आंशिक राज्य वित्तपोषण की सिफारिश
  11. CEC नियुक्ति अधिनियम 2023 — परिवर्तित प्रक्रिया

    • नियुक्ति अब 3 सदस्यीय चयन समिति द्वारा: PM (अध्यक्ष), एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, विपक्ष के नेता (या LS में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)
    • 5 वरिष्ठ नौकरशाहों की खोज समिति नामों का पैनल तैयार करती है
    • पूर्व प्रक्रिया: राष्ट्रपति द्वारा PM की सलाह पर CEC और EC की नियुक्ति — कोई औपचारिक समिति नहीं
    • Anoop Baranwal बनाम भारत संघ (2023): SC ने CJI सहित स्वतंत्र समिति का निर्देश दिया था; नए कानून ने CJI को बाहर रखा
  12. एक राष्ट्र एक चुनाव — कोविंद समिति (2024)

    • राम नाथ कोविंद समिति (2024) ने LS और सभी राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव की सिफारिश की
    • लाभ: चुनावी खर्च में कमी, निरंतर MCC प्रतिबंधों का अंत, बेहतर शासन निरंतरता
    • चुनौतियाँ: राज्यों की संघीय स्वायत्तता, समय से पूर्व विघटन के परिदृश्य
    • आवश्यक संवैधानिक संशोधन: Articles 83, 85, 172, 174