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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

पहचान-आधारित से मुद्दा-आधारित राजनीति, लैंगिक भागीदारी, AI-सक्षम जन-गोलबंदी

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 27 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

Q1 (5 अंक — 50 शब्द): नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 क्या है? इसके प्रमुख प्रावधान बताइए।

आदर्श उत्तर:

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वाँ संशोधन अधिनियम, 2023) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करता है, जिसमें SC/ST आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं। आरक्षण अगली जनगणना के बाद अगले परिसीमन से लागू होगा। सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेशन द्वारा आवंटित होंगी। आरक्षण प्रारंभ से 15 वर्ष तक रहेगा। दिल्ली विधानसभा भी इसमें शामिल है। OBC उप-कोटा शामिल नहीं है।


Q2 (5 अंक — 50 शब्द): मंडल आयोग क्या था? इसके 1990 में क्रियान्वयन से क्या राजनीतिक परिवर्तन हुए?

आदर्श उत्तर:

मंडल आयोग (B.P. मंडल की अध्यक्षता में, 1979–1980) ने केंद्र सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की, 3,743 पिछड़े समुदायों की पहचान करते हुए। V.P. Singh सरकार ने इसे अगस्त 1990 में लागू किया। राजनीतिक परिणाम: (1) उच्च जाति का मंडल-विरोधी आंदोलन (आत्मदाह); (2) OBC राजनीतिक समेकन — SP, RJD, BSP जनाधार दलों के रूप में उभरे; (3) BJP का एक साथ राम मंदिर अभियान ("मंदिर vs. मंडल"); ने भारत के जाति-आधारित राजनीतिक अंकगणित को मौलिक रूप से बदला।


Q3 (5 अंक — 50 शब्द): भारत में AI-सक्षम राजनीतिक गोलबंदी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

आदर्श उत्तर:

भारत के 2024 चुनावों में AI-सक्षम राजनीतिक गोलबंदी में शामिल थे: सोशल मीडिया पर मतदाता जनसांख्यिकीय डेटा का उपयोग करके सूक्ष्म-लक्षित विज्ञापन; नेताओं का AI-जनित डीपफेक ऑडियो/वीडियो (ECI ने दुरुपयोग के विरुद्ध दिशानिर्देश जारी किए); लाखों व्यक्तिगत मतदाता कॉल करने वाले AI वॉयस बॉट अभियान; रीयल-टाइम जनमत ट्रैकिंग के लिए सोशल मीडिया पर NLP भावना विश्लेषण; और संगठित IT सेलों द्वारा WhatsApp मास फॉरवर्डिंग। चुनौती: ECI के पास AI-विशिष्ट नियमन का अभाव है; DPDP अधिनियम 2023 का राजनीतिक विज्ञापन में क्रियान्वयन अस्पष्ट है; डीपफेक चुनाव अखंडता के लिए खतरा हैं।


Q4 (10 अंक — 150 शब्द): महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के संदर्भ में भारत में पहचान-आधारित से मुद्दा-आधारित राजनीति में बदलाव का विश्लेषण कीजिए।

आदर्श उत्तर:

भारत का राजनीतिक परिदृश्य पहचान-आधारित (जाति/धर्म/लिंग समूह एक गुट के रूप में) से मुद्दा-आधारित राजनीति (विकास, शासन, कल्याण वितरण) की ओर आंशिक रूप से स्थानांतरित हुआ है। "विकास" और भ्रष्टाचार-विरोध पर 2014 का मोदी अभियान, अण्णा हजारे आंदोलन (2011–12), और AAP के शासन मॉडल ने दिखाया कि मुद्दा-आधारित गोलबंदी राजनीतिक बहुमत बना सकती है। फिर भी जाति और धर्म संरचनात्मक रूप से अंतर्निहित हैं — 2024 विपक्ष की जाति जनगणना माँग और PDA गठजोड़ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) दिखाते हैं कि पहचान की राजनीति अनुकूलनशील है, समाप्त नहीं हो रही।

महिलाओं की भागीदारी इस तनाव को दर्शाती है। 73वें संशोधन के 33% पंचायत आरक्षण ने 15 लाख+ महिला निर्वाचित प्रतिनिधि तैयार किए — अनिवार्य राजनीतिक समावेशन का विश्व का सबसे बड़ा अभ्यास। फिर भी लोकसभा में महिला प्रतिनिधित्व मात्र 13.6% (74/543, 2024) है — भारत को वैश्विक स्तर पर 148वें स्थान पर रखते हुए (IPU)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वाँ संशोधन, 2023) LS/राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण का वादा अगले परिसीमन के बाद ही लागू होगा।

"सरपंच पति" समस्या (पुरुष संबंधी महिला प्रॉक्सी के माध्यम से शासन करते हैं) दिखाती है कि एजेंसी के बिना औपचारिक समावेशन अधूरा है। SHG आंदोलन (10 करोड़+ महिलाएँ) और ASHA/आंगनवाड़ी नेटवर्क ने जमीनी राजनीतिक क्षमता बनाई है।


Q5 (10 अंक — 150 शब्द): पहचान-आधारित राजनीति क्या है? भारतीय लोकतंत्र में जाति की भूमिका की विवेचना कीजिए।

आदर्श उत्तर:

पहचान की राजनीति जाति, धर्म, भाषा, लिंग, नृजातीयता जैसी साझा समूह विशेषताओं के आधार पर राजनीतिक गोलबंदी है — आर्थिक वर्ग या विचारधारा के बजाय। भारत में स्वतंत्रता के बाद से जाति राजनीतिक पहचान का प्रमुख आधार रही है।

भारतीय लोकतंत्र में जाति ने कई भूमिकाएँ निभाई हैं:

  1. चुनावी गोलबंदी: जाति मतदान व्यवहार को निर्धारित करती है। मंडल आयोग का 27% OBC आरक्षण (1990 में लागू) स्वतंत्रता के बाद सबसे महत्वपूर्ण जाति-आधारित राजनीतिक पुनर्संरेखण था।

  2. सामाजिक न्याय तंत्र: आरक्षण (SC 15% + ST 7.5% + OBC 27% + EWS 10%) सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में तरजीही पहुँच के माध्यम से ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने का प्रयास करता है।

  3. लोकतांत्रिक गहराई: जाति-आधारित दलों (BSP, SP, RJD, DMK) ने हाशिए के समुदायों को राजनीतिक सत्ता में लाया। मायावती का UP के मुख्यमंत्री के रूप में चार बार और राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू इस समावेशन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  4. लोकतांत्रिक विकृति: जाति निष्ठा जवाबदेही को कम करती है। यह सामाजिक पदानुक्रम को ध्वस्त करने के बजाय मजबूत करती है।

परिवर्तन: भारत शुद्ध जाति राजनीति से "जाति + आकांक्षा" राजनीति की ओर आंशिक बदलाव अनुभव कर रहा है।


Q6 (5 अंक — 50 शब्द): भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की किन्हीं पाँच चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।

आदर्श उत्तर:

पाँच चुनौतियाँ: (1) पार्टी द्वारपालन — 15% से कम LS/विधानसभा टिकट महिलाओं को; (2) वित्तीय बाधाएँ — अभियानों पर करोड़ों रुपए महिलाओं के पास स्वतंत्र रूप से कम; (3) पितृसत्तात्मक सामाजिक मानदंड — रूढ़िवादी क्षेत्रों में परिवार और समुदाय महिलाओं की सार्वजनिक भूमिकाओं का विरोध करते हैं; (4) ऑनलाइन उत्पीड़न — महिला नेता सोशल मीडिया पर लक्षित दुर्व्यवहार का सामना करती हैं जो उम्मीदवारी को हतोत्साहित करता है; (5) "सरपंच पति" प्रॉक्सी शासन — आरक्षित पंचायत सीटें भी पुरुष संबंधियों द्वारा प्रभावी रूप से नियंत्रित होती हैं।