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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

परिचय एवं संदर्भ

पहचान-आधारित से मुद्दा-आधारित राजनीति, लैंगिक भागीदारी, AI-सक्षम जन-गोलबंदी

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 2 / 11 0 PYQ 27 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

परिचय एवं संदर्भ

भारतीय राजनीति में मूल तनाव

भारत का राजनीतिक इतिहास पहचान और हित के बीच — अर्थात तुम कौन हो (जाति, धर्म, लिंग, जनजाति) और तुम क्या चाहते हो (विकास, रोजगार, सुरक्षा, न्याय) — के बीच निरंतर वार्ता का प्रतिनिधित्व करता है। ये दोनों राजनीतिक आयाम द्विआधारी विपरीत नहीं हैं; वे एक-दूसरे से ओवरलैप करते हैं, परस्पर क्रिया करते हैं और एक-दूसरे को रूपांतरित करते हैं।

सात दशकों का विकास

सात दशकों में प्रक्षेपवक्र इस प्रकार रहा है:

  • 1952–1967: कांग्रेस का समेकनात्मक पहचान प्रबंधन — एकदलीय वर्चस्व
  • 1990 का दशक: मंडल के बाद जाति-आधारित निम्न-वर्ग का दावा
  • 2000 का दशक: खंडित पहचान गठजोड़
  • 2014 के बाद: आर्थिक गतिशीलता और शासन गुणवत्ता पर केंद्रित "आकांक्षात्मक राजनीति" की ओर आंशिक बदलाव

यह एक सरल रेखीय प्रगति नहीं है — जाति और धर्म शक्तिशाली चुनावी चर बने हुए हैं, भले ही मध्यवर्गीय "विकास" विमर्श बढ़ रहा हो।

AI का आयाम

2018 से AI-सक्षम गोलबंदी का उदय एक नया आयाम जोड़ता है। तकनीक अब पहचान-आधारित अपीलों (जनसांख्यिकीय डेटा के आधार पर सूक्ष्म-लक्षीकरण के माध्यम से) और मुद्दा-आधारित संदेशों (सटीक रूप से लक्षित शासन परिणाम संचार के माध्यम से) दोनों को प्रवर्धित करती है। यह चुनावी लोकतंत्र के लिए नई चुनौतियाँ पैदा करता है।