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राजनीति में लैंगिक भागीदारी
4.1 महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: वर्तमान स्थिति
भारत में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में स्पष्ट लैंगिक अंतराल है:
| स्तर | महिलाओं का प्रतिनिधित्व (2024) | % |
|---|---|---|
| लोकसभा | 543 में से 74 | 13.6% |
| राज्यसभा | 245 में से 29 | 11.8% |
| राज्य विधानसभाएँ | ~9% औसत | ~9% |
| पंचायती राज | ~46% (आरक्षण के कारण) | ~46% |
| केंद्रीय मंत्रिमंडल | 72 में से 7 | ~10% |
वैश्विक तुलना
संसदों में महिलाओं का विश्व औसत = 26.9% (IPU 2024)। रवांडा 61.3% के साथ शीर्ष पर है। भारत वैश्विक स्तर पर 148वें स्थान पर है। बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान सभी महिलाओं के संसदीय प्रतिनिधित्व में भारत से ऊपर हैं।
4.2 महिला आरक्षण विधेयक / नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023)
संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहते हैं — सितंबर 2023 में संसद के एक विशेष सत्र में पारित हुआ। यह Articles 330A, 332A में संशोधन करता है और नया Article 330A जोड़ता है।
प्रमुख प्रावधान:
- लोकसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33%) आरक्षित
- प्रत्येक राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई सीटें आरक्षित
- दिल्ली विधानसभा पर भी लागू (Article 332A)
- महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को रोटेशन द्वारा आवंटित होंगी
- आरक्षण अगली जनगणना के बाद पहले परिसीमन से लागू होगा (वर्तमान में 2026 जनगणना, 2028 तक परिसीमन अपेक्षित)
- आरक्षण इसके प्रारंभ से 15 वर्ष तक रहेगा
OBC उप-कोटा बहस
विधेयक में 33% के भीतर OBC समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षण शामिल नहीं है। विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण के भीतर SC/ST/OBC उप-कोटा की माँग की, यह तर्क देते हुए कि इनके बिना केवल उच्च-जाति की महिलाएँ लाभान्वित होंगी।
4.3 पंचायती राज और महिलाओं की जमीनी भागीदारी
73वें संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य किया। कई राज्य आगे बढ़े:
| राज्य | महिला पंचायत आरक्षण |
|---|---|
| राजस्थान | 2015 से 50% |
| बिहार | 50% |
| ओडिशा | 50% |
| छत्तीसगढ़ | 50% |
| केरल | 50% |
प्रभाव: लाखों महिलाएँ सरपंच (ग्राम प्रधान), वार्ड सदस्य और पंचायत समिति सदस्य बनी हैं। इससे राजनीतिक अनुभव प्राप्त महिलाओं की एक पाइपलाइन तैयार हुई है।
"सरपंच पति" घटना
पुरुष संबंधी (पति, ससुर) निर्वाचित महिला सरपंचों के स्थान पर प्रभावी रूप से शासन करते हैं — प्रतिनिधित्व का एक छद्म स्वरूप। सर्वोच्च न्यायालय और राज्य सरकारों ने इसे संबोधित करने के लिए कदम उठाए हैं। ग्राम सभा बैठकों में निर्वाचित महिलाओं की अनिवार्य उपस्थिति, प्रशिक्षण कार्यक्रम और SHG-संबद्ध क्षमता निर्माण ने प्रॉक्सी शासन को कम (यद्यपि समाप्त नहीं) किया है।
