सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
AI-सक्षम राजनीतिक गोलबंदी
5.1 आधुनिक भारतीय चुनावों में उपयोग की गई तकनीकें
भारत के 2024 लोकसभा चुनाव विश्व के सबसे तकनीकी रूप से परिष्कृत चुनावी अभ्यासों में से एक थे। प्रमुख AI/तकनीकी प्रयोगों का विवरण नीचे दिया गया है।
सूक्ष्म-लक्षित विज्ञापन
राजनीतिक दलों ने मतदाता खंड बनाने के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल के साथ मतदाता डेटा (जन धन खाते, MGNREGS रिकॉर्ड, सर्वेक्षणों से जाति डेटा) का उपयोग किया। Facebook/Meta और Google विज्ञापन प्लेटफॉर्म आयु, स्थान, रुचियों और अनुमानित राजनीतिक झुकाव के आधार पर सूक्ष्म-लक्षीकरण को सक्षम करते हैं। BJP के IT सेल और कांग्रेस की डिजिटल टीम ने एक साथ हजारों लक्षित विज्ञापन अभियान चलाए।
AI-जनित वॉयस कॉल
2024 UP और राजस्थान चुनावों में, लोकप्रिय नेताओं की AI-क्लोन आवाजों का उपयोग स्वचालित मतदाता संपर्क कॉल के लिए किया गया। AI कॉल सेंटरों ने मानव ऑपरेटरों की तुलना में बहुत कम लागत पर लाखों व्यक्तिगत कॉल किए। ECI ने 2024 में डीपफेक ऑडियो के दुरुपयोग को नोटिस किया और दिशानिर्देश जारी किए।
राजनीतिक दुष्प्रचार के लिए डीपफेक
- AI-जनित वीडियो और ऑडियो नेताओं को ऐसी बातें कहते दिखाते थे जो उन्होंने कभी नहीं कहीं
- फरवरी 2024 में, राजस्थान के एक BJP नेता की नकली ऑडियो चुनावों से कुछ दिन पहले प्रसारित हुई
- Meta और Google ने भारतीय चुनावों के लिए डीपफेक सामग्री नीतियाँ घोषित कीं
- ECI का IT सेल डीपफेक राजनीतिक सामग्री को पहचानने और हटाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था
WhatsApp राजनीतिक सूक्ष्म-लक्षीकरण
भारत के 500+ करोड़ WhatsApp उपयोगकर्ता पार्टी IT सेलों द्वारा प्रबंधित WhatsApp फॉरवर्ड और WhatsApp समूहों के माध्यम से राजनीतिक सामग्री प्राप्त करते हैं। सामग्री अक्सर भाषाई, दृश्य (मीम्स, चित्र) होती है और साझा करने के लिए डिज़ाइन की गई है — जन मीडिया को दरकिनार करते हुए। बंद समूहों में गलत सूचना और सांप्रदायिक सामग्री तेजी से फैलती है।
भावना विश्लेषण और मतदान
राजनीतिक दल निर्वाचन क्षेत्र, जाति समूह और मुद्दे के अनुसार सोशल मीडिया भावना का विश्लेषण करने के लिए NLP (प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण) उपकरणों का उपयोग करते हैं। रीयल-टाइम डेटा फीड वाले "वॉर रूम" पार्टियों को उभरती कथाओं पर जल्दी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाते हैं। कुछ अभियान परामर्शदाताओं द्वारा भविष्य कहनेवाले मतदाता मॉडलिंग के लिए PRISM जैसी प्रणालियाँ उपयोग की जाती हैं।
5.2 चुनावों में AI के प्रति नियामक प्रतिक्रिया
5.3 सोशल मीडिया और राजनीतिक ध्रुवीकरण
भारत के सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र ने तीन मुख्य तंत्रों के माध्यम से राजनीतिक ध्रुवीकरण को त्वरित किया है।
एल्गोरिदम-आधारित ध्रुवीकरण: सोशल मीडिया एल्गोरिदम जुड़ाव के लिए अनुकूलित होते हैं — जो भावनात्मक रूप से आवेशित सामग्री द्वारा संचालित होता है। राजनीतिक आक्रोश, सांप्रदायिक सामग्री और विरोधी-विपक्षी संदेश अत्यंत आकर्षक होते हैं, जिससे "इको चेंबर" बनते हैं जहाँ उपयोगकर्ता केवल अपने विचारों को मजबूत करने वाले दृष्टिकोण देखते हैं।
IT सेल और "ट्रोल सेनाएँ": BJP और कांग्रेस (और अन्य दल) दोनों संगठित सोशल मीडिया टीम बनाए रखते हैं। शैक्षणिक शोध ने समन्वित अप्रामाणिक व्यवहार — नकली खाते, बॉट नेटवर्क, और पार्टी संदेशों को प्रवर्धित करने और आलोचकों को परेशान करने के लिए भुगतान किए गए वास्तविक लोगों — का दस्तावेजीकरण किया है।
WhatsApp गलत सूचना: TRAI सलाहकार समिति और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के अध्ययन दस्तावेज करते हैं कि WhatsApp गलत सूचना ने भीड़ हिंसा (पालघर) में योगदान दिया है।
