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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

मुख्य बिंदु

दलीय व्यवस्था, क्षेत्रवाद, गठबंधन राजनीति

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 1 / 10 0 PYQ 23 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

मुख्य बिंदु

  1. बहुदलीय व्यवस्था — भारत की संरचना

    • 1989 के बाद अधिकतर चुनावों में कोई एक दल संसदीय बहुमत नहीं पा सका
    • ECI (2025) 6 राष्ट्रीय दल, 57 राज्यीय दल और 2,000+ पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को मान्यता देता है
    • कुल पंजीकृत दल: ~2,800+
  2. दलीय व्यवस्था का विकास — चार चरण

    • एकदल-प्रभुत्व (1952–1967): कांग्रेस युग — "कांग्रेस प्रणाली" (राजनी कोठारी)
    • कांग्रेस का पतन (1967–1989): राज्य स्तर पर गठबंधन; आपातकाल; जनता प्रयोग
    • गठबंधन युग (1989–2014): National Front, UF, NDA-I, UPA-I & II — 25 वर्ष तक कोई एकल दल LS बहुमत नहीं
    • प्रभुत्व की वापसी (2014–वर्तमान): BJP-नेतृत्व NDA को बड़े जनादेश; 2024 में आंशिक गठबंधन वापसी
  3. क्षेत्रवाद — परिभाषा और प्रकार

    • किसी विशेष क्षेत्र के हितों, पहचान और स्वायत्तता का केंद्रीय सत्ता के विरुद्ध प्रकटीकरण
    • सकारात्मक क्षेत्रवाद: क्षेत्रीय विकास की माँगें, सांस्कृतिक गौरव
    • नकारात्मक क्षेत्रवाद: अलगाववाद, प्रवासी-विरोधी आंदोलन
    • भारत इसे संघवाद, Article 3 (नए राज्य) और अनुसूचित क्षेत्र प्रावधानों से प्रबंधित करता है
  4. क्षेत्रीय दल — भारतीय राजनीति को नया रूप देते हुए

    • प्रमुख दल: DMK (1949), TDP (1982), TMC (1998), AAP (2012), BRSP
    • ये उप-राष्ट्रीय राजनीतिक पहचानों के उभार को दर्शाते हैं
    • क्षेत्रीय दलों ने 1989–2014 के गठबंधन सरकारों में सत्ता-संतुलन बनाए रखा
  5. गठबंधन राजनीति — दो मुख्य प्रकार

    • पूर्व-चुनाव गठबंधन: चुनाव से पहले दल घोषणा करते हैं — जैसे BJP-नेतृत्व NDA, Congress-नेतृत्व INDIA Alliance 2024
    • चुनाव-पश्चात् गठबंधन: परिणाम के बाद दल शामिल होते हैं — जैसे 1996–2004 UF सरकारें
    • गठबंधन धर्म में आवश्यक है: नीतिगत समझौता, सत्ता-साझेदारी और समन्वय समिति
  6. राष्ट्रीय दल मान्यता मापदंड (ECI)

    • कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से कुल Lok Sabha सीटों का 2% जीतना, अथवा
    • 4+ राज्यों में LS चुनावों में कम से कम 6% वोट शेयर AND 4 सीटें जीतना, अथवा
    • 4+ राज्यों में राज्य दल के रूप में मान्यता प्राप्त होना
    • राष्ट्रीय दल का चिह्न देशभर में उस दल के लिए सुरक्षित रहता है
  7. भारत में क्षेत्रवाद के कारण

    • भाषाई माँगें: आंध्र प्रदेश 1953, तेलंगाना 2014
    • आर्थिक असमानताएँ: पिछड़े क्षेत्र अलग राज्यत्व की माँग — Bodoland, Vidarbha, Purvanchal
    • सांस्कृतिक पहचान का दावा: तमिलनाडु का द्रविड़ गौरव, पूर्वोत्तर की जनजातीय पहचान
    • केंद्र-राज्य नीतिगत शिकायतें: संसाधन-साझेदारी, विशेष श्रेणी का दर्जा, वित्तीय विकेंद्रीकरण
  8. प्रमुख गठबंधन सरकारें और उनकी उपलब्धियाँ

    • NDA-I (1999–2004): Vajpayee; 24 गठबंधन साझेदार — भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा गठबंधन
    • UPA-I (2004–2009): Congress-नेतृत्व; 10+ साझेदार DMK, NCP, TMC सहित; वामदलों का बाहरी समर्थन 2004–08
    • UPA-II (2009–2014): Congress अकेले 206 सीटें; TMC 2012 में अलग हुई
    • गठबंधन युग की उपज: RTI (2005), NREGS (2005), RTE (2009)
  9. दल-बदल विरोधी कानून — दसवीं अनुसूची (1985)

    • 52वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ी गई; दल-बदल की अस्थिरता रोकने हेतु
    • उस विधायक को अयोग्य ठहराता है जो स्वेच्छा से दल-सदस्यता छोड़े या पूर्व अनुमति के बिना पार्टी निर्देश के विरुद्ध मत दे
    • विलय छूट: यदि दल के 2/3 विधायक विलय का समर्थन करें
    • निर्णयकर्ता: स्पीकर/सभापति (आलोचना: पक्षपातपूर्ण)
  10. राजस्थान में द्विदलीय प्रवृत्ति

    • 1993 से BJP और Congress बारी-बारी सत्ता में आते रहे हैं
    • पैटर्न: Congress 1998–2003 → BJP 2003–08 → Congress 2008–13 → BJP 2013–18 → Congress 2018–23 → BJP 2023–वर्तमान
    • 2023 चुनाव में Bharat Adivasi Party (BAP) तीसरी शक्ति बनकर उभरी
  11. INDIA Alliance (2024)

    • Indian National Developmental Inclusive Alliance — BJP-NDA के विरुद्ध जून 2023 में गठित 26-दलीय विपक्षी गठबंधन
    • 2024 LS चुनावों में 234 सीटें जीती (NDA: 293, अन्य: 16)
    • गठबंधन राजनीति भारत के संघीय लोकतंत्र का केंद्रीय तत्त्व बनी हुई है
  12. दलीय व्यवस्था का वर्गीकरण — Sartori का Typology

    • 1952–1967: प्रभुत्वशाली दल व्यवस्था (Sartori का कांग्रेस-प्रभुत्व के लिए पद)
    • 1967 के बाद: मजबूत वैचारिक ध्रुवों और खंडित केंद्र के साथ ध्रुवीकृत बहुलवाद की ओर बदलाव
    • समकालीन भारत: मध्यम बहुलवाद के करीब — राष्ट्रीय स्तर पर BJP का प्रभुत्व और मजबूत क्षेत्रीय दलों की उपस्थिति