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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

परिचय एवं संदर्भ

दलीय व्यवस्था, क्षेत्रवाद, गठबंधन राजनीति

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 2 / 10 0 PYQ 23 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

परिचय एवं संदर्भ

भारत की दलीय व्यवस्था विश्व की सबसे जटिल व्यवस्थाओं में से एक है — 1.4 अरब जनसंख्या वाला बहुदलीय लोकतंत्र, जो 28 राज्यों, 8 केंद्रशासित प्रदेशों, 22 अनुसूचित भाषाओं और सैकड़ों विशिष्ट सांस्कृतिक पहचानों में फैला है। किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन के लिए इन विविध हितों को एक शासकीय बहुमत में समेटना चुनौतीपूर्ण है।

तीन परस्पर जुड़ी गतिकी

दलीय व्यवस्था का विकास

  • कांग्रेस के निकट-एकाधिकार (1952–1967) से विखंडन और गठबंधन सरकारों (1989–2014) तक
  • BJP का एक प्रभावी शक्ति के रूप में पुनः उभरना (2014–वर्तमान)
  • राज्य स्तर और गठबंधन अंकगणित में क्षेत्रीय दल अभी भी महत्त्वपूर्ण बने हुए हैं

क्षेत्रवाद

  • क्षेत्रीय पहचान और हितों का सतत दावा
  • क्षेत्रीय दल, नए राज्यों की माँग और सहकारी संघवाद पर दबाव उत्पन्न करता है
  • केवल अपकेंद्री शक्ति नहीं — स्थानीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक राजनीति में स्थान दिलाता है

गठबंधन राजनीति

  • गठबंधनों के माध्यम से शासन करने की कला
  • वैचारिक रूप से विविध साझेदारों का प्रबंधन, मंत्रालयों का बँटवारा, नीतिगत मतभेदों को सुलझाना
  • साझा सत्ता के अनुशासन और समन्वय तंत्रों के माध्यम से गठबंधन की स्थिरता बनाए रखना