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दलीय व्यवस्था का विकास
2.1 चरण I: एकदल-प्रभुत्व (1952–1967)
राजनी कोठारी की "कांग्रेस प्रणाली"
राजनीतिक वैज्ञानिक राजनी कोठारी ने भारत के पहले दो दशकों को "कांग्रेस प्रणाली" कहा। कांग्रेस चुनावी रूप से हावी थी किंतु आंतरिक रूप से विविध हितों को समायोजित करती थी। उन्होंने कांग्रेस को "सहमति की पार्टी" और अन्य दलों (समाजवादी, साम्यवादी, स्वतंत्र, जनसंघ) को "दबाव की पार्टियाँ" कहा जो कांग्रेस-प्रभुत्व वाले ढाँचे में प्रतिस्पर्धा करती थीं।
चुनाव परिणाम — कांग्रेस का प्रभुत्व
- 1952 (1वीं आम चुनाव): कांग्रेस ने 489 में से 364 LS सीटें जीतीं (74.4%); किसी अन्य दल ने 19 से अधिक सीटें नहीं जीती
- 1957 (2वीं आम चुनाव): कांग्रेस ने 494 में से 371 LS सीटें जीतीं (75.1%); CPI मुख्य विपक्ष 27 सीटों के साथ
- 1962 (3री आम चुनाव): कांग्रेस ने 494 में से 361 सीटें जीतीं
दरारें उभरना: 1967 चौथी आम चुनाव
- कांग्रेस ने केवल 520 में से 283 सीटें जीतीं (साधारण बहुमत: 261) — पहली बार न्यून बहुमत
- कांग्रेस ने UP, Bihar, Rajasthan, MP और Tamil Nadu सहित 8 राज्यों में सत्ता खोई
- राज्यों में गैर-कांग्रेस गठबंधन सरकारें (संयुक्त विधायक दल / SVD) बनीं
- यह चुनाव कांग्रेस के प्रभुत्व के अंत की शुरुआत है
2.2 चरण II: कांग्रेस का पतन और विखंडन (1967–1989)
मुख्य घटनाक्रम
1971 "गरीबी हटाओ" चुनाव: Indira Gandhi ने Congress (O) से अलग होकर Congress (I) बनाई और लोकलुभावन मंच पर 518 में से 352 सीटें जीतीं।
1975–1977 आपातकाल: Indira Gandhi के तहत आपातकाल (जून 1975–मार्च 1977) ने लाखों लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक किया। जनता पार्टी — जनसंघ, BLD, Congress-O, CFD और समाजवादियों से बनी — ने 1977 में 295 सीटें जीतकर पहली गैर-कांग्रेस केंद्र सरकार बनाई। जनता 1979 में विघटित हो गई, "गठबंधन अस्थिरता" को एक पुनरावर्ती पैटर्न स्थापित करते हुए।
1980–1984: कांग्रेस Indira Gandhi के नेतृत्व में वापस आई; Rajiv Gandhi ने 1984 में 514 में से 415 सीटें जीतीं (Indira की हत्या के बाद सहानुभूति लहर से कांग्रेस का अब तक का सर्वाधिक मत)। यह वर्चस्व अल्पकालिक था।
राज्य-स्तरीय विखंडन (1980s)
- Telugu Desam Party (TDP) ने 1983 में आंध्र प्रदेश जीता (N.T. Rama Rao)
- पंजाब में Akali Dal; असम में AGP; तमिलनाडु में AIADMK/DMK बारी-बारी
- 1989 से पहले ही राज्य स्तर पर बहुदलीय संघवाद स्थापित हो चुका था
2.3 चरण III: गठबंधन युग (1989–2014)
1989 से 2014 तक — पच्चीस वर्षों तक — कोई एकल दल LS में बहुमत नहीं जीत सका।
| वर्ष | सरकार | नेता | सीटें | प्रकृति |
|---|---|---|---|---|
| 1989 | National Front (NF) | V.P. Singh | 143 (NF) | अल्पमत (BJP + वाम का बाहरी समर्थन) |
| 1991 | Congress (I) | P.V. Narasimha Rao | 244 | अल्पमत, छोटे दलों से प्रबंधित |
| 1996 | United Front (UF) | H.D. Deve Gowda / I.K. Gujral | 13 दल | Congress के बाहरी समर्थन से |
| 1998 | BJP-नेतृत्व NDA | Atal Bihari Vajpayee | 252+सहयोगी | गठबंधन, 1999 में गिरी (1 मत से पराजय) |
| 1999 | BJP-नेतृत्व NDA | Atal Bihari Vajpayee | 303 (NDA) | 24-दलीय गठबंधन; पूरे 5 वर्ष चला |
| 2004 | Congress-नेतृत्व UPA-I | Manmohan Singh | 335 (UPA) | 10+ साझेदार; 2004–08 वाम बाहरी समर्थन |
| 2009 | Congress-नेतृत्व UPA-II | Manmohan Singh | 322 (UPA) | Congress अकेले 206; TMC 2012 में अलग |
गठबंधन युग की विशेषताएँ
- क्षेत्रीय दलों का सत्ता-दलाल के रूप में उदय
- "पोर्टफोलियो राजनीति" (horse-trading) द्वारा मंत्रालय आवंटन
- शासन के ढाँचे के रूप में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (CMP)
- अस्थिरता: V.P. Singh सरकार 11 माह; Gowda 10 माह; Gujral 11 माह
2.4 चरण IV: प्रभुत्व की वापसी (2014–वर्तमान)
2014 आम चुनाव: BJP ने अकेले 282 सीटें जीतीं — 1984 के बाद पहला एकल दल बहुमत। BJP-नेतृत्व NDA ने कुल 336 सीटें जीतीं। PM Narendra Modi के चुनाव ने राजनीति के राष्ट्रपतिकरण को चिह्नित किया, जिसमें व्यक्तित्व-केंद्रित अभियानों ने जाति-गणित को पीछे छोड़ा।
2019 आम चुनाव: BJP ने अकेले 303 सीटें जीतीं; NDA कुल 353। 1984 के बाद से सबसे बड़ा LS जनादेश।
2024 आम चुनाव: BJP ने 240 सीटें जीतीं (272 के बहुमत से कम); NDA कुल 293। विपक्षी INDIA Alliance ने 234 सीटें जीतीं। BJP के NDA साझेदार TDP और JDU निर्णायक बने — गठबंधन की गतिकी की आंशिक वापसी का संकेत।
