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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

संभावित प्रश्न एवं उत्तर

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, संसद

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 30 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं उत्तर

Q1 (5 अंक — 50 शब्द): भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन कैसे होता है? निर्वाचक मंडल क्या है?

आदर्श उत्तर:
राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल (अनुच्छेद 54) द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य (दिल्ली व पुडुचेरी सहित) होते हैं। संसद और राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य शामिल नहीं होते। एकल संक्रमणीय मत (STV) पद्धति समानता सूत्र द्वारा संसदीय और राज्य विधायी मतों को बराबर भार देकर आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है।

(54 शब्द)


Q2 (5 अंक — 50 शब्द): धन विधेयक क्या है? यह साधारण विधेयक से कैसे भिन्न है?

आदर्श उत्तर:
धन विधेयक (अनुच्छेद 110) विशेष रूप से कराधान, सरकारी व्यय, या सार्वजनिक ऋण से संबंधित होता है। इसे केवल लोक सभा में पुरःस्थापित किया जा सकता है, राष्ट्रपति की अनुशंसा आवश्यक है, और राज्य सभा 14 दिनों के भीतर केवल सिफारिश कर सकती है (संशोधन या अस्वीकृति नहीं) — इसके बाद यह पारित माना जाता है। साधारण विधेयक किसी भी सदन में पुरःस्थापित किया जा सकता है, राज्य सभा की सहमति चाहिए, और गतिरोध अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठक से हल होता है।

(58 शब्द)


Q3 (5 अंक — 50 शब्द): अनुच्छेद 352, 356, और 360 के अंतर्गत आपातकालीन प्रावधान क्या हैं?

आदर्श उत्तर:
अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल) — जब भारत की सुरक्षा युद्ध, बाह्य आक्रमण, या सशस्त्र विद्रोह से खतरे में हो; संघीय ढाँचा निलंबित; अनुच्छेद 19 के मूल अधिकार स्वतः निलंबित। अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) — जब किसी राज्य में संवैधानिक सरकार विफल हो। अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल) — जब भारत की वित्तीय स्थिरता खतरे में हो; कभी लागू नहीं किया गया। सभी को निरंतरता के लिए संसदीय अनुमोदन आवश्यक।

(52 शब्द)


Q4 (10 अंक — 150 शब्द): लोक सभा के प्रति मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व की जाँच करो। संसदीय लोकतंत्र में इसका क्या महत्त्व है?

आदर्श उत्तर:
सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)) संसदीय कार्यपालिका का निर्धारक सिद्धांत है: पूरी मंत्रिपरिषद लोक सभा के विश्वास के आधार पर एक साथ खड़ी और गिरती है। यदि लोक सभा अविश्वास प्रस्ताव पारित करे तो हर मंत्री — यहाँ तक कि जिसने व्यक्तिगत रूप से सरकार के पक्ष में मतदान किया — को इस्तीफा देना होगा।

इसके व्यावहारिक निहितार्थ महत्त्वपूर्ण हैं। पहला, यह मंत्रिमंडल एकजुटता सुनिश्चित करता है: मंत्रियों को निजी असहमति के बावजूद मंत्रिमंडल के निर्णयों का सार्वजनिक बचाव करना होता है; असहमति का अंत त्यागपत्र में होना चाहिए। दूसरा, यह कार्यपालिका को निरंतर विधायी जवाबदेही बनाए रखने के लिए बाध्य करता है। तीसरा, यह नीतिगत विसंगति रोकता है: एक मत से बोलने में असमर्थ मंत्रिमंडल अपनी शासन वैधता खो देता है।

यह सिद्धांत 1999 में सबसे नाटकीय रूप से परखा गया जब वाजपेयी सरकार एक मत के अविश्वास प्रस्ताव से गिरी। 91वें संशोधन 2003 ने मंत्रिमंडल को लोक सभा की शक्ति के 15% तक सीमित कर सामूहिक शासन की प्रभावशीलता को और सुदृढ़ किया। गठबंधन राजनीति (1989 के बाद के भारत) के संदर्भ में सामूहिक उत्तरदायित्व को गठबंधन समझौतों और समन्वय समितियों को समायोजित करना पड़ा — परंतु संवैधानिक ढाँचे को बनाए रखा।

(168 शब्द)


Q5 (5 अंक — 50 शब्द): राज्य सभा के पास कौन-सी विशेष शक्तियाँ हैं जो लोक सभा के पास नहीं?

आदर्श उत्तर:
राज्य सभा के पास दो अद्वितीय शक्तियाँ हैं: (i) अनुच्छेद 249 के अंतर्गत वह दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर संसद को राज्य सूची विषय पर कानून बनाने में सक्षम कर सकती है — एक वर्ष तक वैध; (ii) अनुच्छेद 312 के अंतर्गत वह दो-तिहाई प्रस्ताव से नई अखिल भारतीय सेवाएँ बना सकती है। स्थायी सदन होने के कारण यह लोक सभा भंग होने पर भी संसद की निरंतरता सुनिश्चित करती है।

(56 शब्द)


Q6 (5 अंक — 50 शब्द): 106वें संवैधानिक संशोधन (महिला आरक्षण) का क्या महत्त्व है?

आदर्श उत्तर:
106वाँ संवैधानिक संशोधन 2023 नए अनुच्छेद 330A और 332A के माध्यम से लोक सभा, राज्य विधान सभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। आरक्षण चक्रीय परिसीमन द्वारा लागू होगा। प्रारंभ अधिनियम के लागू होने के बाद प्रथम जनगणना से जुड़ा है — 2021 की जनगणना अभी तक नहीं हुई। यह 61वें संशोधन (1989) के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण चुनावी सुधार है।

(58 शब्द)