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गोपनीयता का अधिकार
2.1 K.S. Puttaswamy बनाम Union of India (2017)
Puttaswamy निर्णय को भारत में 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला माना जाता है। 9-न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने पहली बार सर्वसम्मति से Articles 14, 19 और 21 के तहत निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया। यह मामला Aadhaar योजना को चुनौती से उत्पन्न हुआ, किंतु न्यायालय ने पहले यह प्रारंभिक प्रश्न हल किया कि क्या निजता मौलिक अधिकार है।
पहले के विरोधाभासी पूर्ववर्तियों को रद्द किया
- M.P. Sharma बनाम Satish Chandra (1954) — 8-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि तलाशी और जब्ती निजता का उल्लंघन नहीं; अब रद्द
- Kharak Singh बनाम State of UP (1963) — 6-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि निजता का अधिकार गारंटीकृत मौलिक अधिकार नहीं; अब रद्द
निजता के अधिकार का दायरा (Puttaswamy से)
- अकेला छोड़े जाने का अधिकार (सूचनात्मक निजता)
- व्यक्तिगत विकल्पों में निर्णयात्मक स्वायत्तता (यौन रुझान, प्रजनन विकल्प, आहार विकल्प)
- व्यक्तिगत सूचना पर नियंत्रण का अधिकार
- शरीर और व्यक्तिगत स्थान की निजता
बाद के अनुप्रयोग
- Navtej Singh Johar (2018) — निजता के एक पहलू के रूप में यौन रुझान
- Joseph Shine (2018) — विवाह के भीतर अंतरंग विकल्प
- Digital Personal Data Protection Act 2023 — विधायी प्रतिक्रिया; Data Protection Board का गठन
2.2 Aadhaar निर्णय — Justice K.S. Puttaswamy (Retd.) बनाम Union of India (2019)
9-न्यायाधीशों की निजता संबंधी पीठ के बाद, एक अलग 5-न्यायाधीशों की पीठ ने विशेष रूप से Aadhaar Act 2016 की जांच की। बहुमत (4:1) ने Aadhaar को कल्याणकारी लाभ वितरण के लिए संवैधानिक रूप से वैध माना।
रद्द किए गए प्रावधान
- बैंक खातों और मोबाइल फोन के लिए अनिवार्य Aadhaar (निजी कंपनियां Aadhaar अनिवार्य नहीं कर सकतीं)
- धारा 33(2) — न्यायिक निरीक्षण के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा जांच में Aadhaar डेटा का उपयोग
- धारा 47 — केवल UIDAI शिकायत दर्ज कर सकती थी, व्यक्ति नहीं
