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हालिया विधायी विकास
6.1 नए आपराधिक कानून संहिताएं (2023)
2023 में तीन प्रमुख औपनिवेशिक युग के आपराधिक कानूनों को बदला गया:
| पुराना कानून | नया कानून | मुख्य परिवर्तन |
|---|---|---|
| Indian Penal Code 1860 | Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 | आतंकवाद, संगठित अपराध परिभाषित; राजद्रोह (धारा 124A) को धारा 152 (संप्रभुता के विरुद्ध कृत्य) से बदला; हत्या अब भी धारा 103; महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराध सुदृढ़ |
| Code of Criminal Procedure 1973 | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) 2023 | Zero FIR, गिरफ्तारी की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, कुछ अपराधों में 90 दिन की अधिकतम सुनवाई; इलेक्ट्रॉनिक समन |
| Indian Evidence Act 1872 | Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA) 2023 | इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य स्वीकार्यता बढ़ाई; संयुक्त मुकदमे के प्रावधान |
तीनों 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए। BNS ने "राजद्रोह" (धारा 124A IPC) का विशेष अपराध हटाया, लेकिन "संप्रभुता, एकता और अखंडता" के विरुद्ध व्यापक अपराध शामिल किए। आलोचकों का कहना है कि इससे लेबल हटाते हुए राजद्रोह की अवधारणा का विस्तार हुआ है।
6.2 Digital Personal Data Protection Act 2023
Puttaswamy के निजता के अधिकार निर्णय पर संसद की प्रतिक्रिया के रूप में, DPDP Act 2023 चार मुख्य तत्वों के साथ एक व्यापक ढांचा बनाता है:
- Data Principal (डेटा प्रमुख) — वह व्यक्ति जिसका डेटा संसाधित किया जाता है (अधिकार: पहुंच, सुधार, मिटाना, शिकायत)
- Data Fiduciary (डेटा न्यासी) — वह संस्था जो डेटा प्रसंस्करण का उद्देश्य और साधन तय करती है (कर्तव्य: सहमति, उद्देश्य सीमा, डेटा न्यूनीकरण)
- Data Protection Board of India (DPBI) — न्यायनिर्णयन प्राधिकरण; ₹250 करोड़ तक नागरिक दंड
- Significant Data Fiduciaries — अतिरिक्त दायित्वों वाली नामित संस्थाएं (डेटा स्थानीयकरण, ऑडिट, DPO नियुक्ति)
18 वर्ष से कम बच्चों के डेटा प्रसंस्करण के लिए स्पष्ट माता-पिता की सहमति आवश्यक है।
