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| विषय | विवरण |
|---|---|
| मूल ढांचा सिद्धांत स्थापित | Kesavananda Bharati (1973) — 13 न्यायाधीशों की पीठ, 7:6 बहुमत |
| अनुच्छेद 368 | संशोधन प्रक्रिया — विशेष बहुमत आवश्यक |
| विशेष बहुमत का अर्थ | कुल सदस्यता का पूर्ण बहुमत + उपस्थित-और-मतदान करने वाले का 2/3 |
| राज्य अनुसमर्थन आवश्यक | संघीय प्रावधानों के लिए (राष्ट्रपति का निर्वाचन, न्यायपालिका, 7वीं अनुसूची की सूचियां) |
| संयुक्त बैठक नहीं | संवैधानिक संशोधन विधेयक के लिए |
| अनुच्छेद 368 में राष्ट्रपति सहमति रोक सकते हैं? | नहीं — देनी होगी |
| मूल ढांचे के तत्व | न्यायिक समीक्षा, धर्मनिरपेक्ष चरित्र, संघवाद, लोकतंत्र, न्यायपालिका की स्वतंत्रता |
| 1st संशोधन (1951) | भूमि सुधार कानूनों के लिए 9वीं अनुसूची बनाई |
| 42nd संशोधन (1976) | लघु-संविधान — प्रस्तावना में समाजवादी/धर्मनिरपेक्ष; मौलिक कर्तव्य |
| 44th संशोधन (1978) | संपत्ति का अधिकार FR से हटाया; आपातकाल के सुरक्षा उपाय |
| 52nd संशोधन (1985) | दल-बदल विरोधी (10वीं अनुसूची) |
| 61st संशोधन (1989) | मतदान आयु 21→18 |
| 73वां/74वां संशोधन (1992) | पंचायती राज + शहरी स्थानीय निकाय संवैधानिक |
| 86th संशोधन (2002) | अनुच्छेद 21A — शिक्षा का अधिकार |
| 99th संशोधन (2014) | NJAC — सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2015 में रद्द |
| 101st संशोधन (2016) | GST लागू |
| 103rd संशोधन (2019) | EWS 10% आरक्षण |
| 9वीं अनुसूची उन्मुक्ति सीमा | 24 अप्रैल 1973 के बाद जोड़े गए कानून मूल ढांचे की परीक्षा के अधीन (I.R. Coelho, 2007) |
| NJAC रद्द करने का कारण | न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन = मूल ढांचा |
