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परिचय एवं संदर्भ
संशोधन शक्ति क्यों महत्वपूर्ण है
संविधान में संशोधन की शक्ति और उस पर सीमाएं भारतीय संवैधानिक कानून के सर्वाधिक विवादित क्षेत्रों में से एक हैं। मूल ढांचा सिद्धांत, जो सर्वोच्च न्यायालय और संसद के बीच नौ वर्षीय न्यायिक संघर्ष से उत्पन्न हुआ, तुलनात्मक संवैधानिक सिद्धांत में भारत का अनूठा योगदान है। किसी अन्य लोकतंत्र ने न्यायाधीशों द्वारा निर्मित कानून के माध्यम से संशोधन शक्ति पर ऐसा सैद्धांतिक नियंत्रण विकसित नहीं किया है।
एक कठोर संविधान जिसमें संशोधन नहीं हो सकता, पुराना पड़ जाता है। एक लचीला संविधान जिसे आसानी से बदला जा सके, दलगत उद्देश्यों के लिए विकृत किया जा सकता है। अनुच्छेद 368 इन चिंताओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है — विशेष बहुमत की अनिवार्यता द्वारा जल्दबाज़ी या पक्षपातपूर्ण संशोधनों को रोकते हुए आवश्यक परिवर्तन की अनुमति देता है।
RPSC 2026 के लिए परीक्षा की दृष्टि
RPSC 2026 परीक्षा के लिए इस विषय में दो अलग कोण हैं:
- सैद्धांतिक: मूल ढांचा, संशोधन प्रक्रिया, प्रमुख मामले
- तथ्यात्मक: विशिष्ट संशोधन — उनकी संख्या, वर्ष, सामग्री
दोनों से 5 अंक के प्रश्न बन सकते हैं। 10 अंक के प्रश्न आमतौर पर आलोचनात्मक विश्लेषण मांगते हैं।
