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संविधान सभा
2.1 गठन और संरचना
संविधान सभा की परिकल्पना क्रिप्स मिशन (1942) में की गई थी और इसका गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के तहत हुआ। सभा के लिए चुनाव जुलाई 1946 में प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा (अप्रत्यक्ष निर्वाचन) आयोजित किए गए।
प्रमुख संरचनात्मक तथ्य:
- कुल सदस्य (अविभाजित भारत): 389 (292 ब्रिटिश प्रांतों से + 93 देशी रियासतों से + 4 मुख्य आयुक्त प्रांतों से)
- विभाजन के बाद (1947): घटकर 299 सदस्य रह गए
- सांप्रदायिक संरचना: हिंदू ~69%, मुसलमान ~21%, सिख और अन्य ~10%
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद: संविधान सभा के अध्यक्ष
- सर Alladi Krishnaswami Ayyar और K.M. Munshi: प्रमुख विधिक प्रारूपकार
- B.N. Rau: संवैधानिक सलाहकार जिन्होंने प्रारंभिक संवैधानिक प्रारूप तैयार किया
2.2 संविधान सभा की समितियाँ
सभा ने अनेक समितियों के माध्यम से कार्य किया:
| समिति | अध्यक्ष | कार्य |
|---|---|---|
| प्रारूप समिति | डॉ. B.R. Ambedkar | अंतिम संविधान पाठ की जाँच और प्रारूपण |
| संघ शक्ति समिति | Jawaharlal Nehru | संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण |
| संघ संविधान समिति | Jawaharlal Nehru | संघ की संघीय संरचना |
| प्रांतीय संविधान समिति | Sardar Vallabhbhai Patel | राज्यों के संविधान |
| FR पर सलाहकार समिति | Sardar Patel | मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यक |
| संचालन समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद | समग्र समन्वय |
2.3 भारतीय संविधान के स्रोत
भारतीय संविधान ने अनेक स्रोतों से प्रेरणा ली:
| स्रोत | उधार लिए गए तत्व |
|---|---|
| भारत सरकार अधिनियम 1935 | संघीय संरचना, राज्यपाल का कार्यालय, आपातकालीन प्रावधान, लोक सेवा आयोग |
| ब्रिटिश संविधान | संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता, कैबिनेट प्रणाली, रिट |
| अमेरिकी संविधान | मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रस्तावना की अवधारणा |
| आयरिश संविधान | राज्य के नीति निदेशक तत्व, राज्यसभा सदस्यों का नामांकन |
| कनाडाई संविधान | अर्ध-संघीय संरचना, केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियाँ |
| ऑस्ट्रेलियाई संविधान | समवर्ती सूची, व्यापार की स्वतंत्रता, संसद का संयुक्त अधिवेशन |
| USSR संविधान (1936) | मौलिक कर्तव्य, DPSP में समाजवादी आदर्श |
| वाइमर संविधान (जर्मनी) | आपातकालीन प्रावधान, आपातकाल में मौलिक अधिकारों का निलंबन |
| दक्षिण अफ्रीकी संविधान | कुछ प्रावधानों के लिए संशोधन प्रक्रिया |
2.4 प्रारूपण प्रक्रिया
प्रारूप समिति ने 4 नवंबर 1948 को संविधान का प्रारूप प्रस्तुत किया। इस पर 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिनों में 11 सत्रों में विचार-विमर्श हुआ, और सभा ने 166 दिनों की बैठकें कीं।
प्रमुख प्रारूपण आँकड़े:
- 2,473 संशोधन प्रस्तावित हुए; 284 वास्तव में शामिल किए गए
- अंगीकरण के समय संविधान में 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ थीं
डॉ. Ambedkar के समापन भाषण (25 नवंबर 1949) ने चेतावनी दी कि संवैधानिक नैतिकता स्वाभाविक नहीं थी — इसे विकसित करना होगा।
