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हिमालय पर्वत तंत्र कैसे बना और इसकी मुख्य श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
हिमालय पर्वत तंत्र भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से बना युवा वलित पर्वत तंत्र है, जिसकी मुख्य श्रेणियाँ महान हिमालय यानी हिमाद्रि, लघु हिमालय यानी हिमाचल और बाह्य हिमालय यानी शिवालिक हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के हिमालयी पारिस्थितिकी दस्तावेज के अनुसार भारतीय हिमालयी क्षेत्र लगभग ५.३ लाख वर्ग किमी में फैला है, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का १६.२ प्रतिशत है।
२.१ निर्माण और भूवैज्ञानिक इतिहास
हिमालय वलित पर्वत हैं जो भारतीय प्लेट (लगभग ५ सेमी प्रति वर्ष की दर से उत्तर की ओर गतिशील) और यूरेशियन प्लेट के टकराव से बने हैं; यह टकराव लगभग ७ करोड़ वर्ष पूर्व, क्रिटेशियस काल के उत्तरार्द्ध में प्रारंभ हुआ। इन दो प्लेटों के बीच स्थित प्राचीन टेथीस सागर के अवसाद संकुचित होकर ऊपर उठे और विश्व की सर्वोच्च एवं सबसे नई पर्वत प्रणालियों में से एक का निर्माण हुआ। यह प्रक्रिया आज भी जारी है — हिमालय अभी भी लगभग ५ मिमी प्रति वर्ष की दर से ऊँचे हो रहे हैं और इसी विवर्तनिक दबाव के कारण इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आते हैं।
हिमालय निर्माण के तीन चरण:
- चरण १ (लगभग ७–४ करोड़ वर्ष पूर्व): प्रारंभिक टकराव; टेथीस अवसाद मुड़ने लगते हैं; आदि-हिमालय का निर्माण।
- चरण २ (लगभग २.५–१.५ करोड़ वर्ष पूर्व): मुख्य उत्थान चरण; महान हिमालय और लघु हिमालय उभरते हैं; टेथीस सागर विलुप्त।
- चरण ३ (लगभग ५०–२० लाख वर्ष पूर्व): युवा हिमालय से नदियों द्वारा निक्षेपित मलबे से शिवालिक पहाड़ियाँ बनती हैं; अंतरापर्वतीय घाटियाँ यानी दून निर्मित।
२.२ तीन समानांतर श्रेणियाँ
१. महान हिमालय / हिमाद्रि (आंतरिक हिमालय)
- सर्वोच्च और सबसे सतत श्रेणी; औसत ऊँचाई लगभग ६,००० मी
- ६,००० मी से अधिक की सभी प्रमुख चोटियाँ यहाँ हैं, जिनमें भारत की सर्वोच्च चोटियाँ सम्मिलित हैं
- हमेशा बर्फ़ से ढका; घाटी हिमनदियों का आवास; सियाचिन ७६ किमी लंबा है और काराकोरम क्षेत्र का सबसे लंबा हिमनद माना जाता है
- प्रमुख चोटियाँ: कंचनजंघा (८,५८६ मी) — भारत की सर्वोच्च, नंदा देवी (७,८१६ मी) — दूसरी सर्वोच्च, कामेत (७,७५६ मी)
- नोट: के-२ (८,६११ मी) पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र में है, इसलिए भारतीय प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र की सर्वोच्च चोटी कंचनजंघा पढ़ी जाती है
२. लघु हिमालय / हिमाचल (मध्य हिमालय)
- औसत ऊँचाई ३,७००–४,५०० मी; चौड़ाई ६०–८० किमी
- प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल: शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग
- पीर पंजाल, धौलाधार और महाभारत लेख श्रेणियाँ सम्मिलित
- शंकुधारी वनों से समृद्ध; ग्रीष्मकालीन चरागाह यानी बुग्याल
- उत्तराखंड के चमोली जिले में प्रसिद्ध फूलों की घाटी (UNESCO विश्व धरोहर) यहीं स्थित है
३. बाह्य हिमालय / शिवालिक (उप-हिमालय)
- सबसे नई श्रेणी, २०–५० लाख वर्ष पुरानी; ऊँचाई ६००–१,५०० मी; चौड़ाई १०–५० किमी
- हिमालयी अपरदन के असंगठित बजरी, रेत और समूहाश्म से निर्मित
- गंभीर अपरदन का शिकार; अलग-अलग श्रेणियों में बिखरी हुई
- दून — शिवालिक और लघु हिमालय के बीच अनुदैर्ध्य घाटियाँ: देहरादून, पटली दून, कोटली दून, हरिद्वार दून
२.३ हिमालय के क्षेत्रीय विभाग
| क्षेत्र | राज्य/क्षेत्र | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|
| पंजाब हिमालय | जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश | सिंधु और सतलज नदियों के बीच; ५६० किमी |
| कुमाऊँ हिमालय | उत्तराखंड | सतलज और काली नदियों के बीच; ३२० किमी; नंदा देवी चोटी |
| नेपाल हिमालय | नेपाल सीमा | ८०० किमी; एवरेस्ट (८,८४९ मी), कंचनजंघा |
| असम/पूर्वोत्तर हिमालय | सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश | तिस्ता और ब्रह्मपुत्र के बीच; ७२० किमी |
२.४ प्रमुख पर्वतीय दर्रे (पिछला वर्ष प्रश्न २०२३ — मानचित्र प्रश्न)
| दर्रा | राज्य | ऊँचाई (मी) | जुड़े क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| नाथू ला | सिक्किम | ४,३१० | भारत–चीन व्यापार मार्ग; २००६ में पुनः खुला |
| शिपकी ला | हिमाचल प्रदेश | ३,९३३ | सतलज घाटी; भारत–तिब्बत व्यापार |
| रोहतांग | हिमाचल प्रदेश | ३,९७८ | मनाली–लाहौल-स्पीति; अटल सुरंग इस मार्ग का वैकल्पिक रास्ता देती है |
| जोजिला | जम्मू-कश्मीर/लद्दाख संपर्क | ३,५२९ | श्रीनगर–लेह राजमार्ग; रणनीतिक मार्ग |
| बरालाचा ला | हिमाचल प्रदेश/लद्दाख | ४,८९० | मनाली–लेह राजमार्ग |
| खारदुंग ला | लद्दाख | ५,३५९ | नुब्रा घाटी से जुड़ने वाला बहुत ऊँचा मोटरयोग्य मार्ग; पुराने पाठ्य-स्रोतों में इसे विश्व के सबसे ऊँचे मोटरयोग्य मार्गों में पढ़ाया जाता था |
| पाल घाट (पालक्काड़ अंतराल) | केरल | लगभग १५० | पश्चिमी घाट में अंतराल; राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४; तटीय रेलमार्ग |
| थाल घाट | महाराष्ट्र | लगभग ५८३ | मुंबई–नासिक; प्रमुख रेलवे/सड़क दर्रा |
| भोर घाट | महाराष्ट्र | लगभग ६२७ | मुंबई–पुणे; पश्चिमी रेलवे |
