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रासायनिक एवं जैविक हथियार
7.1 रासायनिक हथियार
रासायनिक हथियार शत्रुओं को मारने, घायल करने या अक्षम करने के लिए विषाक्त रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं। इन्हें सामूहिक विनाश के हथियार (WMDs) माना जाता है।
शारीरिक प्रभाव द्वारा वर्गीकरण
| श्रेणी | कारक | तंत्र | कुख्यात उपयोग |
|---|---|---|---|
| तंत्रिका कारक | Sarin (GB), VX, Novichok, Tabun | एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ को अवरुद्ध करते हैं → निरंतर तंत्रिका संकेत → मांसपेशी पक्षाघात, श्वासावरोध | सीरिया (2013, 2018 — sarin); साउथबरी UK विषाक्तता (Novichok, 2018) |
| ब्लिस्टर कारक (वेसिकेंट) | सल्फर मस्टर्ड (मस्टर्ड गैस), Lewisite | DNA को एल्किलेट करते हैं; त्वचा, आंखों, श्वसन मार्ग पर गंभीर छाले | WWI (1917); ईरान-इराक युद्ध (1980 के दशक) |
| रक्त कारक | हाइड्रोजन साइनाइड (AC), Cyanogen chloride | साइटोक्रोम c ऑक्सीडेज़ से बंधकर कोशिकीय श्वसन अवरुद्ध करते हैं | WWI; संघर्षों में सीमित उपयोग |
| दम घुटाने के कारक | Phosgene (CG), Chlorine | वायुकोशिकाओं को नुकसान → फुफ्फुसीय शोफ → श्वासावरोध | WWI; ISIS द्वारा क्लोरीन का उपयोग (2014) |
| अक्षम करने वाले कारक | BZ (3-Quinuclidinyl benzilate) | एंटीकोलिनर्जिक; भ्रम, मतिभ्रम | शीत युद्ध विकास; युद्ध में उपयोग नहीं |
Tabun (1936) पहला ऑर्गेनोफॉस्फेट तंत्रिका कारक था, जिसे Gerhard Schrader (जर्मनी) ने कीटनाशक विकसित करने का प्रयास करते हुए खोजा।
7.2 रासायनिक हथियार कन्वेंशन (CWC)
CWC एक अंतर्राष्ट्रीय हथियार नियंत्रण संधि है जो रासायनिक हथियारों के उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर रोक लगाती है और उनके विनाश की आवश्यकता करती है।
| प्रमुख पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| अपनाई गई | 1993 (पेरिस) |
| प्रभाव में आई | 29 अप्रैल 1997 |
| हस्ताक्षरकर्ता | 193 सदस्य राज्य (केवल 4 गैर-हस्ताक्षरकर्ता: इज़राइल, मिस्र, उत्तर कोरिया, दक्षिण सूडान) |
| क्रियान्वयन निकाय | OPCW (रासायनिक हथियारों के निषेध संगठन), हेग, नीदरलैंड |
| नोबेल शांति पुरस्कार | OPCW को 2013 में नोबेल शांति पुरस्कार |
| भारत की स्थिति | भारत ने 1996 में CWC अनुमोदित किया; अपने सभी रासायनिक हथियार भंडार घोषित और नष्ट किए (1997 में पूर्ण) |
| सबसे महत्वपूर्ण विनाश | USA ने 7 जुलाई 2023 को सभी घोषित रासायनिक हथियारों का विनाश पूर्ण किया — वैश्विक मील का पत्थर |
OPCW का जनादेश
- रासायनिक हथियारों पर वैश्विक प्रतिबंध की निगरानी
- दुरुपयोग रोकने के लिए रासायनिक उद्योग का निरीक्षण
- रासायनिक हमले से खतरे वाले देशों को सहायता
- कथित उपयोग की जांच (सीरिया जांच)
सीरियाई रासायनिक हथियार कार्यक्रम: घूटा में sarin हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद सीरिया ने सितंबर 2013 में CWC में शामिल हुआ (1,400+ की मृत्यु)। हालांकि OPCW जांच में पाया गया कि सीरिया ने रासायनिक हथियारों का उपयोग जारी रखा (क्लोरीन बैरल बम, 2017–2018 में sarin हमले)। अप्रैल 2021 में सीरिया को OPCW से निलंबित किया गया।
7.3 जैविक हथियार
जैविक हथियार नुकसान पहुंचाने के लिए जीवित जीवों (बैक्टीरिया, वायरस, कवक, विषाक्त पदार्थ) का उपयोग करते हैं। इन्हें सामूहिक विनाश के हथियार के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
जैविक कारकों के प्रकार
| श्रेणी | कारक | क्यों खतरनाक |
|---|---|---|
| बैक्टीरिया | एंथ्रेक्स (B. anthracis), प्लेग (Y. pestis), टुलारेमिया | अत्यधिक घातक; एंथ्रेक्स बीजाणु दशकों तक जीवित रहते हैं |
| वायरस | चेचक (Variola), Ebola, Marburg | अत्यधिक संक्रामक; सीमित उपचार |
| विषाक्त पदार्थ | बोटुलिनम विष (ज्ञात सबसे विषाक्त पदार्थ), Ricin, Abrin | नैनोग्राम मात्राएं घातक |
| कवक | Yellow rain (ट्राइकोथेसीन माइकोटॉक्सिन) | दक्षिणपूर्व एशिया में कथित उपयोग (1970 के दशक) |
एंथ्रेक्स (Bacillus anthracis): बैक्टीरियल बीजाणुओं को श्वास-एंथ्रेक्स के लिए एरोसोलाइज़ किया जा सकता है (उपचार न होने पर 80–90% मृत्यु दर)। 2001 के अमेरिकी एंथ्रेक्स पत्रों से 5 मौतें और 17 संक्रमण हुए। यदि जल्दी पकड़ा जाए तो एंटीबायोटिक्स (सिप्रोफ्लोक्सासिन) से उपचार योग्य है।
7.4 जैविक हथियार कन्वेंशन (BWC)
BWC WMD की एक पूरी श्रेणी के विकास, उत्पादन और भंडारण को प्रतिबंधित करने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता था।
| प्रमुख पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| अपनाया गया | 10 अप्रैल 1972 (वाशिंगटन, लंदन, मॉस्को) |
| प्रभाव में आया | 26 मार्च 1975 |
| हस्ताक्षरकर्ता | 183 राज्य पक्ष |
| भारत का अनुमोदन | 1974 |
| प्रमुख कमज़ोरी | कोई सत्यापन तंत्र नहीं (CWC के OPCW के विपरीत) — राष्ट्र स्वयं अनुपालन घोषित करते हैं; हर 5 वर्ष में समीक्षा सम्मेलन |
BWC की कमज़ोरी बनाम CWC की ताकत
- CWC: OPCW के साथ हस्तक्षेपकारी निरीक्षण अधिकार, रासायनिक उद्योग निगरानी, और अंतर्राष्ट्रीय जांच क्षमता है
- BWC: समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय निगरानी निकाय नहीं; राज्य घोषणाओं पर निर्भर; सत्यापन करना कठिन क्योंकि नागरिक जैव-प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाएं संभावित रूप से पुनः उपयोग की जा सकती हैं
COVID-19 उत्पत्ति विवाद (लैब लीक परिकल्पना): BWC ढांचे पर दोहरे उपयोग अनुसंधान — जो चिकित्सा को आगे बढ़ाता है लेकिन सैद्धांतिक रूप से हथियारबंद किया जा सकता है — की चिंताओं से दबाव पड़ा है। गेन-ऑफ-फंक्शन अनुसंधान (रोगजनकों को अधिक संचरणीय/विषाणुजनित बनाना) विवादास्पद है।
