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मानव कार्यिकी
4.1 पाचन तंत्र
पाचन मार्ग:
| अंग | एंजाइम/रस | सब्सट्रेट → उत्पाद |
|---|---|---|
| मुँह (लार ग्रंथियाँ) | लार amylase (ptyalin) | स्टार्च → माल्टोज़ |
| आमाशय | Pepsin (HCl में) | प्रोटीन → पॉलीपेप्टाइड |
| आमाशय | गैस्ट्रिक lipase | वसा → वसीय अम्ल (आंशिक) |
| छोटी आंत (अग्न्याशय) | Trypsin, chymotrypsin | पॉलीपेप्टाइड → अमीनो अम्ल |
| छोटी आंत (अग्न्याशय) | अग्न्याशयी amylase | स्टार्च → माल्टोज़ |
| छोटी आंत (अग्न्याशय) | अग्न्याशयी lipase | वसा → ग्लिसरॉल + वसीय अम्ल |
| यकृत (पित्त वाहिनी) | पित्त लवण | वसा का पायसीकरण (यांत्रिक, एंजाइमेटिक नहीं) |
| छोटी आंत (विली) | Maltase, sucrase, lactase | डाइसेकेराइड → मोनोसेकेराइड |
| बड़ी आंत | बैक्टीरिया (फ्लोरा) | जल अवशोषण; Vitamin K और B₁₂ संश्लेषण |
4.2 रक्त और परिसंचरण तंत्र
रक्त संरचना
- प्लाज़्मा (55%): जल, प्रोटीन (एल्ब्यूमिन, ग्लोब्युलिन, फाइब्रिनोजन), ग्लूकोज़, हार्मोन, अपशिष्ट उत्पाद।
- लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs/एरिथ्रोसाइट): हीमोग्लोबिन युक्त — O₂ वहन करती हैं। वयस्कों में 4.5–5.5 मिलियन/mm³। परिपक्व मानव RBCs में केंद्रक नहीं। जीवनकाल: 120 दिन। लाल अस्थि मज्जा में बनती हैं।
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs/ल्यूकोसाइट): प्रतिरक्षा और सुरक्षा। प्रकार: न्यूट्रोफिल (फैगोसाइटोसिस), लिम्फोसाइट (प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया), मोनोसाइट, इओसिनोफिल, बेसोफिल।
- प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट): रक्त का थक्का जमाना। प्लेटलेट प्लग + फाइब्रिन थक्का (जमावट श्रृंखला — Vitamin K निर्भर)।
रक्त समूह — ABO प्रणाली (Karl Landsteiner, 1900 — Nobel Prize 1930)
| रक्त समूह | प्रतिजन (RBC पर) | प्रतिरक्षी (प्लाज़्मा में) | दे सकता है | प्राप्त कर सकता है |
|---|---|---|---|---|
| A | A | b (anti-B) | A, AB | A, O |
| B | B | a (anti-A) | B, AB | B, O |
| AB | A + B | कोई नहीं | केवल AB | सभी (सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता) |
| O | कोई नहीं | a + b | सभी (सार्वभौमिक दाता) | केवल O |
Rh कारक और गर्भावस्था
लगभग 80% भारतीय Rh+ हैं (Rh प्रतिजन उपस्थित)। Rh असंगति तब होती है जब Rh- माँ Rh+ भ्रूण को गर्भ में रखती है। मातृ anti-Rh प्रतिरक्षी (दूसरी गर्भावस्था में बनते हैं) अपरा को पार कर भ्रूण के RBCs नष्ट करते हैं, जिससे नवजात की रक्तलयी बीमारी होती है। रोकथाम: प्रसव के 72 घंटों के भीतर Anti-D इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन।
हृदय कार्य
हृदय एक दोहरा पंप है। दाईं ओर अऑक्सीजनयुक्त रक्त फेफड़ों को (फुफ्फुसीय परिसंचरण); बाईं ओर ऑक्सीजनयुक्त रक्त शरीर को (प्रणालीगत परिसंचरण) पंप करती है। सामान्य हृदय दर: 60–100 bpm। BP: सामान्य = 120/80 mmHg; उच्च रक्तचाप > 130/80।
4.3 श्वसन तंत्र
श्वास तंत्र: डायफ्राम संकुचित होता है (चपटा) + इंटरकोस्टल मांसपेशियाँ संकुचित होती हैं → वक्ष का आयतन बढ़ता है → फेफड़ों का दबाव वायुमंडलीय से कम → हवा अंदर आती है (अंतःश्वसन)। विपरीत = उच्छ्वसन।
गैस विनिमय: O₂ वायुकोशों से रक्त में विसरित होता है (वायुकोशों में pO₂ अधिक → केशिकाओं में pO₂ कम); CO₂ रक्त से वायुकोशों में विसरित होती है।
फेफड़ों की क्षमता (वयस्क):
- ज्वारीय आयतन = 500 mL (सामान्य श्वास)
- जीवन क्षमता = ~4,500 mL (अधिकतम)
- कुल फेफड़ा क्षमता = ~6,000 mL
4.4 तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र
न्यूरॉन संरचना: कोशिका काय (soma) + डेंड्राइट (संकेत प्राप्त करते हैं) + एक्सॉन (संकेत प्रसारित करता है) + सिनैप्टिक टर्मिनल। तंत्रिका आवेग = एक्शन पोटेंशियल। गति: माइलिनेटेड तंतुओं में 120 m/s तक।
प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियाँ:
| ग्रंथि | हार्मोन | कार्य |
|---|---|---|
| हाइपोथैलेमस | विमोचन हार्मोन | पिट्यूटरी को नियंत्रित करता है |
| अग्र पिट्यूटरी | GH, TSH, ACTH, FSH, LH | वृद्धि, थायरॉइड, अधिवृक्क, प्रजनन |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन (T4), T3 | चयापचय दर; आयोडीन की कमी → घेंघा |
| अग्न्याशय (β कोशिकाएँ) | Insulin | रक्त ग्लूकोज़ कम करती है; कमी → Type 1 मधुमेह |
| अग्न्याशय (α कोशिकाएँ) | Glucagon | रक्त ग्लूकोज़ बढ़ाती है |
| अधिवृक्क मज्जा | एड्रिनलिन (epinephrine) | "लड़ाई या भागो" — HR, BP वृद्धि |
| पैराथायरॉइड | PTH | रक्त Ca²⁺ बढ़ाती है |
| वृषण | टेस्टोस्टेरोन | पुरुष द्वितीयक विशेषताएँ |
| अंडाशय | एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन | महिला प्रजनन चक्र |
