सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
परमाणु भौतिकी एवं विकिरण सुरक्षा
8.1 परमाणु अभिक्रियाएँ
बंधन ऊर्जा: किसी नाभिक को उसके प्रोटोन और न्यूट्रॉन में पूरी तरह अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा। नाभिक जितना अधिक कसकर बँधा होता है, उतना ही स्थिर।
आयरन-56 (Fe-56) में प्रति न्यूक्लिऑन सर्वाधिक बंधन ऊर्जा है — सबसे स्थिर नाभिक।
E = mc² (आइंस्टीन, 1905 विशेष सापेक्षता): द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता। परमाणु अभिक्रियाओं में छोटे द्रव्यमान दोष से अपार ऊर्जा परिवर्तित होती है। 1 a.m.u. ≈ 931 MeV ऊर्जा।
परमाणु विखंडन
- भारी नाभिक + न्यूट्रॉन → दो मध्यम नाभिक + 2–3 न्यूट्रॉन + ~200 MeV
- उदाहरण: U-235 + n → Ba-141 + Kr-92 + 3n + 200 MeV
- श्रृंखला अभिक्रिया: निकले न्यूट्रॉन आगे विखंडन कराते हैं। परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रित; परमाणु हथियारों में अनियंत्रित।
- क्रांतिक द्रव्यमान: श्रृंखला अभिक्रिया बनाए रखने के लिए विखंडनीय पदार्थ की न्यूनतम मात्रा।
परमाणु रिएक्टर के घटक:
- ईंधन: संवर्धित U-235 (शक्ति रिएक्टरों के लिए 3–4% संवर्धन)
- मॉडरेटर: न्यूट्रॉनों को तापीय (धीमी) गति तक धीमा करता है — भारी पानी (D₂O), ग्रेफाइट, सामान्य पानी
- नियंत्रण छड़ें: अतिरिक्त न्यूट्रॉन अवशोषित करती हैं — कैडमियम या बोरान; अभिक्रिया दर नियंत्रित करने के लिए डाली/निकाली जाती हैं
- शीतलक: ऊष्मा हटाता है — पानी, भारी पानी, CO₂, सोडियम; ऊष्मा भाप टरबाइन चलाती है
- परिरोधन: विकिरण रिसाव रोकने वाला प्रबलित कंक्रीट/इस्पात गुम्बद
भारत का परमाणु कार्यक्रम
- तीन-चरण कार्यक्रम (होमी भाभा): चरण 1 (प्राकृतिक यूरेनियम → Pu-239), चरण 2 (Pu-239 ब्रीडर रिएक्टर), चरण 3 (थोरियम → U-233 ईंधन चक्र)।
- भारत में विश्व का सबसे बड़ा थोरियम भंडार — केरल, तमिलनाडु, AP में वैश्विक भंडार का 25%।
- 22 परिचालित रिएक्टर, ~6,780 MWe क्षमता (2025); लक्ष्य: 2047 तक 100 GWe परमाणु क्षमता।
- राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन (RAPS), रावतभाटा: 6 इकाइयाँ, ~1,180 MWe — भारत का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु स्टेशन।
8.2 परमाणु संलयन
संलयन अभिक्रिया (ड्यूटेरियम-ट्रिटियम): D + T → He-4 + n + 17.6 MeV
- नाभिकों के बीच कूलम्ब प्रतिकर्षण पर काबू पाने के लिए 100 मिलियन °C आवश्यक — सूर्य के केंद्र से भी गर्म।
- संलयन से He-4 प्राथमिक अपशिष्ट के रूप में उत्पन्न होता है (निष्क्रिय गैस); केवल अल्पकालिक सक्रिय घटक।
ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor):
- कैडाराश, फ्रांस में निर्माणाधीन; भारत सहित 35 देश भागीदार।
- लक्ष्य: Q = 10 (निर्गत = निवेश का 10×)।
- प्रथम प्लाज़्मा: 2025 अपेक्षित; पूर्ण D-T संचालन: 2035।
NIF (National Ignition Facility), USA:
- दिसंबर 2022 में प्रज्वलन (Q > 1) प्राप्त किया — पहली बार संलयन ने लेज़रों से अधिक ऊर्जा उत्पन्न की।
- संलयन अनुसंधान में ऐतिहासिक मील का पत्थर।
8.3 विकिरण सुरक्षा
विकिरण मापन की इकाइयाँ:
- बेकरेल (Bq): गतिविधि — प्रति सेकंड 1 विखंडन।
- ग्रे (Gy): अवशोषित खुराक — प्रति kg ऊतक में 1 जूल ऊर्जा अवशोषित।
- सीवर्ट (Sv): प्रभावी खुराक — विभिन्न विकिरण प्रकारों की जैविक प्रभावशीलता को ध्यान में रखता है। 1 Sv = 1 J/kg (समान-हानि तुलना के लिए)।
ALARA सिद्धांत (As Low As Reasonably Achievable): विकिरण सुरक्षा का मार्गदर्शक सिद्धांत।
खुराक सीमाएँ (ICRP — International Commission on Radiological Protection):
- विकिरण कर्मी: 5 वर्षों में औसतन 20 mSv/वर्ष (5 वर्षों में अधिकतम 100 mSv)
- सामान्य जनता: 1 mSv/वर्ष
- प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण (भारत औसत): ~2.4 mSv/वर्ष (केरल के मोनाज़ाइट पट्टे में अधिक — कुछ क्षेत्रों में 20–30 mSv/वर्ष, फिर भी कैंसर दर में वृद्धि नहीं — विकिरण हार्मेसिस तर्क में उपयोग)
विकिरण सुरक्षा के तीन मूल सिद्धांत:
- समय: रेडियोधर्मी स्रोत के पास बिताया समय कम से कम करें। खुराक ∝ समय।
- दूरी: स्रोत से अधिकतम दूरी रखें। खुराक ∝ 1/दूरी²।
- परिरक्षण: उचित परिरक्षण सामग्री: अल्फा — कागज/त्वचा; बीटा — पतला एल्युमीनियम; गामा/X-ray — सीसा, कंक्रीट।
विकिरण दुर्घटनाएँ और सबक:
- चेर्नोबिल (1986): ग्रेफाइट-मॉडरेटेड RBMK रिएक्टर डिजाइन दोष + ऑपरेटर त्रुटि → भाप विस्फोट → रेडियोधर्मी आग। ~30 प्रत्यक्ष मृत्यु; यूक्रेन, बेलारूस, रूस में दीर्घकालिक थायरॉइड कैंसर में वृद्धि।
- फुकुशिमा (2011): सुनामी ने शीतलन अक्षम किया → हाइड्रोजन विस्फोट → रेडियोधर्मी रिसाव। कोई प्रत्यक्ष विकिरण मृत्यु नहीं, किन्तु बड़े पैमाने पर निकासी।
- सबक: निष्क्रिय सुरक्षा प्रणालियाँ (बाह्य बिजली के बिना शीतलन), मजबूत परिरोधन, पारदर्शी आपात प्रोटोकॉल।
