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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

परमाणु भौतिकी एवं विकिरण सुरक्षा

भौतिक विज्ञान: गति, कार्य/शक्ति/ऊर्जा, गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, ऊष्मा, विद्युत, चुंबकत्व, ध्वनि, विद्युत-चुंबकीय तरंगें, चिकित्सा निदान, परमाणु विखंडन/संलयन, विकिरण सुरक्षा

पेपर II · इकाई 2 अनुभाग 9 / 13 0 PYQ 31 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

परमाणु भौतिकी एवं विकिरण सुरक्षा

8.1 परमाणु अभिक्रियाएँ

बंधन ऊर्जा: किसी नाभिक को उसके प्रोटोन और न्यूट्रॉन में पूरी तरह अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा। नाभिक जितना अधिक कसकर बँधा होता है, उतना ही स्थिर।

आयरन-56 (Fe-56) में प्रति न्यूक्लिऑन सर्वाधिक बंधन ऊर्जा है — सबसे स्थिर नाभिक।

E = mc² (आइंस्टीन, 1905 विशेष सापेक्षता): द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता। परमाणु अभिक्रियाओं में छोटे द्रव्यमान दोष से अपार ऊर्जा परिवर्तित होती है। 1 a.m.u. ≈ 931 MeV ऊर्जा।

परमाणु विखंडन

  • भारी नाभिक + न्यूट्रॉन → दो मध्यम नाभिक + 2–3 न्यूट्रॉन + ~200 MeV
  • उदाहरण: U-235 + n → Ba-141 + Kr-92 + 3n + 200 MeV
  • श्रृंखला अभिक्रिया: निकले न्यूट्रॉन आगे विखंडन कराते हैं। परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रित; परमाणु हथियारों में अनियंत्रित।
  • क्रांतिक द्रव्यमान: श्रृंखला अभिक्रिया बनाए रखने के लिए विखंडनीय पदार्थ की न्यूनतम मात्रा।

परमाणु रिएक्टर के घटक:

  • ईंधन: संवर्धित U-235 (शक्ति रिएक्टरों के लिए 3–4% संवर्धन)
  • मॉडरेटर: न्यूट्रॉनों को तापीय (धीमी) गति तक धीमा करता है — भारी पानी (D₂O), ग्रेफाइट, सामान्य पानी
  • नियंत्रण छड़ें: अतिरिक्त न्यूट्रॉन अवशोषित करती हैं — कैडमियम या बोरान; अभिक्रिया दर नियंत्रित करने के लिए डाली/निकाली जाती हैं
  • शीतलक: ऊष्मा हटाता है — पानी, भारी पानी, CO₂, सोडियम; ऊष्मा भाप टरबाइन चलाती है
  • परिरोधन: विकिरण रिसाव रोकने वाला प्रबलित कंक्रीट/इस्पात गुम्बद

भारत का परमाणु कार्यक्रम

  • तीन-चरण कार्यक्रम (होमी भाभा): चरण 1 (प्राकृतिक यूरेनियम → Pu-239), चरण 2 (Pu-239 ब्रीडर रिएक्टर), चरण 3 (थोरियम → U-233 ईंधन चक्र)।
  • भारत में विश्व का सबसे बड़ा थोरियम भंडार — केरल, तमिलनाडु, AP में वैश्विक भंडार का 25%।
  • 22 परिचालित रिएक्टर, ~6,780 MWe क्षमता (2025); लक्ष्य: 2047 तक 100 GWe परमाणु क्षमता।
  • राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन (RAPS), रावतभाटा: 6 इकाइयाँ, ~1,180 MWe — भारत का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु स्टेशन।

8.2 परमाणु संलयन

संलयन अभिक्रिया (ड्यूटेरियम-ट्रिटियम): D + T → He-4 + n + 17.6 MeV

  • नाभिकों के बीच कूलम्ब प्रतिकर्षण पर काबू पाने के लिए 100 मिलियन °C आवश्यक — सूर्य के केंद्र से भी गर्म।
  • संलयन से He-4 प्राथमिक अपशिष्ट के रूप में उत्पन्न होता है (निष्क्रिय गैस); केवल अल्पकालिक सक्रिय घटक।

ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor):

  • कैडाराश, फ्रांस में निर्माणाधीन; भारत सहित 35 देश भागीदार।
  • लक्ष्य: Q = 10 (निर्गत = निवेश का 10×)।
  • प्रथम प्लाज़्मा: 2025 अपेक्षित; पूर्ण D-T संचालन: 2035।

NIF (National Ignition Facility), USA:

  • दिसंबर 2022 में प्रज्वलन (Q > 1) प्राप्त किया — पहली बार संलयन ने लेज़रों से अधिक ऊर्जा उत्पन्न की।
  • संलयन अनुसंधान में ऐतिहासिक मील का पत्थर।

8.3 विकिरण सुरक्षा

विकिरण मापन की इकाइयाँ:

  • बेकरेल (Bq): गतिविधि — प्रति सेकंड 1 विखंडन।
  • ग्रे (Gy): अवशोषित खुराक — प्रति kg ऊतक में 1 जूल ऊर्जा अवशोषित।
  • सीवर्ट (Sv): प्रभावी खुराक — विभिन्न विकिरण प्रकारों की जैविक प्रभावशीलता को ध्यान में रखता है। 1 Sv = 1 J/kg (समान-हानि तुलना के लिए)।

ALARA सिद्धांत (As Low As Reasonably Achievable): विकिरण सुरक्षा का मार्गदर्शक सिद्धांत।

खुराक सीमाएँ (ICRP — International Commission on Radiological Protection):

  • विकिरण कर्मी: 5 वर्षों में औसतन 20 mSv/वर्ष (5 वर्षों में अधिकतम 100 mSv)
  • सामान्य जनता: 1 mSv/वर्ष
  • प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण (भारत औसत): ~2.4 mSv/वर्ष (केरल के मोनाज़ाइट पट्टे में अधिक — कुछ क्षेत्रों में 20–30 mSv/वर्ष, फिर भी कैंसर दर में वृद्धि नहीं — विकिरण हार्मेसिस तर्क में उपयोग)

विकिरण सुरक्षा के तीन मूल सिद्धांत:

  1. समय: रेडियोधर्मी स्रोत के पास बिताया समय कम से कम करें। खुराक ∝ समय।
  2. दूरी: स्रोत से अधिकतम दूरी रखें। खुराक ∝ 1/दूरी²।
  3. परिरक्षण: उचित परिरक्षण सामग्री: अल्फा — कागज/त्वचा; बीटा — पतला एल्युमीनियम; गामा/X-ray — सीसा, कंक्रीट।

विकिरण दुर्घटनाएँ और सबक:

  • चेर्नोबिल (1986): ग्रेफाइट-मॉडरेटेड RBMK रिएक्टर डिजाइन दोष + ऑपरेटर त्रुटि → भाप विस्फोट → रेडियोधर्मी आग। ~30 प्रत्यक्ष मृत्यु; यूक्रेन, बेलारूस, रूस में दीर्घकालिक थायरॉइड कैंसर में वृद्धि।
  • फुकुशिमा (2011): सुनामी ने शीतलन अक्षम किया → हाइड्रोजन विस्फोट → रेडियोधर्मी रिसाव। कोई प्रत्यक्ष विकिरण मृत्यु नहीं, किन्तु बड़े पैमाने पर निकासी।
  • सबक: निष्क्रिय सुरक्षा प्रणालियाँ (बाह्य बिजली के बिना शीतलन), मजबूत परिरोधन, पारदर्शी आपात प्रोटोकॉल।