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अर्थशास्त्र

आदर्श उत्तर रूपरेखा

ग्रामीण विकास, पंचायती राज, राज्य वित्त आयोग

पेपर I · इकाई 2 अनुभाग 10 / 14 0 PYQ 35 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

आदर्श उत्तर रूपरेखा

5 अंक उत्तर टेम्पलेट A (50 शब्द)

प्रश्न: राजस्थान में त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की संरचना और निधि वितरण सूत्र क्या है?

आदर्श उत्तर: राजस्थान का पंचायती राज (अधिनियम 1994) तीन स्तरों पर: 33 जिला परिषद (जिला), 365 पंचायत समितियाँ (ब्लॉक), 11,194 ग्राम पंचायतें (ग्राम)। 6वें SFC विकेंद्रीकरण के अंतर्गत निधि वितरण: ग्राम पंचायत 75%, पंचायत समिति 20%, जिला परिषद 5% — जमीनी शासन को प्राथमिकता।

शब्द बजट: संरचना + संख्याएं (25 शब्द) + निधि अनुपात (15 शब्द) + सिद्धांत (10 शब्द) = 50 शब्द


5 अंक उत्तर टेम्पलेट B (50 शब्द)

प्रश्न: राजस्थान पंचायती राज संशोधन 2026 क्या था और इसका क्या महत्व था?

आदर्श उत्तर: राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 (8-9 मार्च 2026 पारित) ने 1994 अधिनियम की धारा 19 हटाई — 31 वर्षीय दो-बच्चा मानदंड जो 1995 में लागू हुआ था। कुष्ठ रोग-आधारित अयोग्यता भी हटाई। 11,194 ग्राम पंचायतों में लोकतांत्रिक भागीदारी व्यापक हुई।

शब्द बजट: क्या (15 शब्द) + संशोधित धारा (15 शब्द) + ऐतिहासिक नोट (10 शब्द) + महत्व (10 शब्द) = 50 शब्द


5 अंक उत्तर टेम्पलेट C (50 शब्द)

प्रश्न: राज्य वित्त आयोग क्या है और राजस्थान में इसकी क्या भूमिका है?

आदर्श उत्तर: राज्य वित्त आयोग (SFC) संविधान के अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा हर पाँच वर्ष पर गठित होता है। यह पंचायतों को राज्य कर विकेंद्रीकरण की सिफारिश करता है। राजस्थान के 6वें SFC ने 2024-25 में ₹4,000 करोड़ आवंटित किए; 37,394 कार्य पूर्ण; जमीनी वित्तीय स्वायत्तता मजबूत।


10 अंक उत्तर टेम्पलेट (150 शब्द)

प्रश्न: पंचायती राज के संवैधानिक प्रावधानों की चर्चा करें और वित्तीय विकेंद्रीकरण एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के संदर्भ में राजस्थान में उनके क्रियान्वयन का मूल्यांकन करें।

आदर्श उत्तर:

परिचय: 73वें संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायती राज को संवैधानिक बनाने के लिए भाग IX (अनुच्छेद 243–243-O) और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जोड़ी।

प्रमुख बिंदु:

  1. राजस्थान, पंचायती राज लॉन्च करने वाला पहला राज्य (नागौर, 2 अक्टूबर 1959), ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 अधिनियमित किया। राज्य में 33 जिला परिषद, 365 पंचायत समितियाँ, 11,194 ग्राम पंचायतें। महिला आरक्षण 50% तक बढ़ाया (संवैधानिक न्यूनतम 1/3 से अधिक)।

  2. वित्तीय विकेंद्रीकरण दो माध्यमों से: 15वाँ वित्त आयोग (₹2,203.29 करोड़ हस्तांतरित, 42,028 कार्य, 2024-25) और 6वाँ SFC (₹621.07 करोड़ हस्तांतरित, 37,394 कार्य)। निधि अनुपात: GP 75%, PS 20%, ZP 5%।

  3. ग्रामीण विकास: MGNREGS ने 53.28 लाख परिवार नियोजित किए (₹7,676.98 करोड़, अप्रैल–दिसंबर 2024)। स्वामित्व योजना ने 35,955 गाँवों में 6,85,935 संपत्ति पत्ते वितरित किए।

  4. शासन नवाचार: जन सूचना पोर्टल (2019, 280+ योजनाएं), सुनवाई का अधिकार अधिनियम 2012 (भारत का पहला), 2026 संशोधन (31 वर्षीय दो-बच्चा अयोग्यता समाप्त)।

निष्कर्ष: राजस्थान का पंचायती राज संवैधानिक गहराई, प्रगतिशील आरक्षण और महत्वपूर्ण वित्तीय प्रवाह को जोड़ता है — यद्यपि 11वीं अनुसूची के सभी 29 विषयों का प्रभावी विकेंद्रीकरण एक जारी चुनौती बनी है।