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संवैधानिक ढाँचा एवं 73वाँ संशोधन
73वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992
73वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम, जिसे संसद ने 22 दिसंबर 1992 को पारित किया और 24 अप्रैल 1993 से लागू किया, ने संविधान में भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243-O) और 11वीं अनुसूची जोड़ी। इसने पंचायती राज को नीति-निदेशक तत्व (अनुच्छेद 40) से संवैधानिक बाध्यता में बदल दिया।
प्रमुख संवैधानिक प्रावधान:
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 243 | परिभाषाएँ: ग्राम, ग्राम सभा, मध्यवर्ती स्तर, पंचायत, पंचायत क्षेत्र, जनसंख्या, वार्ड |
| 243-A | ग्राम सभा — ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता |
| 243-B | तीन स्तरों पर पंचायत (20 लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों के लिए अनिवार्य) |
| 243-C | पंचायतों की संरचना — सीटें प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाएं |
| 243-D | आरक्षण — SC/ST जनसंख्या अनुपात में; महिलाओं के लिए न्यूनतम 1/3 (राज्य 50% तक बढ़ा सकते हैं) |
| 243-E | कार्यकाल — 5 वर्ष; विघटन के 6 माह के भीतर पुनः चुनाव |
| 243-F | अयोग्यता — राज्य विधि द्वारा निर्धारित |
| 243-G | शक्तियाँ एवं उत्तरदायित्व — 11वीं अनुसूची के 29 विषय |
| 243-H | कर लगाने की शक्ति |
| 243-I | राज्य वित्त आयोग — राज्यपाल द्वारा हर 5 वर्ष |
| 243-J | लेखा एवं लेखापरीक्षा |
| 243-K | राज्य निर्वाचन आयोग — पंचायत चुनावों का अधीक्षण |
| 243-M | कतिपय क्षेत्रों (5वीं अनुसूची, 6वीं अनुसूची) पर भाग लागू नहीं |
| 243-O | चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक |
11वीं अनुसूची में पंचायतों को हस्तांतरित 29 विषय शामिल हैं: कृषि, ग्रामीण आवास, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, सामाजिक वानिकी, पेयजल, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव।
राजस्थान में पूर्व-संशोधन इतिहास:
राजस्थान को गौरव है कि वह स्वतंत्र भारत में पंचायती राज लागू करने वाला पहला राज्य था। 2 अक्टूबर 1959 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर, राजस्थान में पंचायती राज प्रणाली का शुभारंभ किया — बलवंत राय मेहता समिति (1957) की त्रि-स्तरीय संरचना की सिफारिश के आधार पर। यह संवैधानिक अधिदेश से 33 वर्ष पहले की बात है।
अशोक मेहता समिति (1977) ने द्वि-स्तरीय संरचना की सिफारिश की; इसकी सिफारिशें आंशिक रूप से लागू हुईं। G.V.K. राव समिति (1985) और L.M. सिंघवी समिति (1986) ने बाद में संवैधानिक दर्जे के लिए दबाव डाला — जो अंततः 73वें संशोधन से साकार हुआ।
