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राजस्व प्राप्तियाँ: संरचना एवं स्रोत
राजस्व प्राप्तियाँ सरकार की चालू प्राप्तियाँ हैं जो न तो देनदारियाँ बनाती हैं और न ही वित्तीय परिसंपत्तियाँ घटाती हैं। इन्हें दो धाराओं में वर्गीकृत किया जाता है:
- स्वयं राजस्व: राज्य द्वारा स्वयं अर्जित कर एवं गैर-कर राजस्व
- केंद्रीय अंतरण: केंद्र सरकार से हस्तांतरण, अनुदान और CSS वित्त पोषण
A. स्वयं कर राजस्व
2023-24 में राजस्थान का स्वयं कर राजस्व ₹94,086 करोड़ था, सभी मदों में सुदृढ़ वृद्धि:
| कर मद | वृद्धि दर (2023-24) | महत्त्व |
|---|---|---|
| SGST (राज्य GST हिस्सा) | +12.50% | GST कार्यान्वयन (2017) के बाद सबसे बड़ा एकल राजस्व मद |
| स्टांप एवं पंजीकरण | +12.12% | रियल एस्टेट गतिविधि और सर्किल रेट संशोधन से प्रेरित |
| विद्युत शुल्क | +11.16% | बढ़ती बिजली खपत, औद्योगिक वृद्धि |
| वाहन कर | +9.39% | विस्तारित वाहन बेड़ा, दो-पहिया वाहन प्रवेश |
| राज्य आबकारी | सकारात्मक | मदिरा राजस्व — राजनीतिक रूप से संवेदनशील परंतु राजकोषीय रूप से महत्त्वपूर्ण |
| पेट्रोलियम पर VAT | सकारात्मक | ATF, प्राकृतिक गैस पर GST के बाद राज्य VAT बरकरार |
स्रोत: राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26, अध्याय 1 — राजकोषीय प्रबंधन
SGST संदर्भ
वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था (1 जुलाई 2017) के अंतर्गत, राज्यों को तीन धाराएँ प्राप्त होती हैं:
- SGST: राज्य-आंतरिक आपूर्ति पर 50% हिस्सा
- IGST आवंटन: अंतर-राज्यीय संग्रहण में हिस्सा
- GST क्षतिपूर्ति (अब समाप्त): 2015-16 आधार पर 14% गारंटीड वृद्धि, जून 2022 तक उपलब्ध
क्षतिपूर्ति समाप्ति के बाद, राजस्थान की SGST उत्थान पर निर्भरता GST संग्रहण प्रवृत्तियों को महत्त्वपूर्ण राजकोषीय चर बनाती है। SGST वृद्धि में 1% कमी से लगभग ₹750-900 करोड़ राजस्व हानि होती है।
खनन रॉयल्टी और IGNP जल प्रभार
खनन रॉयल्टी राजस्थान के गैर-कर राजस्व की एक विशिष्ट विशेषता है। राजस्थान चूना पत्थर, संगमरमर, ग्रेनाइट, जस्ता (हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, उदयपुर) और बलुआ पत्थर का भारत का सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य को तेल एवं गैस से भी रॉयल्टी प्राप्त होती है — केयर्न इंडिया / वेदांता का बाड़मेर ब्लॉक लगभग 1.2 लाख बैरल/दिन उत्पादन करता है। रॉयल्टी दरें खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं; 2021 के संशोधनों से दरें बढ़ीं, जिससे राज्यों को लाभ हुआ।
IGNP जल प्रभार: इंदिरा गाँधी नहर परियोजना उत्तर-पश्चिमी राजस्थान (गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर जिले) को सेवा प्रदान करती है। जल प्रभार गैर-कर राजस्व का एक स्रोत है — यद्यपि ऐतिहासिक रूप से O&M लागत की तुलना में कम वसूली होती है।
B. केंद्रीय अंतरण
केंद्रीय अंतरण दूसरा प्रमुख राजस्व स्तंभ है। मुख्य घटक:
| अंतरण प्रकार | आधार | राजस्थान का अनुमानित हिस्सा |
|---|---|---|
| वित्त आयोग हस्तांतरण | 15वाँ वित्त आयोग (2021-26): राजस्थान का हिस्सा = विभाज्य पूल का 5.979% | केंद्रीय करों का ~5.9% |
| GST क्षतिपूर्ति | जून 2022 में समाप्त; FY 2022-23 में बैक-टू-बैक ऋण सुविधा | नियमित अंतरण बंद |
| केंद्र प्रायोजित योजनाएँ (CSS) | केंद्र:राज्य साझेदारी (अधिकांश CSS के लिए 60:40; NE/विशेष के लिए 90:10) | महत्त्वपूर्ण अंतर्वाह |
| केंद्रीय सहायता | विवेकाधीन/मूल योजनाएँ | परिवर्तनशील |
स्रोत: 15वाँ वित्त आयोग रिपोर्ट 2021-26, भारत सरकार
15वाँ वित्त आयोग, जिसकी अध्यक्षता N.K. Singh ने की, ने राज्यों को विभाज्य पूल का 41% हस्तांतरित किया। राजस्थान का 5.979% हिस्सा जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन आवरण और राजस्व क्षमता मानदंडों को प्रतिबिंबित करता है।
कुल राजस्व प्राप्तियों में केंद्रीय अंतरण पर राजस्थान की भारी निर्भरता — लगभग 40-45% — एक अंतरण निर्भरता बनाती है जो राजकोषीय स्वायत्तता को सीमित करती है।
