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आदर्श उत्तर रूपरेखा
5-अंक उत्तर टेम्पलेट (50 शब्द)
प्रश्न: राजस्थान की राजस्व प्राप्तियों के मुख्य स्रोत क्या हैं और 2023-24 में राजकोषीय घाटा क्या था?
आदर्श उत्तर:
राजस्थान की राजस्व प्राप्तियाँ (2023-24): ₹2,03,276 करोड़। स्वयं कर राजस्व (₹94,086 करोड़): SGST (+12.50%), स्टांप एवं पंजीकरण (+12.12%), राज्य आबकारी, वाहन कर। गैर-कर राजस्व: खनन रॉयल्टी (चूना पत्थर, जस्ता, बाड़मेर कच्चा तेल)। केंद्रीय अंतरण: 15वाँ वित्त आयोग हस्तांतरण (5.979% हिस्सा), CSS अनुदान। राजकोषीय घाटा: ₹65,580 करोड़ = GSDP का 4.31%, FRBM लक्ष्य 3% से अधिक।
10-अंक उत्तर टेम्पलेट A (150 शब्द)
प्रश्न: FRBM अनुपालन के संदर्भ में 2023-24 में राजस्थान के राजकोषीय प्रबंधन की समालोचनात्मक समीक्षा करें। राजकोषीय समेकन में संरचनात्मक चुनौतियाँ क्या हैं?
आदर्श उत्तर:
परिचय: राजकोषीय प्रबंधन का अर्थ वैधानिक मानदंडों के अनुसार राज्य राजस्व, व्यय और ऋण का प्रबंधन; राजस्थान का प्राथमिक बेंचमार्क राजस्थान FRBM अधिनियम, 2005 है।
मुख्य बिंदु:
FRBM गैर-अनुपालन: राजकोषीय घाटा ₹65,580 करोड़ = GSDP का 4.31% — 3% FRBM लक्ष्य से अधिक। राजस्व घाटा ₹38,955 करोड़ — चालू व्यय के लिए उधारी। कुल राजकोषीय देनदारियाँ ₹5,71,639 करोड़ = GSDP का 37.57% — 35% सीमा से अधिक। (स्रोत: आर्थिक समीक्षा 2025-26)
प्रतिबद्ध व्यय: वेतन, पेंशन (OPS देनदारी), और ब्याज भुगतान मिलकर ~60% राजस्व व्यय उपभोग — विकास व्यय के लिए राजकोषीय स्थान अत्यंत सीमित।
राजस्व अंतर: स्वयं कर/GSDP ~6.2% — विकसित राज्यों के 8-9% बेंचमार्क से कम। GST के बाद SGST निर्भरता स्वायत्त कर-निर्धारण शक्ति समाप्त करती है।
संरचनात्मक सुधार पथ: विश्व बैंक SPFM परियोजना (US$31 मिलियन) कोषागार प्रबंधन, कर प्रशासन और खरीद दक्षता लक्षित। पूंजी परिव्यय 2023-24 में 34.6% बढ़ा।
निष्कर्ष: राजस्थान के राजकोषीय समेकन के लिए निरंतर स्वयं राजस्व वृद्धि, प्रतिबद्ध व्यय युक्तिकरण और CAPEX दक्षता आवश्यक है।
10-अंक उत्तर टेम्पलेट B (150 शब्द)
प्रश्न: राजस्थान में राज्य वित्त आयोग की क्या भूमिका है? यह स्थानीय निकायों के वित्तीय संसाधन कैसे निर्धारित करता है?
आदर्श उत्तर:
परिचय: राज्य वित्त आयोग (SFC), संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y के अंतर्गत (73वें/74वें संशोधन, 1992), प्रत्येक पाँच वर्ष में राज्य संचित निधि से पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरण की सिफारिश करता है।
मुख्य बिंदु:
संवैधानिक जनादेश: राजस्थान ने 1994 से 6 SFC गठित किए हैं। छठा SFC 2020-25 की अवधि को कवर करता है और तीन-स्तरीय PRI संरचना (11,000+ GPs, 295 PSs, 33 ZPs) और 201 ULBs को राज्य करों, उपयोगकर्ता प्रभारों और अनुदानों के हस्तांतरण के सिद्धांतों की सिफारिश करता है।
हस्तांतरण मानदंड: SFC जनसंख्या, क्षेत्रफल, पिछड़ापन और स्वयं राजस्व प्रयास के आधार पर स्थानीय निकायों के बीच क्षैतिज साझेदारी निर्धारित करता है। निधि अनुपात GP:PS:ZP = 75:20:5।
15वाँ वित्त आयोग पूरक: 15वें FC से राजस्थान के ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को 2021-26 के लिए ~₹12,400 करोड़ बंधित अनुदान — SFC हस्तांतरण को पूरक।
राजकोषीय क्षमता अंतर: SFC हस्तांतरण के बावजूद, PRIs और ULBs अत्यंत निर्भर रहते हैं — स्वयं राजस्व स्थानीय निकाय व्यय के 20% से कम।
निष्कर्ष: विकसित राजस्थान 2047 के अंतर्गत वास्तविक राजकोषीय विकेंद्रीकरण के लिए SFC हस्तांतरण के साथ-साथ स्थानीय निकाय स्वयं-स्रोत राजस्व (संपत्ति कर, व्यवसाय कर) को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
