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समावेशी विकास: अवधारणा, मापन और राजस्थान की रणनीति
समावेशी विकास वह विकास है जिसके लाभ आय वर्गों, क्षेत्रों, लिंगों और सामाजिक वर्गों में न्यायसंगत रूप से वितरित होते हैं। यह सकल विकास से इस अर्थ में अलग है कि यह लाभों के वितरण पर जोर देता है, न केवल उनके आकार पर। UNDP और योजना आयोग का ढाँचा चार आयाम पहचानता है:
- रोज़गार सृजन
- स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुँच
- गरीबी और असमानता में कमी
- क्षेत्रीय संतुलन
प्रति व्यक्ति आय अकेले एक अपर्याप्त कल्याण संकेतक है: समान प्रति व्यक्ति आय वाले दो राज्य यदि Gini गुणांक या स्वास्थ्य परिणामों में अत्यंत भिन्न हों, तो उनके समावेशी विकास के स्तर बिल्कुल अलग होंगे। यह सीमा मानव विकास सूचकांक (HDI) और बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) जैसे समग्र सूचकांकों को प्रेरित करती है।
बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI)
बहुआयामी निर्धनता सूचकांक तीन आयामों — स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर — में 10 संकेतकों का उपयोग करके गरीबी मापता है। कोई परिवार "बहुआयामी रूप से गरीब" है यदि भारित संकेतकों के 33% या अधिक में वंचित हो।
राजस्थान का MPI प्रदर्शन (NFHS डेटा):
| वर्ष | राजस्थान MPI (%) | भारत MPI (%) | तुलना |
|---|---|---|---|
| 2015-16 (NFHS-4) | 28.86 | 24.85 | राष्ट्रीय से 4 pp अधिक |
| 2019-21 (NFHS-5) | 15.31 | 14.96 | अब लगभग बराबर |
| कमी | −13.55 pp (47%) | −9.89 pp (40%) | राजस्थान तेज़ी से घटा |
स्रोत: NFHS-4 (2015-16), NFHS-5 (2019-21); राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2024-25, अध्याय 1 में उद्धृत
राजस्थान ने MPI राष्ट्रीय औसत से तेज़ (47% बनाम 40%) घटाया, जो स्वच्छता, बिजली पहुँच और मातृ स्वास्थ्य में सुधार दर्शाता है। परंतु 15.31% पर, राजस्थान केरल (0.55%) और तमिलनाडु (2.20%) से पीछे है और गुजरात (11.66%), बिहार (33.76%) और UP (22.93%) के समान स्तर पर है।
मानव विकास सूचकांक (HDI)
राजस्थान का HDI लगभग 0.629 (NITI Aayog अनुमान) है, जो राष्ट्रीय औसत 0.645 से कम है। राज्य भारतीय राज्यों में HDI पर 27वें स्थान पर है।
राजस्थान के तीन HDI उप-घटक:
- जीवन प्रत्याशा: 69.4 वर्ष (2016-20, SRS बुलेटिन), राष्ट्रीय औसत 70 से कम
- साक्षरता दर: 66.1% (जनगणना 2011); महिला साक्षरता 52.1% — एक स्थायी संरचनात्मक अंतराल
- शिशु मृत्यु दर (IMR): 41.3 (NFHS-4, 2015-16) से घटकर 30.3 (NFHS-5, 2019-21), अब राष्ट्रीय औसत 35 से कम
- मातृ मृत्यु दर (MMR): 197 प्रति लाख जीवित जन्म (SRS), राष्ट्रीय औसत से अधिक
राजस्थान की समावेशी विकास पहलें
राज्य सरकार की समावेशी विकास रणनीति $350 बिलियन अर्थव्यवस्था लक्ष्य से संरेखित है:
चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना: परिवार को प्रति वर्ष ₹25 लाख तक नकद-रहित उपचार; लगभग 1.3 करोड़ परिवार नामांकित। SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) को संबोधित करती है।
MGNREGS (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना): प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष 100 दिन तक ग्रामीण रोज़गार की गारंटी। राजस्थान ने कार्य-दिवस सृजन में शीर्ष प्रदर्शन किया है। यह योजना SDG-8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक विकास) का सीधा समर्थन करती है।
इंदिरा गांधी शहरी रोज़गार गारंटी योजना (IGEGS): राजस्थान द्वारा शुरू MGNREGS का शहरी समकक्ष — शहरी स्थानीय निकायों में शहरी गरीबों को रोज़गार। सभी ULBs में संचालित एक अग्रणी पहल।
मुख्यमंत्री महिला उद्योग योजना: महिला उद्यमियों के लिए वित्तीय साक्षरता और ऋण पहुँच; SDG-5 (लैंगिक समानता) और SDG-8 को समर्थन।
राजस्थान कौशल विकास मिशन: उद्योग-विशिष्ट व्यावसायिक प्रशिक्षण; शहरी और ग्रामीण युवाओं को औपचारिक रोज़गार में परिवर्तन के लिए कौशल अंतर पाटता है।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): नवंबर 2024 तक संचित DBT ₹3,14,385.88 करोड़; 2024-25 में (दिसंबर तक) ₹27,494.31 करोड़ और 5.71 करोड़ लाभार्थी। DBT सुनिश्चित करता है कि लाभ सीधे प्राप्तकर्ता तक पहुँचे।
वित्तीय समावेशन: सितंबर 2024 तक राजस्थान में 8,531 बैंक शाखाएँ। ऋण-जमा अनुपात 86.92% — राष्ट्रीय औसत 79.32% से अधिक।
