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WTO विवाद निपटान एवं भारत
WTO विवाद निपटान एवं भारत
3.1 विवाद निपटान तंत्र (DSM)
WTO का विवाद निपटान निकाय (DSB) व्यापार विवादों का प्रबंधन करता है। यह WTO का "मुकुट मणि" माना जाता है क्योंकि यह शक्ति-आधारित द्विपक्षीय दबाव की जगह नियम-आधारित बाध्यकारी समाधान प्रदान करता है।
प्रक्रिया:
- परामर्श (60 दिन): विवादी पक्षों को पहले द्विपक्षीय परामर्श करना होता है।
- पैनल (6 माह + 3 माह): परामर्श विफल होने पर 3-सदस्यीय पैनल गठित किया जाता है; पैनल रिपोर्ट जारी करता है।
- अपीलीय निकाय (3 माह): कोई भी पक्ष 7-सदस्यीय अपीलीय निकाय (AB) में अपील कर सकता है; AB रिपोर्ट बाध्यकारी होती है।
- कार्यान्वयन: हारने वाले पक्ष को "उचित समय" (आमतौर पर 15 माह) के भीतर पालन करना होता है।
- प्रतिशोध: गैर-अनुपालन पर विजेता पक्ष WTO-अधिकृत मूल्य के समानुपाती व्यापार प्रतिउपाय लागू कर सकता है।
अपीलीय निकाय संकट:
अमेरिका ने दिसंबर 2019 से सभी नई AB नियुक्तियाँ अवरुद्ध कर दी हैं। अमेरिका का तर्क है कि AB "न्यायिक अतिक्रमण" करता है — पक्षों द्वारा न उठाए गए मुद्दों पर बाध्यकारी निर्णय देता है और 90 दिन के जनादेश से अधिक समय लेता है।
दिसंबर 2019 तक AB में केवल 1 सदस्य बचा (न्यूनतम 3 आवश्यक) — AB अकार्यकारी हो गया। 2024 तक सभी 7 AB सीटें रिक्त हैं।
बहु-पक्षीय अंतरिम अपील मध्यस्थता व्यवस्था (MPIA): 53 WTO सदस्यों (EU, भारत, चीन, ब्राज़ील सहित) ने अनुच्छेद 25 के तहत एक वैकल्पिक अपील तंत्र पर सहमति जताई है। अमेरिका MPIA का हिस्सा नहीं है। यह WTO का अब तक का सबसे गंभीर संस्थागत संकट है।
3.2 WTO में भारत के प्रमुख विवाद
भारत प्रतिवादी के रूप में (भारत को चुनौती दी गई):
- भारत — सौर सेल (DS456): अमेरिका ने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन में घरेलू सामग्री आवश्यकता (DCR) को WTO में चुनौती दी — AB ने 2016 में भारत के विरुद्ध निर्णय दिया।
- भारत — कृषि निर्यात सब्सिडी: अमेरिका ने भारत की विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं (MEIS, EOU, SEZ) को चुनौती दी — कई विवाद जारी हैं।
- भारत — इस्पात सुरक्षा उपाय: EU और जापान ने इस्पात आयात पर भारत के सुरक्षा उपायों को चुनौती दी।
भारत शिकायतकर्ता के रूप में (भारत दूसरों को चुनौती देता है):
- भारत — US धारा 232 इस्पात/एल्युमीनियम: अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा आधार पर इस्पात (25%) और एल्युमीनियम (10%) टैरिफ को WTO में चुनौती — भारत ने $1.91 अरब प्रतिशोध अधिकार माँगा।
- भारत — EU कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM): भारत ने EU के CBAM की WTO-अनुकूलता पर आपत्ति उठाई।
3.3 WTO में भारत की रणनीतिक स्थितियाँ
कृषि: भारत लगातार खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग का बचाव करता है — तर्क है कि MSP और PDS परिचालन WTO सब्सिडी अनुशासनों से मुक्त होने चाहिए। "शांति खंड" अस्थायी सुरक्षा है; भारत स्थायी छूट चाहता है।
TRIPS और दवाओं तक पहुँच: भारत ने पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d) (फार्मास्युटिकल पेटेंट की "एवरग्रीनिंग" रोकना) को सफलतापूर्वक बनाए रखा — सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग की अनुमति देता है। COVID-19 के दौरान भारत WTO में TRIPS छूट का प्रमुख समर्थक था (आंशिक छूट MC12, जून 2022 में सहमत)।
सेवाएँ (GATS मोड 4): भारत का सबसे बड़ा रणनीतिक हित — व्यक्तियों का आवागमन (मोड 4) — भारतीय IT पेशेवर, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, इंजीनियर। भारत विकसित देशों में वीज़ा प्रतिबंधों को ढीला करने की वकालत करता है।
निवेश सुगमता: भारत ने निवेश सुगमता विकास समझौते (IFDA) को बहुपक्षीय व्यवस्था के रूप में वार्ता करने का विरोध किया है — तर्क है कि यह पारदर्शी बहुपक्षीय प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।
संक्षेप में WTO विवाद निपटान की महत्ता:
1995 से अब तक 600+ विवाद दायर; ~200 पूर्ण पैनल/AB कार्यवाही से गुज़रे। भारत WTO के 40+ विवादों में पक्षकार रहा है। AB संकट के बावजूद, MPIA के माध्यम से 53 सदस्य विवाद निपटान जारी रख रहे हैं। यह WTO की नियम-आधारित प्रणाली की ताकत और कमज़ोरियों दोनों को दर्शाता है।
