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विश्व व्यापार संगठन — संरचना एवं कार्य
विश्व व्यापार संगठन (WTO) — संरचना एवं कार्य
2.1 पृष्ठभूमि — GATT से WTO तक
GATT (सामान्य टैरिफ एवं व्यापार समझौता, 1947): यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता था — कोई औपचारिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन नहीं — जिस पर जिनेवा में 23 देशों ने हस्ताक्षर किए। GATT ने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए 8 वार्ता दौर आयोजित किए। सबसे महत्त्वपूर्ण था उरुग्वे दौर (1986-1994), जिसने WTO की स्थापना करने वाले मारकेश समझौते को जन्म दिया।
उरुग्वे दौर की उपलब्धियाँ:
- WTO को औपचारिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में स्थापित किया (GATT की अनौपचारिक संरचना की जगह)
- कृषि और वस्त्र को बहुपक्षीय नियमों के अंतर्गत लाया (पहले ये बाहर थे)
- व्यापार-संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार (TRIPS) समझौता बनाया
- व्यापार-संबंधी निवेश उपाय (TRIMS) समझौता बनाया
- सेवाओं में सामान्य समझौता (GATS) स्थापित किया
- बाध्यकारी निर्णयों और अपीलीय निकाय के साथ विवाद निपटान प्रणाली बनाई
2.2 WTO — मुख्य तथ्य
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | 1 जनवरी 1995 |
| पूर्ववर्ती | GATT 1947 (8 दौर; 1947-1994) |
| मुख्यालय | जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड |
| महानिदेशक | न्गोज़ी ओकोन्जो-इवेला (नाइजीरिया) — मार्च 2021 से; प्रथम अफ्रीकी और प्रथम महिला महानिदेशक |
| सदस्य | 166 (2024 तक) |
| पर्यवेक्षक देश | 25 (जिनमें ईरान, इराक शामिल; 5 वर्षों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करनी होगी) |
| भारत की स्थिति | संस्थापक सदस्य; G-20 और G-33 गठबंधनों में सक्रिय |
| बजट | लगभग CHF 197 मिलियन/वर्ष |
| प्रशासित समझौते | 16 बहुपक्षीय + 2 बहु-पक्षीय |
2.3 WTO के मूल सिद्धांत
1. सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) सिद्धांत (GATT अनुच्छेद I, GATS अनुच्छेद II):
एक WTO सदस्य द्वारा किसी अन्य सदस्य को दी गई कोई भी व्यापार रियायत तुरंत और बिना शर्त सभी अन्य WTO सदस्यों तक विस्तारित होनी चाहिए। व्यापारिक भागीदारों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता।
- MFN के अपवाद: मुक्त व्यापार समझौते (FTA), सीमा शुल्क संघ, विकासशील देशों के लिए सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP), राष्ट्रीय सुरक्षा (GATT अनुच्छेद XXI)
2. राष्ट्रीय उपचार (GATT अनुच्छेद III, GATS अनुच्छेद XVII):
बाज़ार में प्रवेश के बाद विदेशी वस्तुओं, सेवाओं या सेवा प्रदाताओं के साथ घरेलू के समतुल्य से कम अनुकूल व्यवहार नहीं होना चाहिए। घरेलू विनियामक भेदभाव को रोकता है।
3. बिना भेदभाव के व्यापार:
MFN + राष्ट्रीय उपचार मिलकर एक गैर-भेदभावपूर्ण व्यापारिक वातावरण बनाते हैं।
4. पारस्परिकता:
व्यापार रियायतों की वार्ता पारस्परिक आधार पर होती है — तुम अपने टैरिफ कम करो, बदले में अन्य देश अपने कम करेंगे।
5. पारदर्शिता:
सदस्यों को अपनी व्यापार नीतियों, नियमों और टैरिफ परिवर्तनों की WTO को सूचना देनी होती है; WTO प्रत्येक सदस्य की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) करता है।
6. विकासशील देशों के लिए विशेष एवं विभेदक व्यवहार (S&DT):
विकासशील देशों और अल्प-विकसित देशों (LDC) को अधिक लचीलापन मिलता है — लंबे कार्यान्वयन समय, कम टैरिफ कटौती प्रतिबद्धताएँ और तकनीकी सहायता। भारत लगातार मजबूत S&DT प्रावधानों के पक्ष में तर्क देता है।
2.4 WTO के प्रमुख समझौते
वस्तुओं पर:
- GATT 1994: मूल वस्तु व्यापार नियम — टैरिफ बंधन, गैर-भेदभाव, MFN
- कृषि समझौता (AoA): घरेलू समर्थन, बाज़ार पहुँच, निर्यात सब्सिडी पर अनुशासन; भारत का मुख्य हित — न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की छूट
- वस्त्र एवं परिधान समझौता (ATC): बहु-रेशा व्यवस्था (MFA) कोटा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया
- सब्सिडी और प्रतिपूरक उपाय समझौता (ASCM): प्रतिबंधित (निर्यात सब्सिडी), कार्रवाई योग्य और गैर-कार्रवाई योग्य सब्सिडी की परिभाषा
- डंपिंग-विरोधी समझौता: जब डंपिंग (लागत से कम पर निर्यात) से भौतिक नुकसान हो तो डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की अनुमति
सेवाओं पर:
- GATS (सेवाओं में सामान्य समझौता): 4 मोड — मोड 1 (सीमा-पार — जैसे कॉल सेंटर), मोड 2 (विदेश में उपभोग — जैसे चिकित्सा पर्यटन), मोड 3 (वाणिज्यिक उपस्थिति — जैसे विदेशी बैंक शाखाएँ), मोड 4 (व्यक्तियों का आवागमन — जैसे विदेश में IT पेशेवर)
बौद्धिक संपदा पर:
- TRIPS: न्यूनतम IP सुरक्षा मानक — पेटेंट (20 वर्ष), कॉपीराइट, ट्रेडमार्क। भारत ने पेटेंट अधिनियम की धारा 3(d) (एवरग्रीनिंग रोकना और अनिवार्य लाइसेंसिंग) बनाए रखी — सस्ती जेनेरिक दवाओं के लिए महत्त्वपूर्ण।
दोहा दौर (2001 से):
- दोहा विकास एजेंडा (DDA) — नवंबर 2001, दोहा, कतर में शुरू
- लक्ष्य: विकास-अनुकूल व्यापार सुधार — धनी देशों में कृषि सब्सिडी कम करना, विकासशील देशों के लिए बाज़ार पहुँच में सुधार
- स्थिति: 2008 से प्रभावी रूप से ठप — कृषि आयातों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM) पर US-भारत मतभेद
- प्रमुख भारत-WTO टकराव: बाली MC9 (2013) में भारत ने TFA को अवरुद्ध किया — सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग का स्थायी समाधान माँगा। समझौता: "शांति खंड" — खाद्य सुरक्षा सब्सिडी को चुनौती नहीं (TFA 2017 में अनुसमर्थित)।
