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संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न 1 (5 अंक — 50 शब्द): SDR क्या है? IMF द्वारा 2021 में किए गए SDR आवंटन की व्याख्या करें।
आदर्श उत्तर:
SDR (विशेष आहरण अधिकार) IMF द्वारा 1969 में सृजित अंतर्राष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है — यह स्वयं मुद्रा नहीं, IMF सदस्यों की मुद्राओं पर एक दावा है। SDR टोकरी: USD (43.38%), EUR (29.31%), RMB (12.28%), JPY (7.59%), GBP (7.44%)। अगस्त 2021 में IMF ने SDR 456.5 अरब ($650 अरब) — इतिहास का सबसे बड़ा SDR आवंटन — सभी 190 सदस्यों को IMF कोटा अनुपात में COVID-19 उबरने हेतु वैश्विक तरलता बढ़ाने के लिए दिया। भारत को SDR 12.57 अरब (~$17.86 अरब) प्राप्त हुए, जो RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में जमा किए गए।
प्रश्न 2 (5 अंक — 50 शब्द): WTO का सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) सिद्धांत क्या है? कोई दो अपवाद बताइए।
आदर्श उत्तर:
MFN (सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र) सिद्धांत (GATT अनुच्छेद I): एक WTO सदस्य द्वारा दूसरे को दी गई कोई भी व्यापार रियायत तुरंत और बिना शर्त सभी WTO सदस्यों को दी जानी चाहिए — व्यापार भेदभाव पूर्णतः वर्जित। इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एकरूपता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित होता है।
दो प्रमुख अपवाद:
- क्षेत्रीय व्यापार समझौते (FTA/सीमा शुल्क संघ) — GATT अनुच्छेद XXIV के तहत, यदि लगभग सभी व्यापार शामिल हो (जैसे ASEAN FTA, EU)।
- सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP) — विकसित देश "सक्षमकारी खंड" के तहत विकासशील देशों को MFN विस्तार के बिना कम टैरिफ दे सकते हैं।
प्रश्न 3 (5 अंक — 50 शब्द): दोहा विकास एजेंडा (DDA) क्या है? यह क्यों अवरुद्ध हो गया?
आदर्श उत्तर:
दोहा विकास एजेंडा (DDA) WTO का बहुपक्षीय व्यापार वार्ता दौर है — नवंबर 2001, दोहा, कतर में शुरू हुआ। इसका लक्ष्य था: विकास-अनुकूल व्यापार सुधार — धनी देशों में कृषि सब्सिडी कटौती और विकासशील देशों के लिए बाज़ार पहुँच सुधार।
2008 से प्रभावी रूप से ठप होने के मुख्य कारण:
- कृषि आयातों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM) पर US-भारत गतिरोध — भारत गरीब किसानों की रक्षा चाहता था।
- EU की कृषि सब्सिडी कटौती में अनिच्छा।
- उत्तर-दक्षिण विभाजन — विकसित बनाम विकासशील देशों के हित।
भारत का मत: खाद्य सुरक्षा और आजीविका संरक्षण बाज़ार खोलने से पहले आवश्यक।
प्रश्न 4 (5 अंक — 50 शब्द): IBRD और IDA क्या हैं? इनमें अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर:
दोनों विश्व बैंक समूह की संस्थाएँ हैं।
IBRD (1944): मध्य-आय और साख-योग्य देशों को बाज़ार दर के करीब (~4-5%) ऋण देता है; 189 सदस्य; बॉन्ड बाज़ारों से स्व-वित्तपोषित।
IDA (1960): विश्व के 74 सबसे गरीब देशों को अत्यंत रियायती शर्तों पर ऋण — 25-40 वर्ष परिपक्वता, 5-10 वर्ष अनुग्रह अवधि, ~0.75% सेवा शुल्क (ब्याज शून्य); धनी देशों की पुनःपूर्ति से वित्त।
प्रमुख अंतर: IBRD — बाज़ार दरें, मध्य-आय; IDA — रियायती, सबसे गरीब। भारत 2014 में IDA से स्नातक — अब IBRD से ऋण (सक्रिय पोर्टफोलियो ~$25 अरब)।
प्रश्न 5 (10 अंक — 150 शब्द): वैश्विक मौद्रिक प्रणाली में IMF की भूमिका की विवेचना कीजिए। इसके सामने क्या चुनौतियाँ हैं?
आदर्श उत्तर:
IMF (1944 में ब्रेटन वुड्स, 1947 से परिचालन) वैश्विक मौद्रिक प्रणाली का आधार है — 190 सदस्य देशों के साथ तीन मूल कार्य करता है:
कार्य 1 — निगरानी: वार्षिक अनुच्छेद IV परामर्श; द्विवार्षिक WEO (वैश्विक वृद्धि अनुमान); GFSR; राजकोषीय मॉनिटर। अप्रैल 2025 WEO: वैश्विक वृद्धि 2.8%, भारत 6.2%।
कार्य 2 — वित्तीय सहायता: BoP संकट में ऋण — SBA, EFF, PRGT, RST। COVID-19 में $290 अरब आपातकालीन वित्त (94 देश, 2020-21); अगस्त 2021 में $650 अरब SDR आवंटन (इतिहास का सबसे बड़ा)। भारत: 1981 में $5.8 अरब EFF; 1991 में सोना गिरवी (शीघ्र लौटाया); 1993 से IMF कार्यक्रम-मुक्त।
कार्य 3 — तकनीकी सहायता: कर नीति, PFM, मौद्रिक ढाँचा। भारत को GST कार्यान्वयन में IMF की विशेषज्ञता-साझाकरण मिली।
SDR: IMF की आरक्षित संपत्ति — 5 मुद्राओं की टोकरी। भारत का कोटा: SDR 13,114 मिलियन (2.75%, 13वाँ)।
चुनौतियाँ:
- शासन घाटा: अमेरिका-यूरोप अधिक प्रतिनिधित्व (16.5% अमेरिकी वोट, वीटो); भारत-चीन की आर्थिक हिस्सेदारी के अनुपात में कम कोटा।
- चीन की समानांतर प्रणाली: BRI ($1+ ट्रिलियन ऋण), AIIB, NDB — IMF की केंद्रीय भूमिका कम कर रहे हैं।
- ऋण संकट ढाँचे की कमज़ोरी: G20 सामान्य ढाँचा धीमा — ज़ाम्बिया पुनर्गठन में 3 वर्ष लगे; IMF निजी लेनदारों/चीन को बाध्य नहीं कर सकता।
- जलवायु वित्त की अपर्याप्तता: RST (SDR 40 अरब) UNCTAD के अनुसार 2030 तक आवश्यक $2.4 ट्रिलियन/वर्ष से बहुत कम।
- शर्तीयता विवाद: IMF की राजकोषीय मितव्ययता शर्तें — श्रीलंका, पाकिस्तान, अर्जेंटीना में विकास-विरोधी आलोचना।
प्रश्न 6 (10 अंक — 150 शब्द): वैश्विक व्यापार को विनियमित करने में WTO की भूमिका समझाइए। अपीलीय निकाय संकट का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।
आदर्श उत्तर:
WTO (1 जनवरी 1995, GATT 1947 का उत्तराधिकारी) — 166 सदस्यों और $33 ट्रिलियन व्यापार के साथ बहुपक्षीय व्यापार का मुख्य ढाँचा।
WTO की भूमिकाएँ:
नियम-निर्माण: 16 बहुपक्षीय समझौते — GATT 1994 (वस्तुएँ), GATS (सेवाएँ), TRIPS (IP)। MFN + राष्ट्रीय उपचार — गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार सुनिश्चित। व्यापार नीति समीक्षा तंत्र (TPRM) से पारदर्शिता।
वार्ता मंच: दोहा दौर (2001; ठप 2008); TFA (2017) — सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ सरल, व्यापार लागत 14.3% कम।
विवाद निपटान: "मुकुट मणि" — 600+ विवाद दायर; बाध्यकारी नियम-आधारित समाधान।
भारत की भूमिका: G-20, G-33, NAMA-11 गठबंधन में सक्रिय; MSP खाद्य सुरक्षा (शांति खंड); US धारा 232 को चुनौती; Mode 4 सेवा उदारीकरण की पैरवी।
AB संकट — आलोचनात्मक विश्लेषण:
पृष्ठभूमि: AB — विवाद निपटान की समझ के तहत 7-सदस्यीय अपील निकाय। निर्णय बाध्यकारी।
US की स्थिति: 2017 से नई नियुक्तियाँ अवरुद्ध — तर्क: "न्यायिक अतिक्रमण" (नए दायित्व सृजन), 90-दिन की समय-सीमा उल्लंघन।
प्रभाव: दिसंबर 2019 से 1 सदस्य (3 न्यूनतम) — AB निष्क्रिय। 2024 में सभी 7 सीटें रिक्त। 30+ मामले "भूत अपील" में निलंबित।
MPIA (अस्थायी समाधान): 53 WTO सदस्य (EU, भारत, चीन, ब्राज़ील) — वैकल्पिक मध्यस्थता (अनुच्छेद 25)। US शामिल नहीं।
आलोचनात्मक मूल्यांकन: AB संकट WTO की प्रवर्तन शक्ति को मूलतः कमज़ोर करता है। US की एकपक्षवाद (धारा 232, धारा 301) WTO ढाँचे को कमज़ोर करती है। यदि AB बहाल नहीं, WTO केवल वार्ता मंच बनकर रह जाएगा — शक्तिहीन। भारत का मत: AB में सुधार हो (US की 90-दिन और मिसाल संबंधी चिंताएँ दूर की जाएँ), परित्याग नहीं — नियम-आधारित प्रणाली भारत जैसे बड़े व्यापारिक देश के हित में।
