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अर्थशास्त्र

परिचय — ब्रेटन वुड्स व्यवस्था और चुनौतियाँ

वैश्विक आर्थिक मुद्दे: विश्व व्यापार संगठन, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भूमिकाएँ

पेपर I · इकाई 2 अनुभाग 2 / 11 0 PYQ 36 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

परिचय — ब्रेटन वुड्स व्यवस्था और चुनौतियाँ

परिचय — ब्रेटन वुड्स व्यवस्था और चुनौतियाँ

समकालीन वैश्विक आर्थिक ढाँचा तीन स्तंभों पर टिका है जिन्हें ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (जुलाई 1944), न्यू हैम्पशायर, अमेरिका में स्थापित किया गया था: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक (मूलतः IBRD), और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन (जो बाद में GATT और फिर WTO बना)। इन तीनों का उद्देश्य था कि 1930 के दशक की महामंदी की आर्थिक अव्यवस्था और व्यापार युद्धों की पुनरावृत्ति न हो।

ब्रेटन वुड्स प्रणाली (1944-1971):

  • सभी मुद्राएँ अमेरिकी डॉलर से जुड़ी (pegged) थीं, जो स्वयं $35/औंस की दर से सोने से जुड़ा था
  • IMF अल्पकालिक भुगतान-संतुलन (BoP) सहायता प्रदान करता था
  • विश्व बैंक द्वितीय विश्व युद्ध पश्चात् यूरोप के पुनर्निर्माण और विकास का वित्तपोषण करता था
  • अगस्त 1971 में अमेरिका ने डॉलर-सोने की परिवर्तनीयता निलंबित कर दी (निक्सन शॉक) — जिससे स्थिर विनिमय दर प्रणाली ध्वस्त हो गई और आज की प्रबंधित तैरती विनिमय दर व्यवस्था अस्तित्व में आई।

ब्रेटन वुड्स के बाद की चुनौतियाँ:
वर्तमान प्रणाली इन दबावों से गुज़र रही है:

  • (क) IMF/विश्व बैंक के शासन में अमेरिकी वर्चस्व बनाम चीन और अन्य उभरती शक्तियों का उदय
  • (ख) WTO के अपीलीय निकाय (AB) का संकट, जिसने विवाद निपटान को लकवाग्रस्त कर दिया है
  • (ग) चीन की समानांतर संस्थाएँ (AIIB, NDB, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव)
  • (घ) जलवायु वित्त की कमी
  • (ङ) विकासशील देशों पर ऋण संकट

RAS 2026 के लिए महत्त्व: विषय 30 वर्ष 2021 (विश्व बैंक जलवायु कार्य योजना) और 2013 (WTO व्यापार प्रश्न) में आया था। 2026 के लिए ताज़े विषय हैं: WTO AB संकट, IMF का $650 अरब SDR आवंटन (2021), विश्व बैंक का इवोल्यूशन रोडमैप (2023), IDA20 वार्ता में भारत की भूमिका, और G20 सामान्य ढाँचे के अंतर्गत वैश्विक ऋण पुनर्गठन।

वैश्विक आर्थिक संस्थाओं की उत्पत्ति और विकास — प्रमुख घटनाएँ:

वर्ष घटना
1944 ब्रेटन वुड्स सम्मेलन — IMF और विश्व बैंक (IBRD) की स्थापना
1945 IMF और विश्व बैंक परिचालन शुरू; भारत संस्थापक सदस्य
1947 GATT — 23 संस्थापक सदस्य
1956 IFC की स्थापना (निजी क्षेत्र के लिए)
1960 IDA की स्थापना (सबसे गरीब देशों के लिए रियायती ऋण)
1966 ADB की स्थापना — मुख्यालय मनीला
1971 निक्सन शॉक — USD-सोना परिवर्तनीयता निलंबित; ब्रेटन वुड्स पतन
1994 मारकेश समझौता — WTO की स्थापना (1 जनवरी 1995 से प्रभावी)
2016 AIIB परिचालन; NDB (BRICS बैंक) परिचालन
2021 सबसे बड़ा SDR आवंटन: सभी IMF सदस्यों को $650 अरब

इस विषय को समझने के लिए ध्यान रखें कि IMF, विश्व बैंक और WTO — तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं। IMF मौद्रिक स्थिरता देखता है, विश्व बैंक विकास वित्त प्रदान करता है, और WTO व्यापार नियमों को नियंत्रित करता है। भारत तीनों का संस्थापक सदस्य है और तीनों में सक्रिय भूमिका निभाता है।