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बेरोज़गारी — प्रकार, मापन और योजनाएँ
5.1 भारत में बेरोज़गारी के प्रकार
1. प्रकट/खुली बेरोज़गारी: सक्रिय रूप से काम की तलाश कर रहे हैं पर पा नहीं रहे — PLFS (Periodic Labour Force Survey) द्वारा मापा जाता है
2. प्रच्छन्न बेरोज़गारी (अल्प-रोजगार): किसी काम के लिए आवश्यकता से अधिक कामगार — भारतीय कृषि में सामान्य; अतिरिक्त कामगारों की सीमांत उत्पादकता शून्य के करीब है
3. मौसमी बेरोज़गारी: कृषि कामगार ऑफ-सीज़न (कई राज्यों में 6 महीने) में बेरोज़गार
4. संरचनात्मक बेरोज़गारी: कौशल बेमेल — पुराने कौशल वाले कामगार बदलती अर्थव्यवस्था में नौकरी नहीं पाते; विशेष रूप से प्रासंगिक जब भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण कर रहा है
5. चक्रीय बेरोज़गारी: आर्थिक मंदी के दौरान माँग-न्यून बेरोज़गारी
6. घर्षणात्मक बेरोज़गारी: नौकरियों के बीच सामान्य बेरोज़गारी, जो नौकरी खोज के समय के कारण होती है
7. शिक्षित बेरोज़गारी: डिग्रीधारियों में बेरोज़गारी — भारत-विशिष्ट विरोधाभास जहाँ उच्च शिक्षा कभी-कभी उपलब्ध नौकरियों में रोजगार क्षमता कम कर देती है
5.2 श्रम बाजार डेटा (PLFS 2023-24)
Periodic Labour Force Survey (PLFS) NSSO का त्रैमासिक सर्वेक्षण (शहरी) और वार्षिक सर्वेक्षण (ग्रामीण+शहरी) है। प्रमुख मेट्रिक्स:
| संकेतक | मूल्य (2023-24) |
|---|---|
| श्रमबल भागीदारी दर (LFPR) | 55.2% |
| कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) | 52.2% |
| बेरोज़गारी दर (UR) | 5.1% (अखिल भारतीय) |
| शहरी बेरोज़गारी दर | 6.7% |
| ग्रामीण बेरोज़गारी दर | 5.8% |
| महिला LFPR | 41.7% (2017-18 में 23% से सुधरी) |
| युवा बेरोज़गारी (15-29 वर्ष) | ~17-18% |
प्रमुख सुधार: LFPR 49.8% (2017-18) से बढ़कर 55.2% (2023-24) हुई — मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार और MGNREGS के माध्यम से महिला LFPR सुधार के कारण।
5.3 रोजगार योजनाएँ
MGNREGS (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme):
- MGNREGA 2005 के तहत अधिनियमित — काम का कानूनी अधिकार
- प्रति ग्रामीण परिवार प्रति वर्ष 100 दिन का अकुशल कार्य
- यदि 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया गया → बेरोज़गारी भत्ता दिया जाता है
- कार्य जल संरक्षण, भूमि विकास, ग्रामीण संपर्क पर केंद्रित
- FY2024-25 डेटा: 2.98 अरब व्यक्ति-दिवस; 57% महिला श्रमिक; ₹86,000 करोड़ बजट (2025-26)
- मजदूरी दरें: राज्य-वार न्यूनतम वेतन अधिसूचित; FY2024-25 में ₹267 (बिहार) से ₹374 (हरियाणा) प्रति दिन
PM Garib Kalyan Rozgar Abhiyan (2020): COVID-19 के दौरान वापस आए प्रवासी श्रमिकों के लिए आपातकालीन रोजगार — ₹50,000 करोड़, 6 राज्यों के 25 जिलों में रोजगार सृजित।
PM Employment Generation Programme (PMEGP):
- सूक्ष्म उद्यमों (विनिर्माण + सेवा) के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी
- सब्सिडी: परियोजना लागत का 15-35% (ग्रामीण, SC/ST, महिलाओं के लिए अधिक)
- लक्ष्य: ₹35 लाख करोड़ परियोजनाएँ वित्त पोषित; 8 लाख उद्यम/वर्ष; 2008 से 64 लाख नौकरियाँ सृजित
Atmanirbhar Bharat Rojgar Yojana (ABRY):
- EPFO-आधारित प्रोत्साहन — सरकार नई नियुक्तियों के लिए 2 वर्ष तक नियोक्ता + कर्मचारी दोनों के EPFO अंशदान (मजदूरी का 24%) का भुगतान करती है
- 1.52 लाख प्रतिष्ठानों के माध्यम से 1.31 करोड़ कर्मचारियों को लाभ (2020-22)
PM Internship Scheme (बजट 2024-25):
- 5 वर्षों में 500 शीर्ष कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप
- ₹5,000/माह वजीफा (कंपनी ₹4,500 + सरकार ₹500)
- कंपनियाँ CSR फंड से प्रशिक्षण लागत वहन करती हैं
