सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
बैंकिंग क्षेत्र — संरचना और NPA संकट
4.1 भारत की बैंकिंग संरचना
| बैंक प्रकार | संख्या | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| सार्वजनिक क्षेत्र बैंक (PSBs) | 12 | SBI, PNB, Bank of Baroda, Canara Bank, Union Bank |
| निजी क्षेत्र बैंक | 21 | HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra, IndusInd |
| विदेशी बैंक | 45 | Citibank, Standard Chartered, HSBC, DBS, Deutsche Bank |
| लघु वित्त बैंक | 12 | AU, Equitas, Ujjivan, Jana, Suryoday |
| भुगतान बैंक | 6 | India Post Payments Bank, Airtel Payments Bank, Fino, Jio |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | 43 | PSBs प्रायोजित; ग्रामीण केंद्रित; 2004 में 196 से समेकित |
| शहरी सहकारी बैंक | ~1,500 | राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप से नियमित |
SBI का प्रभुत्व: भारतीय स्टेट बैंक की कुल संपत्ति ₹61 लाख करोड़ (2024) — भारत का सबसे बड़ा बैंक। SBI नेटवर्क: 22,000+ शाखाएँ, 65,000+ ATM, 500+ मिलियन ग्राहक खाते।
4.2 NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ) संकट — दोहरी तुलन पत्र समस्या
NPA क्या है? जब मूलधन या ब्याज भुगतान 90 दिनों से अधिक समय से बकाया हो तो ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन जाता है। IRAC (आय पहचान और परिसंपत्ति वर्गीकरण) मानकों के तहत NPAs को वर्गीकृत किया जाता है:
- अवमानक: 12 माह से कम समय के लिए NPA
- संदिग्ध: 12–36 माह के लिए NPA
- हानि: अवसूल्य NPA
संकट का पैमाना (2012–2018): भारत का सकल NPA अनुपात 3.4% (2012) से बढ़कर 11.5% (मार्च 2018) हो गया। संकट के कारण:
- 2006-2012 अवसंरचना बूम (बिजली, दूरसंचार, इस्पात, सड़क) के दौरान आक्रामक ऋण
- बुरे ऋण छिपाने के लिए पुनर्गठन — "बढ़ाओ और नाटक करो"
- जानबूझकर चूककर्ता (विजय माल्या, नीरव मोदी) भागे
- प्रवर्तक गठबंधन — संबंधित-पक्ष ऋण
"दोहरी तुलन पत्र समस्या" (आर्थिक सर्वेक्षण 2017): कॉर्पोरेट तुलन पत्र (अत्यधिक लीवरेज्ड फर्में) और बैंक तुलन पत्र (उच्च NPA) दोनों एक साथ दबाव में थे, जिससे ऋण माँग-आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हुई।
4.3 NPA समाधान तंत्र
कानूनी ढाँचा:
- SARFAESI अधिनियम 2002 — बैंकों को NPA वर्गीकरण के 60 दिनों के भीतर न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना सुरक्षित संपत्तियों की नीलामी की अनुमति देता है। संपत्ति वसूली में तेजी आई।
- ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRTs) — ऋण वसूली अधिनियम 1993 के तहत स्थापित; बैंक वसूली मामलों के लिए देश भर में 33 DRTs।
- परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियाँ (ARCs) — बैंकों से NPAs छूट पर खरीदकर वसूली का प्रयास करती हैं। ARCIL सबसे बड़ी है।
- दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) 2016 — ऐतिहासिक सुधार। समय-सीमित (180 दिन, 270 दिन तक विस्तार) कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया। NCLT अधिनिर्णय प्राधिकरण है। ऋणदाता समिति (CoC) समाधान योजना तय करती है।
IBC प्रभाव (2016–2024):
- लेनदारों को ₹3.3 लाख करोड़ प्राप्त
- IBC के तहत वसूली दर: ~31-32 पैसे प्रति रुपया (पुरानी व्यवस्था में 5-8% की तुलना में)
- बड़े मामले: Essar Steel (Arcelor Mittal अधिग्रहण, ₹42,000 करोड़), Bhushan Steel (Tata Steel, ₹35,000 करोड़)
पुनर्पूंजीकरण: सरकार ने पूंजी पर्याप्तता बहाल करने के लिए PSBs में बजट आवंटन और पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के माध्यम से ₹3.12 लाख करोड़ (2015-2021) डाले।
