सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
सार्वजनिक ऋण — संरचना एवं प्रबंधन
5.1 सार्वजनिक ऋण का वर्गीकरण
आंतरिक ऋण:
- बाजार ऋण: सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs) — दिनांकित प्रतिभूतियाँ, ट्रेजरी बिल (91, 182, 364-दिन), नकद प्रबंधन बिल
- लघु बचत के विरुद्ध प्रतिभूतियाँ: PPF, NSC, SCSS — सरकार डाकघरों के माध्यम से परिवारों से उधार लेती है
- भविष्य निधि: EPF, GPF — सरकार को उधार दी गई अनिवार्य बचत
- आरक्षित निधि और जमा: सरकारी संस्थाओं का संचित अधिशेष
- RBI को जारी प्रतिभूतियाँ: घाटे का मुद्रीकरण (पैसा छापना)
बाह्य ऋण:
- बहुपक्षीय: विश्व बैंक (IBRD + IDA), एशियाई विकास बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक, एशियाई बुनियादी ढाँचा निवेश बैंक
- द्विपक्षीय: सरकार-से-सरकार ऋण (जापान, जर्मनी, फ्रांस, USA)
- NRI बॉण्ड: FCNR(B), NRE जमाएँ (RBI द्वारा जुटाई गई)
- ECB: बाह्य वाणिज्यिक उधार (निजी क्षेत्र; बाह्य ऋण सांख्यिकी में गिना जाता है)
भारत का सार्वजनिक ऋण प्रोफ़ाइल (2023-24):
- केंद्र सरकार का कुल ऋण: ₹172 लाख करोड़ (GDP का 84.5%)
- GDP के प्रतिशत के रूप में बाह्य ऋण: 18.8% (वैश्विक मानकों के अनुसार कम — अधिकांश ऋण घरेलू)
- IMF ऋण स्थिरता विश्लेषण 60% को इष्टतम मानता है; भारत का 84.5% ऊंचा है लेकिन उच्च घरेलू बचत दर के कारण प्रबंधनीय माना जाता है
5.2 ऋण प्रबंधन
RBI की भूमिका: भारतीय रिजर्व बैंक RBI अधिनियम की धारा 21 के तहत सरकार के ऋण प्रबंधक के रूप में कार्य करता है। यह प्रबंधित करता है:
- सरकारी प्रतिभूतियों का जारी करना (साप्ताहिक नीलामियाँ)
- खुले बाजार परिचालन (OMO) — तरलता प्रबंधन के लिए G-Secs की खरीद/बिक्री
- वेज एंड मीन्स एडवांस (WMA) — सरकार को वर्षांतर नकद प्रवाह असंतुलन के लिए अल्पकालिक ऋण
ऋण प्रबंधन उद्देश्य: दीर्घकालिक में टिकाऊ ऋण प्रक्षेपवक्र बनाए रखते हुए उधार की लागत को न्यूनतम करना।
सिंकिंग फंड: सरकार ऋण चुकौती के लिए भंडार बनाने हेतु समेकित सिंकिंग फंड और गारंटी मोचन निधि बनाए रखती है।
5.3 ऋण स्थिरता की चिंताएँ
- ब्याज-GDP अनुपात: भारत GDP का 5.1% ब्याज भुगतान पर खर्च करता है — अधिकांश उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अधिक
- रोलओवर जोखिम: अल्पकालिक ऋण का बड़ा हिस्सा पुनर्वित्त जोखिम पैदा करता है
- राज्य ऋण: राज्यों का संयुक्त ऋण GDP का अतिरिक्त ~28% जोड़ता है; संयुक्त सामान्य सरकारी ऋण (केंद्र + राज्य) ≈ GDP का 84.5%
