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संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
Q1 (5 अंक — 50 शब्द): राजकोषीय घाटा क्या है? 2025-26 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य बताइए।
आदर्श उत्तर:
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और उधार छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है — यह सरकार की शुद्ध उधार आवश्यकता के बराबर है। यह राजकोषीय असंतुलन का सबसे व्यापक माप है, जो मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और निजी निवेश को प्रभावित करता है। केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत का राजकोषीय घाटा ₹15.69 लाख करोड़, यानी GDP का 4.4% लक्षित है, जो 2024-25 के 4.9% से कम है, FRBM Act 2003 के तहत राजकोषीय समेकन पथ जारी है।
Q2 (5 अंक — 50 शब्द): वित्त आयोग क्या है? 15वें वित्त आयोग की भूमिका बताइए।
आदर्श उत्तर:
वित्त आयोग (Art. 280) केंद्र-राज्य राजस्व वितरण की सिफारिश के लिए हर 5 वर्ष में नियुक्त एक संवैधानिक निकाय है। 15वें वित्त आयोग (N.K. Singh, 2020-25) ने राज्यों को विभाज्य पूल से 41% हस्तांतरण की सिफारिश की (14वें FC के 42% बनाम — J&K पुनर्गठन के लिए 1% कम)। इसने राज्यों के स्व-कर प्रयास, स्वास्थ्य व्यय और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन से जुड़े प्रदर्शन-आधारित अनुदान की शुरुआत की, और 5 वर्षों में ₹101.4 लाख करोड़ के ऊर्ध्वाधर राजकोषीय हस्तांतरण की सिफारिश की।
Q3 (5 अंक — 50 शब्द): राजस्व घाटे और प्राथमिक घाटे में अंतर बताइए। उदाहरण सहित।
आदर्श उत्तर:
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ। यह दर्शाता है कि सरकार वर्तमान उपभोग के लिए उधार ले रही है या नहीं। बजट 2025-26 में: ₹37.09 लाख करोड़ − ₹34.20 लाख करोड़ = ₹2.89 लाख करोड़ (GDP का 0.8%)। प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। यह विरासत ब्याज दायित्वों को अलग करता है, दर्शाता है कि क्या वर्तमान राजकोषीय नीति नया ऋण जोड़ रही है। बजट 2025-26 में: ₹15.69 लाख करोड़ − ₹11.54 लाख करोड़ = ₹4.15 लाख करोड़ (GDP का 1.1%)।
Q4 (5 अंक — 50 शब्द): भारत की संचित निधि और आकस्मिकता निधि क्या है?
आदर्श उत्तर:
भारत की संचित निधि (Art. 266): सभी सरकारी राजस्व (कर, गैर-कर प्राप्तियाँ) और उधार इस निधि में जाते हैं। सभी व्यय इसी से किए जाते हैं। संसदीय विनियोग के बिना कोई निकासी नहीं। भारत की आकस्मिकता निधि (Art. 267): अनपेक्षित तत्काल व्यय के लिए राष्ट्रपति के अधीन ₹500 करोड़ की आपातकालीन निधि — संसद की पश्चात-अनुमोदन आवश्यक। यह सामान्य व्यय के लिए नहीं बल्कि प्राकृतिक आपदाओं या अचानक राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों जैसी वास्तविक आपात स्थितियों के लिए है।
Q5 (10 अंक — 150 शब्द): भारत के आर्थिक विकास में पूंजी व्यय की भूमिका की विवेचना करो। यह राजस्व व्यय से किस प्रकार भिन्न है?
आदर्श उत्तर:
पूंजी व्यय (Capex) सरकारी व्यय है जो टिकाऊ भौतिक या वित्तीय संपत्ति बनाता है — सड़कें, रेलवे, पुल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और PSEs में इक्विटी निवेश। इसके विपरीत, राजस्व व्यय चालू परिचालन को वित्तपोषित करता है — वेतन, सब्सिडी, ब्याज भुगतान और पेंशन।
विकास के लिए पूंजी व्यय क्यों महत्त्वपूर्ण:
- राजकोषीय गुणक: सरकारी पूंजी व्यय का गुणक 2.5–3x — हर ₹1 से ₹2.5–3 GDP सृजन होता है।
- बुनियादी ढाँचे की बाधा: रसद लागत GDP का 13–14% (विकसित देशों में 8%) — बुनियादी ढाँचे से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
- निजी निवेश भीड़-प्रवेश: हर ₹1 सार्वजनिक पूंजी व्यय ₹2.5 निजी पूंजी व्यय जुटाता है।
- रोजगार सृजन: PMGSY, PM आवास, जल जीवन मिशन — प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार।
भारत का पूंजी व्यय प्रक्षेपवक्र: ₹5.54 लाख करोड़ (2022-23) से ₹11.21 लाख करोड़ (2025-26 BE) — तीन वर्षों में लगभग दोगुना। राज्यों को ₹1.50 लाख करोड़ ब्याज-मुक्त पूंजी ऋण भी।
तुलना: राजस्व व्यय उत्पादक क्षमता नहीं बढ़ाता; ब्याज अकेले राजस्व व्यय का 31% उपभोग करता है।
Q6 (10 अंक — 150 शब्द): भारत की कराधान प्रणाली की संरचना समझाइए। GST ने अप्रत्यक्ष कराधान को कैसे बदला है?
आदर्श उत्तर:
भारत की कराधान प्रणाली एक समवर्ती संघीय संरचना है जहाँ केंद्र और राज्य संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत अलग-अलग कर लगाते हैं।
प्रत्यक्ष कर (केवल केंद्र):
- आयकर: प्रगतिशील स्लैब; बजट 2025-26 — नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक कोई कर नहीं; मानक कटौती ₹75,000
- निगम कर: घरेलू कंपनियों के लिए 25%; नई विनिर्माण कंपनियों के लिए 15%
- पूंजीगत लाभ कर: STCG 20%; LTCG 12.5%
GST पूर्व अप्रत्यक्ष कर: केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, CST, VAT, प्रवेश कर आदि — कर-पर-कर संचयन कीमतें बढ़ाता था।
GST — परिवर्तन (1 जुलाई 2017):
- 17 अप्रत्यक्ष करों की जगह "एक राष्ट्र एक कर"
- चार-दर संरचना: 5%, 12%, 18%, 28%
- ITC: इनपुट पर GST का क्रेडिट — संचयन समाप्त
- द्विस्तरीय GST: CGST + SGST (राज्य के भीतर); IGST (राज्यों के बीच)
- GST परिषद (Art. 279A): सहकारी संघवाद — केंद्र 1/3 + राज्य 2/3 मत
GST प्रभाव: GST अप्रैल 2024 में ₹2.10 लाख करोड़ (रिकॉर्ड); 1.4 करोड़ पंजीकृत करदाता। शेष मुद्दे: बीमा पर उच्च दर; क्षतिपूर्ति अवधि जून 2022 में समाप्त।
