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मुख्य बिंदु
केंद्रीय बजट 2025-26
- 1 फरवरी 2025 को प्रस्तुत किया गया
- कुल व्यय: ₹50.65 लाख करोड़
- कुल प्राप्तियाँ: ₹34.96 लाख करोड़ (उधार को छोड़कर)
- राजकोषीय घाटा: ₹15.69 लाख करोड़ (GDP का 4.4%)
राजस्व प्राप्तियाँ
- कर राजस्व: आयकर, GST, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क
- गैर-कर राजस्व: लाभांश, ब्याज, शुल्क
- कुल राजस्व प्राप्तियाँ (2025-26 BE): ₹34.20 लाख करोड़
- सकल कर राजस्व: ₹42.70 लाख करोड़ (राज्यों को हस्तांतरण के बाद)
राजस्व व्यय बनाम पूंजी व्यय
- राजस्व व्यय (वेतन, ब्याज, सब्सिडी, पेंशन) कोई संपत्ति नहीं बनाता: ₹37.09 लाख करोड़ (2025-26)
- पूंजी व्यय (बुनियादी ढाँचा, राज्यों को ऋण) संपत्ति बनाता है: ₹11.21 लाख करोड़ (GDP का 3.1%)
- उच्च पूंजी व्यय का जोर निवेश-नेतृत्व वाली विकास रणनीति को दर्शाता है
चार प्रकार के घाटे
- (क) राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
- (ख) राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ (उधार छोड़कर) — सबसे व्यापक माप
- (ग) प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
- (घ) प्रभावी राजस्व घाटा = राजस्व घाटा − पूंजीगत संपत्ति निर्माण हेतु अनुदान
राजकोषीय समेकन पथ
- लक्ष्य: GDP का 4.4% (2025-26), फिर 4.1% (2026-27)
- बजट 2024-25 का वास्तविक राजकोषीय घाटा GDP का 4.9% था
- FRBM अधिनियम 2003 का मूल वैधानिक लक्ष्य GDP का 3% था
- मध्यम अवधि पथ 4.5% से नीचे रहने का लक्ष्य रखता है
सार्वजनिक ऋण
- कुल सार्वजनिक ऋण (FY2023-24): लगभग ₹172 लाख करोड़ (GDP का 84.5%)
- आंतरिक ऋण: बाजार उधार, लघु बचत, भविष्य निधि
- बाह्य ऋण: बहुपक्षीय ऋण, द्विपक्षीय ऋण, NRI बॉण्ड
- उच्च घरेलू बचत दर इस स्तर को प्रबंधनीय मानती है
वित्त आयोग (Art. 280)
- हर 5 वर्ष में नियुक्त संवैधानिक निकाय
- केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व वितरण की सिफारिश करता है
- राज्यों को अनुदान-सहायता की भी सिफारिश करता है
- 16वाँ वित्त आयोग दिसंबर 2023 में डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में गठित; पुरस्कार अवधि 2026-31
15वाँ वित्त आयोग
- अवधि 2020-25, अध्यक्ष N.K. Singh
- विभाज्य पूल से 41% हस्तांतरण की सिफारिश (14वाँ FC 42% था, J&K-लद्दाख पुनर्गठन के लिए 1% कम)
- राज्यों के स्व-कर प्रयास से जुड़े प्रदर्शन-आधारित अनुदान की शुरुआत
- स्वास्थ्य व्यय और पोषण परिणामों से भी अनुदान को जोड़ा
FRBM अधिनियम 2003
- पूरा नाम: Fiscal Responsibility and Budget Management Act
- राजस्व घाटे को समाप्त करने और राजकोषीय घाटे को सीमित करने का आदेश
- NK Singh समिति (2017): निश्चित लक्ष्य के स्थान पर एक सीमा (1.7–3.5% राजकोषीय घाटा) की सिफारिश की
- एस्केप क्लॉज: राष्ट्रीय आपदा, सुरक्षा खतरे या संरचनात्मक सुधारों के दौरान लक्ष्य से 0.5% अधिक की अनुमति
राजकोषीय नीति के साधन
- विस्तारवादी: मंदी के दौरान कर कटौती + अधिक व्यय
- संकुचनकारी: मुद्रास्फीति के दौरान कर वृद्धि + व्यय में कटौती
- भारत ने COVID-19 के बाद रिकॉर्ड पूंजी व्यय और PLI योजनाओं के साथ विस्तारवादी नीति अपनाई
- बजट 2025-26 संकुचनकारी समेकन का संकेत देता है: घाटा 9.2% (2020-21) से 4.4% तक कम हुआ
GST — सबसे बड़ा कर सुधार
- 1 जुलाई 2017 से लागू, 17 केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष करों को समाहित किया
- GST संग्रह अप्रैल 2024 में ₹2.10 लाख करोड़ पार कर गया (अब तक का सर्वाधिक मासिक संग्रह)
- 2024-25 का औसत मासिक GST: ₹1.82 लाख करोड़
पूंजी व्यय गुणक
- पूंजी व्यय का राजकोषीय गुणक 2.5–3x है — सरकारी पूंजी व्यय का ₹1 ₹2.5–3 आर्थिक गतिविधि उत्पन्न करता है
- भारत का पूंजी व्यय ₹5.54 लाख करोड़ (2022-23) से बढ़कर ₹11.21 लाख करोड़ (2025-26 BE) हो गया
- तीन वर्षों में लगभग दोगुना होना बुनियादी ढाँचा-प्रथम विकास रणनीति को रेखांकित करता है
