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अनुमानित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
Q1. [5 अंक — 50 शब्द] FDI और FII/FPI में अंतर बताओ। भारत के लिए कौन अधिक लाभकारी है?
आदर्श उत्तर: FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रबंधन नियंत्रण (≥10% इक्विटी) वाला दीर्घकालिक सामरिक निवेश है — प्रौद्योगिकी, रोजगार और स्थिर पूंजी लाता है (जैसे Apple/Samsung फोन निर्माण)। FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) बिना प्रबंधन नियंत्रण के शेयर/बॉन्ड में अल्पकालिक निवेश है — अस्थिर "हॉट मनी" जो अचानक निकल सकती है। FDI अधिक फायदेमंद है: यह उत्पादक क्षमता बनाता है, प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करता है और रोजगार सृजित करता है, जबकि FPI मुख्यतः शेयर बाजार तरलता देता है।
Q2. [5 अंक — 50 शब्द] भुगतान संतुलन क्या है? इसके मुख्य घटक क्या हैं?
आदर्श उत्तर: भुगतान संतुलन (BoP) भारत और शेष विश्व के बीच सभी आर्थिक लेनदेन का RBI द्वारा व्यवस्थित अभिलेख है। इसके दो मुख्य घटक हैं: (1) चालू खाता — माल (मर्चेंडाइज), सेवाएँ (IT, पर्यटन) और अंतरण (प्रेषण) में व्यापार; और (2) पूंजी एवं वित्तीय खाता — FDI, FPI, बाह्य उधारी और RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव। लेखांकन दृष्टि से, BoP हमेशा संतुलित रहता है।
Q3. [5 अंक — 50 शब्द] भारत का चालू खाता घाटा क्या है? इसके कारण क्या हैं?
आदर्श उत्तर: भारत का चालू खाता घाटा (CAD) चालू खाते में निर्यात पर आयात की अधिकता है। 2023–24 में CAD $23.2 अरब (GDP का 0.7%) रहा — आरामदायक स्तर (टिकाऊ सीमा: GDP का 2–3%)। प्रमुख कारण: कच्चा तेल आयात ($218 अरब), सोना आयात ($45 अरब) और इलेक्ट्रॉनिक्स आयात ($80 अरब)। IT सेवाओं के अधिशेष ($147 अरब) और प्रेषण ($120 अरब) से आंशिक भरपाई होती है।
Q4. [10 अंक — 150 शब्द] भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की व्याख्या करो। समष्टि आर्थिक स्थिरता के लिए ये किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं?
आदर्श उत्तर: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार अप्रैल 2025 में लगभग $648 अरब थे — चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद विश्व में चौथे सबसे बड़े। इनमें विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ ($565 अरब), सोना ($67 अरब), SDR ($18 अरब) और IMF आरक्षित ट्रान्च ($4 अरब) शामिल हैं, जिन्हें RBI रखता है।
समष्टि आर्थिक स्थिरता के लिए महत्व:
1. विनिमय दर प्रबंधन: RBI भंडार का उपयोग विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के लिए करता है — रुपये की अत्यधिक गिरावट रोकने को डॉलर बेचता है। यह स्थिरता आयात मुद्रास्फीति और निवेशक अनिश्चितता घटाती है।
2. आयात कवर: भंडार वर्तमान गति से ~11 महीने के आयात को कवर करते हैं — 3-महीने की न्यूनतम सुरक्षा सीमा से काफी अधिक। यह 1991 जैसे भुगतान संतुलन संकट (तब $1.2 अरब — केवल 3 सप्ताह का आयात) को रोकता है।
3. साख संकेत: बड़े भंडार रेटिंग एजेंसियों (Moody's, S&P) को आर्थिक मजबूती का संकेत देते हैं, जिससे भारत कम दरों पर अंतरराष्ट्रीय उधार ले सकता है।
4. संप्रभु विश्वास: भंडार अचानक पूंजी पलायन की संवेदनशीलता घटाते हैं — विशेषकर महत्वपूर्ण जब FPI प्रवाह उछलता है (जैसे 2022 में US Fed दर वृद्धि के बीच FPIs ने $17 अरब निकाले)।
5. SDR और IMF टूलकिट: भारत के SDR होल्डिंग्स बिना शर्त तरलता देते हैं और बिना शर्तों के IMF आपातकालीन निधि तक पहुँच देते हैं।
बड़े भंडार के जोखिम: मामूली रिटर्न (US ट्रेजरी यील्ड); इन्हें बनाए रखने में अवसर लागत। RBI समय-समय पर बाह्य देनदारियों के अनुपात में इष्टतम भंडार स्तर की समीक्षा करता है।
Q5. [10 अंक — 150 शब्द] विदेशी सहायता के माध्यम से विकास वित्त भागीदार के रूप में भारत की भूमिका क्या है? उदाहरण सहित समझाओ।
आदर्श उत्तर: भारत मुख्यतः सहायता प्राप्त राष्ट्र से सक्रिय विकास वित्त भागीदार के रूप में बदल गया है, विशेषकर ग्लोबल साउथ में। यह बदलाव भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता, पड़ोस और अफ्रीका में सामरिक हितों तथा "साउथ-साउथ सहयोग" दर्शन को दर्शाता है।
प्राथमिक तंत्र — EXIM बैंक ऋण सीमाएँ (LOC): भारत ने बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं (रेलवे, सड़क, बिजली संयंत्र, सौर पार्क, अस्पताल) के लिए 63+ देशों को $30+ अरब रियायती ऋण दिए हैं। प्रमुख उदाहरण: बांग्लादेश ($7.36 अरब — रेलवे, सड़क, बिजली), श्रीलंका ($1.4 अरब), नेपाल ($1.6 अरब — जलविद्युत) और 42 अफ्रीकी राष्ट्र।
ITEC कार्यक्रम (1964 से): 160+ देशों के 12,000+ पेशेवरों/वर्ष को भारत में IT, शासन, स्वास्थ्य, रक्षा और कृषि में प्रशिक्षण।
पड़ोस-पहले कूटनीति: भारत की आपदा प्रतिक्रिया — नेपाल (2015 भूकंप: $1 अरब), श्रीलंका (2022 आर्थिक संकट: $4 अरब ऋण सीमा), मालदीव — औपचारिक LOC से परे द्विपक्षीय समर्थन।
बहुपक्षीय पहलें: भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA, 2015) और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI, 2019) की सह-स्थापना की।
भारत की सहायता विशिष्ट है: राजनीतिक शर्तों के बिना, भौतिक बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित, और भारतीय वस्तुओं-सेवाओं की माँग सृजित करती है (LOC परियोजनाओं में 65–70% भारतीय सामग्री)।
Q6. [5 अंक — 50 शब्द] तुलनात्मक लाभ क्या है? यह भारत की व्यापार संरचना को कैसे समझाता है?
आदर्श उत्तर: तुलनात्मक लाभ (डेविड रिकार्डो, 1817) कहता है कि देश को उन वस्तुओं में विशेषज्ञता करनी चाहिए जहाँ उसकी सापेक्ष अवसर लागत सबसे कम हो, भले ही दूसरे देश को सभी वस्तुओं में पूर्ण लाभ हो। भारत का व्यापार यही दर्शाता है: उन्नत राष्ट्रों से कम समग्र उत्पादकता के बावजूद, भारत को श्रम-गहन IT सेवाओं, जेनेरिक फार्मा, कपड़ा और रत्न प्रसंस्करण में तुलनात्मक लाभ है — इसीलिए ये भारत के $437 अरब माल और $340 अरब सेवा निर्यात में प्रमुख हैं।
