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विदेशी सहायता
5.1 सहायता प्राप्तकर्ता के रूप में भारत — ऐतिहासिक संदर्भ
भारत को अपने शुरुआती दशकों में महत्वपूर्ण विदेशी सहायता मिली।
प्रमुख सहायता कार्यक्रम:
- USA का PL-480 (1954): खाद्य घाटे वर्षों में रियायती खाद्य ऋण (1950–60 के दशक)
- विश्व बैंक IDA ऋण: विकास परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक रियायती ऋण
- UK DFID, जापान JICA: बुनियादी ढाँचा और सामाजिक क्षेत्र सहायता
भारत की वर्तमान ODA (आधिकारिक विकास सहायता) प्राप्ति:
- भारत 2014 में विश्व बैंक की IDA पात्रता से स्नातक हुआ — प्रति व्यक्ति आय सीमा पार की
- जापान JICA 0.1–1.4% ब्याज की मृदु दरों पर बड़े पैमाने के बुनियादी ढाँचा ऋण (मेट्रो, राजमार्ग) जारी रखता है
- विश्व बैंक IBRD ऋण (बाजार दरें) अभी भी सक्रिय: ~$20 अरब पोर्टफोलियो
5.2 सहायता दाता के रूप में भारत — "विकास भागीदार" की भूमिका
भारत सहायता प्राप्तकर्ता से ग्लोबल साउथ में तेजी से सक्रिय विकास भागीदार बन गया है।
EXIM बैंक ऋण सीमाएँ (LOC):
- वैश्विक स्तर पर विकास वित्त का भारत का प्राथमिक तंत्र
- कुल: 63+ देशों को $30+ अरब
- फोकस क्षेत्र: अफ्रीका (42 देश), दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया, लैटिन अमेरिका
- तंत्र: सरकार-से-सरकार रियायती दर पर ऋण (1–2.5% ब्याज, 20 साल अवधि, 5 साल की रियायत); 65–70% वस्तुएँ/सेवाएँ भारत से खरीदी जाती हैं
- वित्तपोषित परियोजनाएँ: रेलवे, सड़क, बिजली संयंत्र, सौर पार्क, अस्पताल, IT पार्क
प्रमुख द्विपक्षीय LOC उदाहरण:
- बांग्लादेश: $7.36 अरब (सड़क, रेलवे, बिजली — सबसे बड़ा भारत-बांग्लादेश LOC)
- श्रीलंका: $1.4 अरब (संकट समर्थन + बुनियादी ढाँचा)
- नेपाल: $1.6 अरब (जलविद्युत, संपर्क)
- म्याँमार: ₹4,500 करोड़ (कलादान बहु-आधार परियोजना)
- अफ्रीका (बहु): रेल, IT, दूरसंचार, सौर परियोजनाएँ
भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम (1964 से):
- 160+ देशों को कवर करता है; भारत में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए 12,000+ स्लॉट/वर्ष
- विषय: शासन, IT, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि
भारतीय विकास और आर्थिक सहायता योजना (IDEAS):
- EXIM बैंक पोर्टफोलियो का हिस्सा
- सरकारी अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान करती है
5.3 भारत के व्यापार समझौते
मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) और CEPAs:
| समझौता | भागीदार | वर्ष | स्थिति |
|---|---|---|---|
| ASEAN FTA (माल) | 10 ASEAN देश | 2010 | सक्रिय |
| भारत-कोरिया CEPA | दक्षिण कोरिया | 2010 | सक्रिय |
| भारत-जापान CEPA | जापान | 2011 | सक्रिय |
| भारत-UAE CEPA | UAE | फरवरी 2022 | सक्रिय (भारत का सबसे तेज FTA) |
| भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA | ऑस्ट्रेलिया | नवम्बर 2022 | सक्रिय |
| भारत-UK FTA | UK | जारी | वार्ता में |
| भारत-EU FTA | यूरोपीय संघ | जारी | वार्ता में |
| भारत-GCC FTA | खाड़ी सहयोग परिषद | जारी | वार्ता में |
| RCEP | 14 एशिया-प्रशांत देश | 2019: भारत निकला | भारत सदस्य नहीं |
भारत का RCEP निकास (नवम्बर 2019): भारत ने RCEP (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी) से निकासी की:
- चीनी माल की बाढ़ के विरुद्ध अपर्याप्त सुरक्षा
- सेवाओं में पारस्परिक बाजार पहुँच का अभाव (भारत का IT निर्यात)
- टैरिफ कटौती के आधार वर्ष पर अनसुलझे मुद्दे
- भारतीय कृषि और MSMEs को खतरा
विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023–28 (31 मार्च 2023 को शुरू):
- लक्ष्य: 2030 तक $2 ट्रिलियन कुल निर्यात (माल + सेवाएँ)
- प्रमुख प्रावधान:
- RODTEP (निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं कर माफी): निर्यात पर अंतर्निहित घरेलू करों की वापसी — MEIS का उत्तराधिकारी
- जिले निर्यात केंद्र के रूप में: प्रत्येक जिला कम से कम एक निर्यात उत्पाद विकसित करे
- अग्रिम प्राधिकरण और EPCG: निर्यात उत्पादन के लिए निविष्टियों का शुल्क-मुक्त आयात
- ई-कॉमर्स निर्यात: छोटे निर्माताओं को Amazon, Alibaba के माध्यम से निर्यात सक्षम करना
- माफी योजना: EPCG/अग्रिम लाइसेंस दायित्वों वाले निर्यातकों के लिए एकमुश्त निपटान
