सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
भुगतान संतुलन
3.1 भुगतान संतुलन की संरचना
भुगतान संतुलन (BoP) RBI द्वारा रखा गया एक व्यापक लेखांकन अभिलेख है, जो भारत और शेष विश्व के बीच सभी आर्थिक लेनदेन को ट्रैक करता है।
खाता 1: चालू खाता
- माल में व्यापार (माल/दृश्य व्यापार): भारत का लगातार घाटा
- सेवाओं में व्यापार (अदृश्य व्यापार): भारत का बड़ा अधिशेष (IT, सॉफ्टवेयर, व्यावसायिक प्रक्रिया)
- प्राथमिक आय: निवेश आय (लाभांश, मुनाफा, ब्याज) — भारत के लिए शुद्ध बहिर्प्रवाह
- द्वितीयक आय (अंतरण): प्रेषण (भारत के लिए शुद्ध अंतर्प्रवाह — $120 अरब)
खाता 2: पूंजी खाता
- पूंजी अंतरण (ऋण माफी, प्रवासी अंतरण)
- गैर-उत्पादित गैर-वित्तीय संपत्तियों का अधिग्रहण/निपटान
खाता 3: वित्तीय खाता
- FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश): दीर्घकालिक; $70.9 अरब अंतर्प्रवाह (2023–24)
- FPI/FII (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश): शेयर और बॉन्ड; अधिक अस्थिर
- बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECBs): कॉर्पोरेट विदेशी ऋण
- NRI जमा: अनिवासी भारतीयों की विदेशी मुद्रा जमा
- RBI की आरक्षित संपत्तियाँ (विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव)
BoP लेखांकन पहचान: चालू खाता + पूंजी खाता + वित्तीय खाता + त्रुटियाँ एवं चूक = 0
3.2 भारत का चालू खाता घाटा (CAD)
भारत संरचनात्मक चालू खाता घाटा चलाता है — यह निर्यात से अधिक माल आयात करता है। घाटे की आंशिक भरपाई सेवा अधिशेष और प्रेषण से होती है।
CAD डेटा (GDP का %):
- 2012–13: GDP का 4.8% — संकट स्तर, मुद्रा मूल्यह्रास (रुपया 68/$ तक गिरा)
- 2016–17: 0.6% — अनुकूल अवधि (कम तेल कीमतें)
- 2022–23: 2.0% — ऊंचा (यूक्रेन युद्ध के बाद तेल मूल्य उछाल)
- 2023–24: 0.7% — आरामदायक; गिरती तेल कीमतें और IT निर्यात वृद्धि से सहायता
CAD के कारण:
- तेल आयात (~$218 अरब कच्चा तेल): भारत अपना 85% कच्चा तेल आयात करता है। वैश्विक तेल कीमतें बढ़ने पर CAD स्वतः बढ़ता है।
- सोना आयात (~$45 अरब): भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता; सोने की माँग मूल्य-अप्रत्यास्थ है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स आयात (~$80 अरब): फोन, कंपोनेंट के लिए चीन पर भारी आयात निर्भरता — PLI इसे घटाने का प्रयास करती है।
CAD वित्तपोषण: पूंजी खाता अंतर्प्रवाह से वित्तपोषित — FDI, FPI, ECBs, NRI जमा। जब ये प्रवाह गिरते हैं (वैश्विक जोखिम विमुखता), रुपये पर दबाव बढ़ता है।
3.3 भारत के विदेशी मुद्रा भंडार
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार मुद्रा अस्थिरता और बाह्य भुगतान दायित्वों के विरुद्ध RBI का बफर हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार की संरचना (अप्रैल 2025, ~$648 अरब):
- विदेशी मुद्रा संपत्तियाँ (FCAs): ~$565 अरब (सबसे बड़ा घटक)
- सोना: ~$67 अरब
- SDRs (विशेष आहरण अधिकार, IMF): ~$18 अरब
- IMF के साथ आरक्षित ट्रान्च: ~$4 अरब
ऐतिहासिक प्रक्षेपवक्र:
- 1991 (BoP संकट): $1.2 अरब — केवल 3 सप्ताह का आयात
- 2000: $37 अरब
- 2010: $279 अरब
- 2020: $477 अरब
- अक्टूबर 2021: $642 अरब (सर्वकालिक उच्च)
- अप्रैल 2025: $648 अरब (सर्वकालिक उच्च के निकट)
विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व:
- अचानक पूंजी बहिर्प्रवाह के विरुद्ध बफर (विनिमय दर स्थिरता)
- आयात कवर: वर्तमान आयात दर पर 11+ महीने (सीमा: न्यूनतम 3 महीने)
- अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों को साख संकेत
- RBI को अत्यधिक रुपया अस्थिरता रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की अनुमति
