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अर्थशास्त्र

अनुमानित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

कृषि: उत्पादकता, भूमि सुधार, वित्त, विपणन, खाद्य सुरक्षा, खाद्य प्रसंस्करण

पेपर I · इकाई 2 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 26 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

अनुमानित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

Q1. [5 अंक — 50 शब्द] PM फसल बीमा योजना (PMFBY) क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताओ।

आदर्श उत्तर: PM फसल बीमा योजना (PMFBY), फरवरी 2016 में शुरू, भारत की प्रमुख फसल बीमा योजना है। किसान कम प्रीमियम देते हैं: खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5%, व्यावसायिक/बागवानी फसलों के लिए 5%; शेष सरकार देती है। 2023–24 तक किसानों को Rs 1.64 लाख करोड़ के दावे चुकाए गए। यह प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और मौसम जोखिमों से फसल हानि को कवर करती है।


Q2. [5 अंक — 50 शब्द] e-NAM क्या है? यह किसानों को कैसे लाभान्वित करता है?

आदर्श उत्तर: e-NAM (इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार), अप्रैल 2016 में शुरू, 23 राज्यों में 1,361 मंडियों को एकीकृत करने वाला ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल है (2024 तक)। किसान दूर से बाजारों में मूल्य खोज कर सकते हैं; खरीदार पारदर्शी रूप से ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह स्थानीय व्यापारियों का एकाधिकार तोड़ता है, बेहतर कीमत सुनिश्चित करता है, लेनदेन लागत घटाता है और किसानों को स्थानीय APMC से परे बेचने में सक्षम बनाता है, संचयी व्यापार Rs 3.07 लाख करोड़ से अधिक।


Q3. [5 अंक — 50 शब्द] राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 क्या है? यह किसे कवर करता है?

आदर्श उत्तर: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013, 81.35 करोड़ लोगों (भारत की 67% जनसंख्या) को सब्सिडी वाले खाद्यान्न का कानूनी अधिकार देता है — 75% ग्रामीण और 50% शहरी। लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति/माह 5 किलो अनाज मिलता है (चावल Rs 3/किलो, गेहूँ Rs 2/किलो)। जनवरी 2024 से (PMGKAY विलय के बाद) NFSA पात्रताएँ 5 वर्षों के लिए निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।


Q4. [10 अंक — 150 शब्द] भारत में भूमि सुधारों की स्थिति पर चर्चा करो। ये अधूरे क्यों रहे?

आदर्श उत्तर: स्वतंत्रता के बाद भारत में भूमि सुधारों के चार स्तंभ थे: जमींदारी/बिचौलियों का उन्मूलन, काश्तकारी सुधार, भूमि सीमा कानून और विखंडित जोतों का समेकन।

उपलब्धियाँ: जमींदारी उन्मूलन (1952–56) ने 2 करोड़ काश्तकारों को प्रत्यक्ष भूमिधारकों में बदला। काश्तकारों को भू-स्वामित्व की सुरक्षा मिली। सीमा कानून से अनुमानित 1.26 करोड़ एकड़ 56 लाख परिवारों में वितरित हुए। राजस्थान ने भूमि सुधार और जागीर अधिग्रहण अधिनियम (1952) प्रभावी ढंग से लागू किया।

अधूरे रहने के कारण: पहला, भूमि सीमाएँ प्रायः बहुत ऊँची रखी गईं और धार्मिक ट्रस्टों, बागानों, सार्वजनिक कंपनियों को छूट दी गई। दूसरा, बेनामी लेनदेन से जमींदार परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन काल्पनिक रूप से बाँटते रहे। तीसरा, शक्तिशाली भू-स्वामी जातियों ने राजनीतिक प्रभाव से क्रियान्वयन में विलंब और कमजोरी लाई। चौथा, न्यायिक चुनौतियों और कोर्ट स्थगनों ने पुनर्वितरण धीमा किया। पाँचवाँ, महिलाओं के भूमि अधिकार उपेक्षित रहे — 87% जोतें अभी भी पुरुषों के नाम (कृषि जनगणना 2015–16)। छठा, विखंडित जोतों का समेकन केवल पंजाब और हरियाणा में सफल रहा, बिहार या पूर्वी भारत में नहीं।

परिणाम: भूमि असमानता बनी है। भूमि वितरण का गिनी गुणांक ~0.74 (2015–16) है, जो आय असमानता से कहीं अधिक है। स्वामित्व योजना (2020) जैसे आधुनिक सुधार संपत्ति अधिकारों को डिजिटल करते हैं पर पुनर्वितरण नहीं करते।


Q5. [10 अंक — 150 शब्द] भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को समझाओ। इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रमुख पहलें क्या हैं?

आदर्श उत्तर: भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्पादन, खपत और निर्यात में विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा है। यह विनिर्माण GVA में ~8.4% और भारत के कुल निर्यात में ~13% का योगदान देता है। आकार के बावजूद, केवल ~2.2% कृषि उत्पाद प्रसंस्कृत होता है — चीन में 40% और USA में 70% की तुलना में — जो विशाल अप्रयुक्त संभावना दर्शाता है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) PM किसान संपदा योजना (PMKSY), 2017 के जरिए विकास की अगुवाई करता है। इसके घटकों में मेगा फूड पार्क (25 स्वीकृत, प्रत्येक को Rs 50 करोड़ अनुदान), एकीकृत कोल्ड चेन बुनियादी ढाँचा, अग्र-पश्च संबंध परियोजनाएँ और खाद्य सुरक्षा बुनियादी ढाँचा शामिल हैं। 2024 तक PMKSY ने 36.8 लाख MT अतिरिक्त प्रसंस्करण क्षमता और 7.8 लाख रोजगार सृजित किए।

PLI योजना (खाद्य प्रसंस्करण के लिए) (2021, Rs 10,900 करोड़) रेडी-टू-ईट, समुद्री, जैविक और अभिनव खाद्य उत्पादों को लक्षित करती है, जिसमें 175+ अनुमोदित कंपनियाँ Rs 33,494 करोड़ की बिक्री का अनुमान लगाती हैं।

एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जिला-विशिष्ट खाद्य उत्पादों को प्रसंस्करण और निर्यात के लिए बढ़ावा देता है। प्रमुख चुनौतियाँ: अपर्याप्त कोल्ड चेन (भारत को 10,000+ कोल्ड स्टोरेज की जरूरत), मानकीकरण का अभाव और खाद्य प्रौद्योगिकी में कौशल अंतराल। लक्षित निवेश से किसान आय दोगुनी हो सकती है और फसलोत्तर नुकसान (15–30%) कम हो सकता है।


Q6. [5 अंक — 50 शब्द] न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है? इसे कैसे निर्धारित किया जाता है?

आदर्श उत्तर: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 23 कृषि वस्तुओं के लिए सरकारी गारंटी मूल्य है, जो बाजार भाव गिरने पर किसानों को संकट बिक्री से बचाता है। CACP (कृषि लागत एवं मूल्य आयोग) तीन लागत अवधारणाओं से MSP की वार्षिक सिफारिश करता है: A2 (भुगतान लागत), A2+FL (पारिवारिक श्रम सहित) और C2 (भूमि किराया सहित व्यापक)। स्वामीनाथन आयोग ने C2+50% को MSP के रूप में अनुशंसित किया — जिसके कानूनी गारंटी की माँग किसान आज भी कर रहे हैं।