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भूमि सुधार
3.1 अवलोकन एवं ऐतिहासिक संदर्भ
स्वतंत्रता के समय भारत की कृषि संरचना सामंती थी: जमींदार और जागीरदार विशाल भूमि के स्वामी थे जबकि काश्तकार (रैयत) उच्च किराया देते थे और उनके पास कब्जे की कोई सुरक्षा नहीं थी। भूमि सुधारों को समता और उत्पादकता दोनों के लिए आवश्यक माना गया।
3.2 स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधारों के चार स्तंभ
स्तंभ 1: बिचौलियों का उन्मूलन (1952–1956)
- 1956 तक लगभग सभी राज्यों ने जमींदारी उन्मूलन अधिनियम पारित किए
- 2 करोड़ से अधिक काश्तकार प्रत्यक्ष भूमिधारक बने
- राज्यों ने जमींदारी बॉन्ड के जरिए जमींदारों को मुआवजा दिया
- राजस्थान ने जागीरदारी उन्मूलन के लिए भूमि सुधार एवं जागीर अधिग्रहण अधिनियम 1952 लागू किया
स्तंभ 2: काश्तकारी सुधार
- काश्तकारों को कब्जे की सुरक्षा — मनमाने ढंग से बेदखल नहीं किया जा सकता
- उचित किराया निर्धारण: आमतौर पर उपज का 1/4 से 1/6
- जोत खरीदने का अधिकार, काश्तकार स्वामित्व को सक्षम बनाता है
- क्रियान्वयन अलग-अलग रहा: केरल और पश्चिम बंगाल में सशक्त; बिहार और UP में कमजोर
स्तंभ 3: भूमि सीमा कानून
- सभी राज्यों में सीमा (अधिकतम भूमि धारण सीमा) लागू
- सीमा आमतौर पर 4–18 एकड़ (सिंचित) से 27–54 एकड़ (शुष्क भूमि) राज्यानुसार
- अधिशेष भूमि सीमा: अनुमानित 62.5 लाख एकड़ अधिशेष; ~1.26 करोड़ एकड़ 56 लाख परिवारों को वितरित (2010 तक)
- बेनामी जोत, परिवार विभाजन, अदालती विलंब और जमींदार लॉबी के कारण कमजोर क्रियान्वयन
स्तंभ 4: जोतों का समेकन
- विखंडित छोटे भूखंडों को व्यावहारिक कृषि इकाइयों में एकत्रित
- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी UP में सर्वोत्तम क्रियान्वयन
- बिहार, ओडिशा और असम में काफी हद तक अलागू नहीं
3.3 मूल्यांकन — उपलब्धियाँ और असफलताएँ
उपलब्धियाँ:
- जमींदारी समाप्त; सामंती कृषि संबंध औपचारिक रूप से समाप्त
- SC/ST भूमिहीन परिवारों को कुछ पुनर्वितरण
- काश्तकारी सुधारों ने कई राज्यों में अनेक काश्तकारों की स्थिति सुधारी
असफलताएँ:
- बेनामी जोतें: सीमा कानूनों को दरकिनार करने के लिए रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत भूमि
- सीमाएँ बहुत ऊँची और खराब ढंग से लागू: प्रमुख किसान जातियों का राजनीतिक विरोध
- दलित और आदिवासी आबादी को व्यवहार में अक्सर पुनर्वितरित भूमि नहीं मिली
- महिलाओं के भूमि अधिकार: 87% जोतें पुरुषों के नाम रहीं (कृषि जनगणना 2015–16)
- ग्रामीण-केंद्रित सुधारों ने शहरी भूमि सट्टे को पूरी तरह अनदेखा किया
3.4 भूमि अभिलेखों में हालिया विकास
- डिजिटल भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP): सभी राज्यों में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण
- स्वामित्व योजना (2020): 6.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों को आधार-लिंक्ड संपत्ति कार्ड प्रदान
