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परिचय एवं संदर्भ
आर्थिक वृद्धि और विकास किसी भी अर्थशास्त्र परीक्षा की आधारभूत अवधारणाएँ हैं। यद्यपि ये दोनों शब्द दैनिक भाषा में प्रायः एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, किन्तु आर्थिक सिद्धांत में इनके अर्थ भिन्न हैं। RPSC परीक्षकों ने इस अंतर (2021, 2 अंक) और इसके पर्यावरणीय आयाम (2023, NDC पर 10 अंक) को विशेष रूप से परखा है।
विषय 22 चार परस्पर संबद्ध विषयों पर विस्तृत है:
- वृद्धि और विकास के बीच वैचारिक अंतर
- मानव विकास का मापन (HDI और संबद्ध सूचकांक)
- भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ और नीति ढांचा
- पर्यावरण निम्नीकरण की समस्या
2026 परीक्षा के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है
भारत की आर्थिक यात्रा इस विषय को विशेष रूप से प्रासंगिक बनाती है। भारत एक साथ उच्च-वृद्धि अर्थव्यवस्था (6–7% वास्तविक GDP वृद्धि) और UNDP द्वारा "मध्यम मानव विकास" वर्गीकृत देश है — यह दर्शाता है कि वृद्धि अकेले विकास की गारंटी नहीं देती। भारत प्रमुख उत्सर्जक (चीन और USA के बाद तीसरा) और जलवायु परिवर्तन का अग्रिम पंक्ति का शिकार दोनों है, जो बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून और तटीय बाढ़ का सामना करता है।
इन पर प्रश्न की अपेक्षा करें:
- भारत के अपडेटेड NDC लक्ष्य
- GDP और HDI के बीच अंतर
- पेरिस समझौता और भारत की नेट-ज़ीरो प्रतिबद्धता
- हरित अर्थव्यवस्था की अवधारणाएँ
- SDGs — विशेषकर भारत की रैंकिंग और कार्यान्वयन ढांचा
