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आर्थिक वृद्धि बनाम विकास
2.1 आर्थिक वृद्धि: परिभाषा और मापन
आर्थिक वृद्धि से तात्पर्य किसी देश की उत्पादक क्षमता और वास्तविक उत्पाद में समय के साथ निरंतर वृद्धि से है। इसे सामान्यतः GDP (सकल घरेलू उत्पाद) या GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) द्वारा मापा जाता है और यह मूलतः एक मात्रात्मक अवधारणा है।
प्रमुख मापन अवधारणाएँ:
- बाजार मूल्यों पर GDP = C + I + G + (X – M) [व्यय विधि]
- वास्तविक GDP = मूल्य सूचकांक से अपस्फीत GDP (मुद्रास्फीति प्रभाव हटाता है)
- प्रति व्यक्ति GDP = GDP / जनसंख्या (औसत आय दर्शाता है)
- GNP = GDP + विदेश से शुद्ध कारक आय
- NNP (शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद) = GNP – मूल्यह्रास
- राष्ट्रीय आय (NI) = कारक लागत पर NNP
भारत के GDP आँकड़े (2024–25 अग्रिम अनुमान):
- वर्तमान मूल्यों पर GDP: Rs 324.11 लाख करोड़
- GDP वृद्धि (वास्तविक): 6.4%
- प्रति व्यक्ति आय (वर्तमान मूल्य): Rs 2,23,167
- GDP (PPP) के अनुसार भारत USA और चीन के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
कल्याण मापक के रूप में GDP की सीमाएँ:
- आय वितरण नहीं दर्शाता (जिनी गुणांक आवश्यक)
- अवैतनिक कार्य को नजरअंदाज करता है (घरेलू कार्य, देखभाल)
- पर्यावरण निम्नीकरण को सकारात्मक गिना जाता है (प्रदूषण सफाई GDP बढ़ाती है)
- जीवन गुणवत्ता, स्वतंत्रता या सुरक्षा नहीं दर्शाता
- काली अर्थव्यवस्था बाहर
2.2 आर्थिक विकास: एक बहुआयामी अवधारणा
आर्थिक विकास आय वृद्धि से आगे जाकर अर्थव्यवस्था और समाज के गुणात्मक परिवर्तन को समाहित करता है।
इसमें शामिल हैं:
- संरचनात्मक परिवर्तन (कृषि से उद्योग से सेवाओं की ओर बदलाव)
- गरीबी और असमानता में कमी
- स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार
- मानव क्षमताओं और स्वतंत्रताओं का विस्तार (सेन)
- संस्थागत विकास (कानून का शासन, संपत्ति अधिकार)
प्रमुख विकास सिद्धांत:
- W.W. Rostow की वृद्धि अवस्थाएँ (1960): पारंपरिक समाज → टेकऑफ की पूर्व-शर्तें → टेकऑफ → परिपक्वता की ओर → जन उपभोग (रैखिक, क्रमिक)
- संतुलित बनाम असंतुलित वृद्धि: Nurkse (संतुलित — सभी क्षेत्रों में एक साथ निवेश) बनाम Hirschman (असंतुलित — अग्रणी क्षेत्रों में निवेश कर संबंध बनाना)
- अमर्त्य सेन का क्षमता उपागम: विकास के रूप में स्वतंत्रता — केवल आय नहीं, लोगों की वास्तविक स्वतंत्रताओं का विस्तार; "Development as Freedom" (1999)
- हैरड-डोमर मॉडल: वृद्धि दर = बचत दर / पूंजी-उत्पाद अनुपात; भारत की प्रारंभिक पंचवर्षीय योजनाओं का आधार
2.3 समावेशी वृद्धि
यह अवधारणा भारत की 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012–17) में प्रमुखता से उभरी, जिसका शीर्षक था "तीव्र, सतत और अधिक समावेशी वृद्धि।"
प्रमुख तत्व:
- गरीबी उन्मूलन: MGNREGS, PMAY, PMJDY
- क्षेत्रीय समानता: आकांक्षी जिला कार्यक्रम (112 जिले)
- लैंगिक समानता: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, PM मातृ वंदना योजना
- वित्तीय समावेश: जन धन योजना (2025 तक 53+ करोड़ खाते), RuPay कार्ड
ट्रिकल-डाउन बनाम प्रत्यक्ष उपागम: साक्ष्य बताते हैं कि भारत में ट्रिकल-डाउन (वृद्धि → रोजगार → गरीबी उन्मूलन) धीरे काम करता है। प्रत्यक्ष हस्तक्षेप (DBT, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा) आवश्यक पूरक हैं।
