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इतिहास

अनुमानित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

विश्व युद्धों का प्रभाव, शीत युद्ध

पेपर I · इकाई 1 अनुभाग 11 / 13 0 PYQ 44 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

अनुमानित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्र.1 (5 अंक — 50 शब्द): प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करें।

आदर्श उत्तर:

WWI में कारखानों, परिवहन और नर्सिंग में 8 लाख ब्रिटिश महिलाएँ लगाई गईं — सैनिकों की जगह सीधे ले ली। WWII ने इसे वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया: USSR ने 8 लाख से अधिक महिलाओं को अग्रिम पंक्ति में तैनात किया ("नाइट विचेज़" बमवर्षक स्क्वाड्रन); USA की "रोज़ी द रिवेटर" रक्षा निर्माण में महिलाओं का प्रतीक बनी। युद्ध सेवा ने महिला मताधिकार को गति दी — ब्रिटेन ने 1918 में, फ्रांस ने 1944 में मत दिया, लिंग-भूमिकाओं को स्थायी रूप से बदला।


प्र.2 (5 अंक — 50 शब्द): वर्साय की संधि क्या थी? इसे द्वितीय विश्व युद्ध का कारण क्यों माना जाता है?

आदर्श उत्तर:

वर्साय की संधि (28 जून 1919) ने WWI को जर्मनी पर थोपते हुए समाप्त किया: "युद्ध-दोष" धारा (अनुच्छेद 231), 132 अरब सोने के मार्क की क्षतिपूर्ति, 13% भूभागीय हानि और सेना 1,00,000 तक सीमित। यह अपमान, आर्थिक तबाही के साथ मिलकर, चरम राष्ट्रवाद को पोषित किया — हिटलर ने Diktat का शोषण कर सत्ता पाई, जर्मनी को पुनः सशस्त्र किया, और अंततः पोलैंड पर आक्रमण कर WWII छेड़ा।


प्र.3 (5 अंक — 50 शब्द): क्यूबा मिसाइल संकट क्या था? इसका समाधान कैसे हुआ?

आदर्श उत्तर:

क्यूबा मिसाइल संकट (16–28 अक्टूबर 1962) तब उत्पन्न हुआ जब USA ने क्यूबा में स्थापित की जा रही सोवियत परमाणु मिसाइलें खोजीं। राष्ट्रपति केनेडी ने नौसैनिक नाकाबंदी लगाई। 13 तनावपूर्ण दिनों के बाद — विश्व परमाणु युद्ध के सबसे करीब — ख्रुश्चेव ने क्यूबा पर आक्रमण न करने के US वचन और तुर्की से US Jupiter मिसाइलों की गुप्त वापसी के बदले मिसाइलें हटाने पर सहमति दी। इसके बाद "हॉट लाइन" स्थापित हुई।


प्र.4 (5 अंक — 50 शब्द): गुटनिरपेक्ष आंदोलन क्या था? इसके गठन में भारत ने क्या भूमिका निभाई?

आदर्श उत्तर:

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) नव-स्वतंत्र राष्ट्रों का एक गुट था जिसने US-नेतृत्व वाले पश्चिमी या सोवियत पूर्वी शीत युद्ध गुटों में से किसी के साथ जुड़ने से मना किया। भारत के जवाहरलाल नेहरू ने बांडुंग सम्मेलन (अप्रैल 1955) में टीटो (युगोस्लाविया) और नासिर (मिस्र) के साथ NAM की सह-स्थापना की। पहला NAM शिखर सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड में 25 सदस्यों के साथ हुआ। भारत की गुटनिरपेक्षता पंचशील — शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांतों — पर आधारित थी।


प्र.5 (10 अंक — 150 शब्द): शीत युद्ध की उत्पत्ति, प्रमुख विशेषताओं और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा करें।

आदर्श उत्तर:

शीत युद्ध (1947–1991) USA-नेतृत्व वाले पूँजीवादी पश्चिमी गुट और USSR-नेतृत्व वाले साम्यवादी पूर्वी गुट के बीच वैचारिक, भू-राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता थी। यह WWII-पश्चात शक्ति-शून्यता, परस्पर-विरोधी विचारधाराओं और चर्चिल के "आयरन कर्टन" (1946) के पीछे पूर्वी यूरोप में सोवियत विस्तार से उभरी।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • गुट निर्माण: NATO (1949) बनाम WARSAW PACT (1955); मार्शल योजना बनाम Comecon
  • परमाणु शस्त्र दौड़: US परमाणु एकाधिकार (1945) से 1986 तक ~70,000 हथियारों के संयुक्त शस्त्रागार तक — MAD (पारस्परिक सुनिश्चित विनाश) द्वारा नियंत्रित
  • अंतरिक्ष दौड़: स्पुतनिक (1957) से चंद्र-अवतरण (1969) — तकनीकी प्रतिस्पर्धा और ICBM श्रेष्ठता के लिए सैन्य-रणनीतिक मुकाबला
  • प्रतिनिधि युद्ध: कोरिया (1950–53), वियतनाम (1955–75), अफ़ग़ानिस्तान (1979–89) — प्रत्यक्ष US-सोवियत युद्ध के बिना लाखों मारे गए
  • क्यूबा मिसाइल संकट (1962): परमाणु युद्ध के सबसे करीब; कूटनीति से समाधान; हॉट लाइन समझौते की ओर ले गया

वैश्विक प्रभाव:

  • महाशक्ति प्रतिस्पर्धा से उपनिवेशवाद-विरोध आकारित — नए राष्ट्रों ने विकास सहायता के लिए दोनों पक्षों का शोषण किया (NAM)
  • NPT (1968) ने वैश्विक परमाणु अप्रसार ढाँचा बनाया
  • शीत युद्ध सैन्यवाद ने अफ़ग़ानिस्तान, अंगोला, मध्य अमेरिका में स्थायी अस्थिरता छोड़ी
  • इसका अंत (1991) 15 नए राज्यों, NATO विस्तार, EU विस्तार और संक्षिप्त US एकध्रुवीय क्षण को जन्म दिया — इसके बाद चीन का उदय और नई बहुध्रुवीयता

प्र.6 (10 अंक — 150 शब्द): द्वितीय विश्व युद्ध के कारणों और वैश्विक परिणामों की व्याख्या करें।

आदर्श उत्तर:

द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) — 7–8.5 करोड़ मौतों के साथ इतिहास का सबसे घातक संघर्ष — WWI के अनसुलझे तनावों और 1930 के दशक के वैश्विक संकटों से उभरा।

कारण:

  • वर्साय की संधि का अपमान: युद्ध-दोष धारा, 132 अरब सोने के मार्क की क्षतिपूर्ति और भूभागीय हानि ने हिटलर के उदय के लिए उर्वर भूमि तैयार की
  • महामंदी (1929–33): जर्मनी में 60 लाख बेरोजगारों ने निराश मतदाताओं को चरमपंथ की ओर धकेला
  • तुष्टीकरण की विफलता: ब्रिटेन और फ्रांस ने म्यूनिख (1938) में हिटलर के आगे झुके — आगे की आक्रामकता को प्रोत्साहित किया
  • राष्ट्र संघ की असहायता: मंचूरिया पर जापान का आक्रमण (1931), इथियोपिया पर इटली की विजय (1935) रोकने में विफल
  • नाज़ी-सोवियत संधि (1939): हिटलर को पोलैंड पर आक्रमण (1 सितंबर 1939) के लिए मुक्त किया — प्रत्यक्ष उत्प्रेरक

वैश्विक परिणाम:

  • मानवीय तबाही: 7–8.5 करोड़ मृत; Holocaust (1.1 करोड़ व्यवस्थित रूप से हत्या); 6 करोड़ शरणार्थी
  • नई विश्व व्यवस्था: USA और USSR ने यूरोप-प्रधान बहुध्रुवीय व्यवस्था को प्रतिस्थापित किया; UN 24 अक्टूबर 1945 को P5 के लिए सुरक्षा परिषद वीटो के साथ स्थापित
  • उपनिवेशवाद-विरोध: थके हुए ब्रिटेन और फ्रांस साम्राज्य नहीं बनाए रख सके — भारत, पाकिस्तान (1947), बर्मा, इंडोनेशिया को स्वतंत्रता
  • परमाणु युग: हिरोशिमा (6 अगस्त 1945) ने पारंपरिक युद्ध श्रेष्ठता का अंत किया; परमाणु निरोध अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बना
  • जर्मनी विभाजित: बर्लिन दीवार (1961) शीत युद्ध का सबसे शक्तिशाली प्रतीक बनी
  • न्यूरेम्बर्ग मुकदमे (1945–46): मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही स्थापित — आधुनिक अंतरराष्ट्रीय कानून की नींव
  • कल्याणकारी राज्य: ब्रिटेन की NHS (1948) और यूरोपीय सामाजिक लोकतंत्र आंशिक रूप से युद्धकालीन राज्य-संगठन के पाठों पर निर्मित