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परिचय एवं संदर्भ
विषय 21 विश्व इतिहास के सबसे महत्त्वपूर्ण आधी सदी (1914–1991) को समेटता है: "युद्धों को समाप्त करने वाले युद्ध" से लेकर दूसरे और भी अधिक विनाशकारी संघर्ष तक, और फिर चार दशकों की द्विध्रुवीय महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता तक। इन घटनाओं ने विश्व का राजनीतिक मानचित्र पुनर्निर्मित किया, UN को जन्म दिया, परमाणु हथियारों को उजागर किया, उपनिवेशवाद-विरोध को गति दी, और 1991 तक अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आकार देने वाली द्विआधारी वैचारिक प्रतिस्पर्धा — पूँजीवाद बनाम साम्यवाद — को जन्म दिया।
RPSC के लिए इस विषय का महत्त्व
- विश्व युद्ध और शीत युद्ध पेपर I की इतिहास इकाई के भाग C (विश्व इतिहास) के अंतर्गत आते हैं
- 2023 के प्रश्नपत्र में सीधे विश्व युद्धों में महिलाओं की भूमिका (5 अंक) पूछी गई; 2026 के प्रश्नपत्र में शीत युद्ध के गुट, प्रतिनिधि युद्ध या UN की स्थापना पर प्रश्न आने की संभावना है
- WWI → वर्साय → फासीवाद का उदय → WWII → शीत युद्ध को एक सतत कारण-श्रृंखला के रूप में समझना 10-अंकीय विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए अनिवार्य है
पाठ्यक्रम का दायरा
यह विषय निम्नलिखित को समाहित करता है:
- WWI और WWII के कारण एवं परिणाम
- शीत युद्ध की उत्पत्ति, गुट एवं प्रमुख संकट
- प्रतिनिधि युद्ध और शस्त्र दौड़
- डेटाँत और शीत युद्ध का अंत
यह विषय विषय 20 (WWII के कारण के रूप में नाज़ीवाद/फासीवाद) और विषय 19 (शीत युद्ध की पूर्वशर्त के रूप में रूसी क्रांति) से परस्पर जुड़ा है।
