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शीत युद्ध संकट एवं प्रतिनिधि युद्ध
5.1 शीत युद्ध के प्रमुख संकट
बर्लिन नाकाबंदी और हवाई मार्ग 1948–49
पहला बड़ा शीत युद्ध टकराव तब हुआ जब पश्चिमी Allies ने पश्चिमी जर्मनी में नई मुद्रा (Deutschmark) शुरू की और USSR ने पश्चिमी बर्लिन के सभी थल मार्ग बंद कर दिए (जून 1948)। USA और ब्रिटेन ने एक विशाल हवाई मार्ग से जवाब दिया — 11 महीनों में 2,77,264 उड़ानों से 23 लाख टन आपूर्ति पहुँचाई। सोवियतों ने 12 मई 1949 को नाकाबंदी समाप्त की; पश्चिमी बर्लिन बचाया गया। NATO का गठन 4 अप्रैल 1949 को हुआ, आंशिक रूप से इसी के प्रत्यक्ष जवाब में।
कोरियाई युद्ध 1950–53
WWII के बाद, कोरिया 38वें समानांतर पर विभाजित हुआ — साम्यवादी उत्तर कोरिया (USSR और चीन द्वारा समर्थित) बनाम लोकतांत्रिक दक्षिण कोरिया (USA द्वारा समर्थित)। उत्तर कोरिया ने 25 जून 1950 को दक्षिण पर आक्रमण किया। UN सुरक्षा परिषद — USSR चीन की सीट पर बहिष्कार कर रहा था — ने US-नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय बल को अधिकृत किया। चीन ने नवंबर 1950 में 3 लाख सैनिकों के साथ हस्तक्षेप किया। 27 जुलाई 1953 को युद्धविराम — अनिवार्यतः 38वें समानांतर पर। कोरिया आज भी विभाजित है।
स्वेज संकट 1956
मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण किया (26 जुलाई 1956)। ब्रिटेन, फ्रांस और इसराएल ने गुप्त रूप से मिस्र पर हमला किया। USA (यूरोपीय उपनिवेशवाद से दूरी बनाने की कोशिश में) और USSR (लंदन और पेरिस पर रॉकेट हमले की धमकी देते हुए) दोनों ने आक्रांताओं को वापस हटने पर दबाव डाला। इससे पता चला कि यूरोपीय शक्तियाँ अब US अनुमोदन के बिना नहीं चल सकतीं — उत्तर-औपनिवेशिक विश्व व्यवस्था में एक मील का पत्थर।
हंगेरियन क्रांति 1956
हंगरी ने सुधारवादी प्रधानमंत्री इम्रे नाग्य के नेतृत्व में WARSAW PACT छोड़ने की कोशिश की। सोवियत संघ ने टैंकों से आक्रमण किया — 2,500 हंगेरियन मारे गए, 2 लाख शरणार्थी बने। पश्चिमी देशों ने निंदा की लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया — पश्चिमी शीत युद्ध वक्तव्य की सीमाएँ उजागर हुईं।
क्यूबा मिसाइल संकट अक्टूबर 1962
विश्व परमाणु युद्ध के सबसे करीब पहुँचा:
- 16 अक्टूबर: केनेडी को क्यूबा में निर्माणाधीन सोवियत मिसाइल स्थलों की U-2 तस्वीरें दिखाई गईं
- 22 अक्टूबर: केनेडी ने TV भाषण में नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की
- 24 अक्टूबर: सोवियत जहाज नाकाबंदी रेखा के पास पहुँचे — फिर वापस लौटे
- 26–27 अक्टूबर: केनेडी और ख्रुश्चेव के बीच पत्र; क्यूबा पर एक US U-2 मार गिराया गया
- 28 अक्टूबर: ख्रुश्चेव मिसाइलें हटाने पर सहमत; केनेडी ने क्यूबा पर आक्रमण न करने का वचन दिया; तुर्की से US Jupiter मिसाइलें गुप्त रूप से हटाई गईं
सीख: "हॉट लाइन" समझौता (जून 1963) — वाशिंगटन और मॉस्को के बीच सीधी टेलीफोन लिंक।
प्राग स्प्रिंग 1968
चेकोस्लोवाकियाई सुधारवादी नेता अलेक्जेंडर डुब्चेक ने "मानवीय चेहरे वाला समाजवाद" लागू करने की कोशिश की — सेंसरशिप ढीली करना, विपक्षी दलों की अनुमति। सोवियत संघ और WARSAW PACT ने अगस्त 1968 में 5 लाख सैनिकों के साथ चेकोस्लोवाकिया पर आक्रमण किया। ब्रेझनेव सिद्धांत ने किसी भी समाजवादी देश में जहाँ समाजवाद "खतरे में" हो, हस्तक्षेप के USSR के अधिकार की घोषणा की।
5.2 प्रतिनिधि युद्ध: दूसरे माध्यम से शीत युद्ध
वियतनाम युद्ध 1955–75
शायद सबसे महत्त्वपूर्ण प्रतिनिधि युद्ध। हो ची मिन्ह का साम्यवादी उत्तरी वियतनाम (USSR और चीन द्वारा समर्थित) दक्षिण वियतनाम (USA द्वारा समर्थित) से लड़ा। गल्फ ऑफ टोंकिन प्रस्ताव (अगस्त 1964) ने पूर्ण US भागीदारी अधिकृत की; US तैनाती चरम पर 5,43,000 सैनिक (1969) तक पहुँची।
प्रमुख घटनाएँ:
- टेट आक्रमण (जनवरी 1968): 100 दक्षिण वियतनामी शहरों पर एक साथ साम्यवादी हमले — अमेरिकी जनता स्तब्ध; युद्ध-विरोधी मत बदला
- पेरिस शांति समझौते (27 जनवरी 1973): US हटा; दक्षिण वियतनाम 30 अप्रैल 1975 को पतित; वियतनाम समाजवादी गणराज्य के रूप में एकीकृत
- लागत: 58,318 अमेरिकी मौतें; 30–40 लाख वियतनामी मौतें
अफ़ग़ानिस्तान 1979–89
उत्तर-शीत युद्ध का निर्णायक प्रतिनिधि युद्ध। USSR ने दिसंबर 1979 में साम्यवादी PDPA सरकार को बनाए रखने के लिए अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण किया। USA (कार्टर, फिर रेगन के नेतृत्व में) ने अफ़गान मुजाहिदीन को $3 अरब की गुप्त सहायता दी, जिसमें स्टिंगर वायु-रक्षा मिसाइलें शामिल थीं।
- 9 वर्षों का युद्ध: 15,000 सोवियत सैनिक मारे गए; 10–20 लाख अफ़गान मारे गए; 50 लाख शरणार्थी बने
- सोवियत फरवरी 1989 में हटे; अफ़ग़ानिस्तान गृहयुद्ध में डूबा — तालिबान के उदय और 9/11 की नींव बनी
अंगोला, मोज़ांबिक, कांगो, निकारागुआ, अल सल्वाडोर
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में USSR और क्यूबा ने वामपंथी मुक्ति आंदोलनों का समर्थन किया जबकि USA ने दक्षिणपंथी सरकारों या साम्यवाद-विरोधी विद्रोहियों का। इन संघर्षों में लाखों मारे गए और स्थायी राजनीतिक अस्थिरता छोड़ी।
भारत-पाकिस्तान युद्ध और शीत युद्ध
1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में शीत युद्ध के आयाम थे। USA ने पाकिस्तान का समर्थन किया (CENTO/SEATO का सदस्य); USSR ने भारत का समर्थन किया (भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि, अगस्त 1971)। 1971 के युद्ध में USA ने USS एंटरप्राइज़ वाहक समूह को बंगाल की खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन के रूप में भेजा — भारत और USSR ने इसे खतरे के रूप में देखा।
