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परिचय एवं संदर्भ
अंतर्युद्ध काल का संकट
अंतर्युद्ध काल (1919–39) में इटली में फासीवाद और जर्मनी में नाज़ीवाद का उदय आधुनिक इतिहास के सर्वाधिक विनाशकारी अध्यायों में से एक है। दोनों आंदोलन प्रथम विश्वयुद्ध के बाद के यूरोप के विशिष्ट संकटों से उभरे — जन-बेरोज़गारी, राष्ट्रीय अपमान और सामाजिक अस्थिरता को दूर करने में उदार लोकतंत्र की विफलता। दोनों का अंत विश्वयुद्ध और जनसंहार में हुआ।
अंतर्युद्ध काल में उग्रवाद के कारण
WWI के विनाशकारी परिणाम ने 1.7 करोड़ लोगों की जान ली और पूरे यूरोप की अर्थव्यवस्थाएँ चरमरा गईं। पुराने साम्राज्य — ऑस्ट्रियाई, ऑटोमन, रूसी — ढह गए और वाइमर जर्मनी तथा लोकतांत्रिक इटली जैसे नए लोकतांत्रिक राज्यों के पास कोई राजनीतिक परंपरा या वैधता नहीं थी।
आर्थिक अस्थिरता दो लहरों में आई:
- जर्मनी में हाइपरइन्फ्लेशन (1923)
- महामंदी (1929–33) — यूरोप और अमेरिका में 3 करोड़ बेरोज़गार
साम्यवाद का भय रूसी क्रांति (1917) के बाद फैला। यूरोपीय मध्यवर्ग और उद्योगपति साम्यवादी तख्तापलट से डरते थे, जिसने उग्र दक्षिणपंथी आंदोलनों को साम्यवाद-विरोधी ढाल के रूप में आकर्षक बनाया।
विफल शांति समझौतों ने दोनों देशों को क्षुब्ध किया:
- जर्मन वर्साय "डिक्टाट" से अपमानित थे
- इतालवी जीतने वाले पक्ष में होने के बावजूद "विश्वासघात" महसूस कर रहे थे
लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमज़ोरी घातक सिद्ध हुई। जर्मनी और इटली में संसदीय व्यवस्थाएँ स्थिर गठबंधन बनाने में विफल रहीं। लोकतांत्रिक नेताओं ने विनाशकारी भूल की — जर्मन रूढ़िवादियों ने सोचा कि वे हिटलर को "नियंत्रित" कर सकेंगे।
