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इटली में फासीवाद
2.1 WWI के बाद इटली — "अपंग विजय"
इटली ने 1915 में लंदन की संधि (1915) के तहत मित्र राष्ट्रों की ओर से WWI में प्रवेश किया था — दक्षिण टायरोल, डाल्मेशिया, ऑटोमन साम्राज्य के हिस्से और अफ्रीकी उपनिवेशों का वादा था। पेरिस शांति सम्मेलन (1919) में इटली को दक्षिण टायरोल और ट्रिएस्ट मिला, लेकिन डाल्मेशिया, फियूमे या विदेशी उपनिवेश नहीं।
इतालवी राष्ट्रवादियों ने इसे "अपंग विजय" (vittoria mutilata) कहा। 6,50,000 मृत और भारी कर्ज़ के बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने विश्वासघात किया।
आंतरिक समस्याएँ:
- आर्थिक अराजकता: मुद्रास्फीति, बेरोज़गारी, वापस लौटे सैनिकों को काम नहीं
- "लाल दो वर्ष" (बिएनियो रोसो, 1919–20): रूसी क्रांति से प्रेरित मजदूरों का कारखाना कब्जा; भूमिहीन किसानों द्वारा ज़मींदारी अतिक्रमण; सम्पत्तिशाली वर्गों में साम्यवादी क्रांति का भय
- संसदीय व्यवस्था गतिरोध में — गठबंधन सरकारें बनती और गिरती रहीं
2.2 मुसोलिनी का उदय
बेनिटो मुसोलिनी (1883–1945):
- प्रेदापियो, रोमाग्ना में जन्म; शिक्षक के पुत्र; पूर्व समाजवादी अखबार संपादक (अवांती!)
- इतालवी WWI भागीदारी का समर्थन करने पर 1914 में समाजवादी पार्टी से निष्कासित
- 23 मार्च 1919 को मिलान में फासी दि कॉम्बैटिमेंटो स्थापित की — दिग्गज सैनिकों, राष्ट्रवादियों और पूर्व समाजवादियों का मिश्रण
फासीवादी दस्ते (स्क्वाड्रिस्मो):
स्क्वाड्रिस्मो — काली कमीज़ पहने फासीवादी अर्धसैनिक — वामपंथी संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सहकारी समितियों पर व्यवस्थित हमले करते। वे अधिकारियों और उद्योगपतियों की मूक सहमति से काम करते जो समाजवाद से डरते थे। 1921 तक उन्होंने 726 श्रम कार्यालयों, 120 सहकारी खेतों पर हमले किए और सैकड़ों को मार डाला।
चुनावी राजनीति:
1921 में मुसोलिनी ने फासीवादी आंदोलन को राष्ट्रीय फासीवादी पार्टी (PNF) में रूपांतरित किया। नवम्बर 1921 चुनावों में PNF ने 535 में से केवल 35 सीटें जीतीं — बहुमत से बहुत दूर। सत्ता अन्य माध्यमों से आएगी।
रोम पर मार्च (28 अक्टूबर 1922):
मुसोलिनी ने चार दिशाओं से रोम पर लगभग 30,000 ब्लैकशर्ट फासीवादी मिलिशिया के शक्ति-प्रदर्शन का आयोजन किया। प्रधानमंत्री फाक्टा ने मार्शल लॉ माँगा; राजा ने इनकार किया (गृहयुद्ध के भय से) और मुसोलिनी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। मुसोलिनी मिलान से ट्रेन में पहुँचे। PNF के पास केवल 35 सीटों के बावजूद उनकी संवैधानिक नियुक्ति ने फासीवादी अधिग्रहण की शुरुआत की।
2.3 फासीवादी तानाशाही की स्थापना
1922–26 से तानाशाही:
- एकाशासन कानून (1923): चुनावी व्यवस्था में बदलाव — सर्वाधिक मत पाने वाली पार्टी को दो-तिहाई सीटें
- माटेओटी हत्याकांड (जून 1924): समाजवादी सांसद जियाकोमो माटेओटी की हत्या जब उन्होंने चुनावी धांधली का पर्दाफाश किया — सार्वजनिक आक्रोश; मुसोलिनी विपक्ष की जाँच से मुकरे
- 1925–26: सभी विरोधी दलों पर प्रतिबंध; स्वतंत्र प्रेस बंद; सांसदों की जगह मुसोलिनी-नियुक्त पोडेस्टा; पूर्ण फासीवादी एकदलीय राज्य
नियंत्रण के उपकरण:
- ओव्रा (गुप्त पुलिस): राजनीतिक असंतोष का दमन
- मिलिशिया (MVSN): फासीवादी पार्टी की अर्धसैनिक टुकड़ी
- युवा संगठन (बाल्लिला, अवांगार्दिस्टी): बच्चों का फासीवादी मूल्यों में संस्कार
- प्रचार: रेडियो, फिल्म, इस्टितूतो लूस के माध्यम से मुसोलिनी को इल दूचे (नेता) के रूप में महिमामंडन
विदेश नीति:
- इथियोपिया पर आक्रमण (अक्टूबर 1935): रासायनिक हथियारों से जातीय नरसंहार; League of Nations की निंदा
- रोम-बर्लिन धुरी (अक्टूबर 1936): हिटलर के साथ गठबंधन
- नस्लीय कानून (1938): यहूदियों पर जर्मन दबाव में प्रतिबंध लगाए
- अंत: मुसोलिनी को 28 अप्रैल 1945 को इतालवी पक्षपातियों ने गोली मारी
