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रूसी क्रांति
4.1 पृष्ठभूमि और कारण
क्रांति की पूर्वसंध्या पर ज़ारशाही रूस
1914 तक रूस एक विशाल किंतु आंतरिक रूप से नाजुक साम्राज्य था — रोमानोव वंश 1613 से शासन कर रहा था। प्रमुख संरचनात्मक समस्याएँ थीं:
- निरंकुशता: ज़ार निकोलस II (शासनकाल 1894–1917) राजा के दैवीय अधिकार में विश्वास रखते थे; अर्थपूर्ण संवैधानिक सुधार से इनकार
- किसान गरीबी: रूस की 80% जनसंख्या किसान थी; भूदास-मुक्ति (1861) के बाद उन्हें छोटे भूखंड और भारी मोचन भुगतान मिले
- औद्योगिक मजदूर: तेज औद्योगीकरण (1890–1910) ने सेंट पीटर्सबर्ग, मॉस्को, कीव में एक छोटा किंतु उग्र शहरी सर्वहारा वर्ग बनाया — जो मार्क्सवादी विचारों से परिचित था
- रूस-जापान युद्ध में हार (1905): सैन्य अक्षमता उजागर हुई; 1905 की क्रांति उत्पन्न हुई — रक्त रविवार (9 जनवरी 1905) को सैनिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, ~200 मारे गए; ज़ार ने ड्यूमा (संसद) का वादा करते हुए अक्टूबर घोषणापत्र जारी किया
प्रेरक के रूप में WWI
रूस अगस्त 1914 में WWI में शामिल हुआ। 1916 तक स्थिति भयावह थी: 17 लाख मृत, 50 लाख घायल, 20 लाख युद्धबंदी। सेना बुरी तरह से सज्जित और नेतृत्वहीन थी। खाद्य संकट गंभीर था और मुद्रास्फीति ने मजदूरी को खोखला कर दिया। ज़ार ने 1915 से सामने से स्वयं सेना की कमान सँभाली — सैन्य विफलताओं की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ले ली।
रासपुतिन कांड
ग्रिगोरी रासपुतिन — एक साइबेरियाई रहस्यवादी जो हेमोफीलिया-ग्रस्त युवराज अलेक्सी की मदद करता प्रतीत होता था — ज़ारिना एलेग्जेंड्रा का विश्वास पाता था और नियुक्तियों व नीति को प्रभावित करता था। इससे दरबार की साख व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुई।
प्रमुख राजनीतिक दल
- बोल्शेविक: रूसी सामाजिक लोकतांत्रिक श्रमिक दल का बहुमत वाला गुट; व्लादिमीर इलिच लेनिन (1870–1924) के नेतृत्व में; सर्वहारा वर्ग का नेतृत्व करने वाले अनुशासित "अग्रणी दल" में विश्वास; तात्कालिक समाजवादी क्रांति की वकालत
- मेंशेविक: अल्पमत वाला गुट; मानते थे कि क्रांति को पहले बुर्जुआ-लोकतांत्रिक चरण से गुजरना होगा
- समाजवादी क्रांतिकारी (SR): किसान हितों का प्रतिनिधित्व; संविधान सभा में सबसे बड़ा दल
- कैडेट (संवैधानिक लोकतंत्रवादी): उदारवादी मध्यवर्गीय दल; संसदीय लोकतंत्र चाहते थे
4.2 फरवरी क्रांति (नई शैली कैलेंडर में मार्च 1917)
पेत्रोग्राद में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विरोध (8 मार्च 1917 NS) की शुरुआत महिला रोटी-दंगाइयों से हुई जिनमें वस्त्र मजदूर भी शामिल हो गए। कुछ ही दिनों में पेत्रोग्राद में 2 लाख मजदूर हड़ताल पर थे। जब ज़ार ने सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दिया, तो वे भी प्रदर्शनकारियों से जा मिले। पेत्रोग्राद सोवियत (मजदूरों और सैनिकों के प्रतिनिधियों की परिषद) गठित हुई।
ज़ार निकोलस II ने 15 मार्च 1917 को त्यागपत्र दिया, जिससे 304 वर्षों का रोमानोव शासन समाप्त हुआ। एक अनंतिम सरकार बनी (पहले प्रिंस ल्वोव, फिर केरेंस्की के अधीन)।
दोहरी सत्ता उभरी: अनंतिम सरकार और पेत्रोग्राद सोवियत समानांतर चले, सोवियत आदेश संख्या 1 (सैनिक अधिकारियों की नहीं, सोवियत की आज्ञा मानें) के माध्यम से सेना को नियंत्रित करती थी।
4.3 लेनिन की वापसी — अप्रैल थीसिस
लेनिन स्विट्जरलैंड में निर्वासन में थे। जर्मन सरकार ने, रूस को अस्थिर करने की उम्मीद में, उन्हें "सीलबंद ट्रेन" में पेत्रोग्राद पहुँचाया (अप्रैल 1917)। वहाँ पहुँचते ही उन्होंने अप्रैल थीसिस जारी की:
- अनंतिम सरकार का कोई समर्थन नहीं
- साम्राज्यवादी युद्ध तुरंत समाप्त करो
- समस्त सत्ता सोवियतों को
- किसानों को भूमि (जमींदारों की संपत्ति जब्त करो)
नारा: "शांति, ज़मीन, रोटी" (मीर, ज़ेम्ल्या, ख्लेब)
4.4 अक्टूबर क्रांति (नवम्बर 1917 NS)
केरेंस्की का जुलाई आक्रमण बुरी तरह विफल रहा, जिससे सेना और जनता दोनों अलग हो गए। अनंतिम सरकार ने संविधान सभा चुनाव टाले और युद्ध जारी रखा — तेजी से वैधता खो रही थी।
25–26 अक्टूबर की रात (7 नवम्बर NS):
- लियोन त्रॉट्स्की ने लाल रक्षकों और सैन्य क्रांतिकारी समिति का संगठन किया
- बोल्शेविक बलों ने शीतकालीन महल, रेलवे स्टेशनों, डाकघरों, टेलीग्राफ और पुलों पर नियंत्रण लिया — लगभग बिना रक्तपात के
- समस्त-रूसी सोवियत काँग्रेस ने बोल्शेविक अधिग्रहण को अनुमोदित किया
- शांति पर फरमान (जर्मनी के साथ युद्धविराम) और भूमि पर फरमान (किसानों को पुनर्वितरण) तुरंत जारी किए गए
4.5 बोल्शेविक सत्ता का सुदृढ़ीकरण
ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि (3 मार्च 1918)
रूस ने पोलैंड, फिनलैंड, यूक्रेन, बाल्टिक राज्य और बेलारूस जर्मनी को सौंपे। यह अपमानजनक शांति थी किंतु लेनिन ने तर्क दिया कि क्रांति बचाने के लिए यह आवश्यक था।
रूसी गृहयुद्ध (1918–21)
- लाल सेना (बोल्शेविक, त्रॉट्स्की द्वारा संचालित) बनाम श्वेत सेना (पूर्व ज़ारशाही अधिकारी, समाजवादी क्रांतिकारी, मेंशेविक, पश्चिम-समर्थित हस्तक्षेपवादी)
- मित्र देशों का हस्तक्षेप: ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, जापान ने श्वेत सेना की सहायता को सैनिक भेजे
- लाल आतंक: बोल्शेविकों ने राजनीतिक विरोधियों को फाँसी दी, जिसमें ज़ार निकोलस II और उनके परिवार को येकातेरिनबर्ग में (17 जुलाई 1918) शामिल किया
- लाल सेना की विजय (1921): बोल्शेविकों ने रूस पर नियंत्रण पक्का किया
सोवियत राज्य-निर्माण
- नई आर्थिक नीति (NEP, 1921): युद्ध-साम्यवाद के बाद बाजार अर्थव्यवस्था की ओर आंशिक वापसी; किसानों को अधिशेष बेचने की अनुमति; अर्थव्यवस्था स्थिर हुई
- USSR गठित (30 दिसम्बर 1922): सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ — 4 मूल गणराज्य (रूस, यूक्रेन, बेलारूस, ट्रांसकॉकेशिया)
- लेनिन की मृत्यु (जनवरी 1924): स्टालिन ने क्रमशः सत्ता सुदृढ़ की; त्रॉट्स्की और अन्य को पराजित किया; 1929 तक निर्विवाद नेता बने
4.6 रूसी क्रांति का वैश्विक प्रभाव
- पहला साम्यवादी राज्य: विश्वभर में साम्यवादी दलों को प्रेरित किया; कम्युनिस्ट इंटरनेशनल (कॉमिन्टर्न, 1919) ने वैश्विक क्रांतिकारी गतिविधि का संगठन किया
- शीत युद्ध की नींव: सोवियत राज्य पूँजीवादी पश्चिम का मुख्य वैचारिक और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बना — WWII के बाद सीधे शीत युद्ध को जन्म दिया
- औपनिवेशिक विश्व: लेनिन की "साम्राज्यवाद, पूँजीवाद की उच्चतम अवस्था" (1916) ने एशिया और अफ्रीका के उपनिवेश-विरोधी आंदोलनों को वैचारिक ढाँचा दिया; भारतीय राष्ट्रवादी (नेहरू, बोस) प्रभावित हुए
- कल्याणकारी राज्य: साम्यवादी क्रांति के भय ने पश्चिमी सरकारों को सामाजिक सुधार लागू करने पर विवश किया — बेरोजगारी बीमा, पेंशन, सार्वभौमिक मताधिकार
- महिला अधिकार: बोल्शेविक पहली सरकार थे जिन्होंने तलाक, गर्भपात को वैधानिक बनाया और महिलाओं को पूर्ण राजनीतिक समानता दी (1917) — अधिकांश पश्चिमी लोकतंत्रों से दशकों पहले
